25 साल पुराना है समलैंगिकों के संघर्ष का इतिहास, धारा-377 पर कब-कब आए बड़े टि्वस्‍ट

25 साल पुराना है समलैंगिकों के संघर्ष का इतिहास, धारा-377 पर कब-कब आए बड़े टि्वस्‍ट

Dhirendra Mishra | Publish: Sep, 06 2018 01:54:39 PM (IST) राजनीति

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में धारा 377 को आज से समाप्‍त घोषित किया।

नई दिल्ली। आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसले में आईपीसी की धारा 377 को रद्द कर दिया। इस प्रावधान की वजह से अभी तक बालिगों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंध भी अपराध था। लेकिन आज सीजेआई सहित सभी जजों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग फैसले सुनाए, पर सभी के फैसले एक समान थे। पांच सदस्‍यीय पीठ ने अपने फैसले में धारा 377 को आज से समाप्‍त घोषित कर दिया। लेकिन बहुत कम लोग जनते हैं समलैंगिकों को अपने जैविक निजता के इस अधिकार को किन-किन चरणों को पार करते हुए हासिल किया।

संघर्ष का इतिहास :


1. 1994
तिहाड़ जेल में पुरुष कैदियों को कॉन्‍डम रखने पर प्रतिबंध के बाद एड्स भेदभाव विरोधी आंदोलन नाम के एनजीओ ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आईपीसी की धारा 377 को खत्‍म करने की मांग की।

2. 2001
इसके बाद नाज फाउंडेशन ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल कर 1862 से ब्रिटिश शासनकाल से चले आ रही धारा को खत्‍म करने की मांग की।

3. 2004-2008
दिल्‍ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, ऐक्टिविस्‍टों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसने हाईकोर्ट को फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा।
इस मामले में केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए और समय की मांग की, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने विरोधाभासी हलफनामे दाखिल किए। केंद्र ने गे-सेक्‍स को अनैतिक बताते हुए इसे अपराध माने जाने की दलील दी।
हाईकोर्ट ने गे-सेक्‍स को अनैतिक बताने की दलील को खारिज किया और वैज्ञानिक सबूतों की मांग की। केंद्र ने कहा कि इस पर संसद को ही फैसला करना चाहिए।

4. दो जुलाई, 2009
दिल्‍ली हाईकोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया।

5. 2009-2012
कई धार्मिक समूहों और व्‍यक्तियों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

6. दिसंबर 11, 2013
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली हाईकोर्ट के 2009 के फैसले को पलटा, मसले पर फैसला संसद पर छोड़ा।

7. 2015
लोकसभा ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर की तरफ से समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए लाए गए प्राइवेट मेंबर बिल के खिलाफ वोट दिया।

8. अगस्‍त, 2017
सुप्रीम कोर्ट की टिप्‍पणी- सेक्‍शुअल ओरिएंटेशन किसी भी व्‍यक्ति का निजी मामला।

9. जनवरी, 2018
सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंन ने 2013 के फैसले पर पुनर्विचार का फैसला किया, मामले को बड़ी बेंच में भेजा गया।

10. जुलाई, 2018
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब यह बेंच के ऊपर है कि वह गे-सेक्‍स पर 150 साल पुराने प्रतिबंध पर क्‍या फैसला ले।

11. छह सितंबर, 2018
सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया।

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