हिमाचल में चुनाव की घोषणा के साथ शुरू हुई बिहार के इस मंत्री की अग्निपरीक्षा

Rahul Chauhan

Publish: Oct, 13 2017 05:48:52 (IST)

Political
हिमाचल में चुनाव की घोषणा के साथ शुरू हुई बिहार के इस मंत्री की अग्निपरीक्षा

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 68 सीटें हैं और भाजपा का मुख्य मुकाबला वहां हर सीट पर कांग्रेस से होगा।

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया। तारीख की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। प्रदेश में चुनाव केवल एक चरण में होंगे। मतदान की तारीख 9 नवंबर व मतगणना 18 दिसंबर को होगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर हिमाचल प्रदेश में चुनाव की तारीख के ऐलान के साथ ही बिहार सरकार के एक मंत्री की अग्निपरीक्षा क्यों शुरू हो गई? इसके लिए हम बताते हैं आपको आगे की कहानी।

दरअसल बात यह है कि बिहार के पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व नीतीश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे हिमाचल में बीजेपी के प्रभारी हैं। नीतीश कुमार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनने से पहले ही मंगल पांडे हिमाचल प्रदेश में भाजपा के प्रभारी हैं। इसी साल मई महीने में हिमाचल के प्रभारी का दायित्व मिलने से पहले मंगल पांडे बिहार भाजपा के अध्यक्ष थे और उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें हिमाचल की नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वजह साफ है कि हिमाचल विधानसभा चुनाव में प्रदेश प्रभारी के नाते मंगल पांडे को भाजपा को सत्ता में लाने और सभी स्थानीय नेताओं में तालमेल बिठाने की बढ़ी जिम्मेदारी है।

अगर हिमाचल में प्रभारी के तौर पर मंगल पांडे के प्रदर्शन को देखें तो कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी की नैया पार लगती दिख रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि हिमाचल के प्रभारी बनने के 1 महीने बाद जून में प्रदेश में नगर निगम के चुनाव हुए जिसमें भाजपा ने 34 में से 17 सीटों पर अपना कब्जा जमाया। भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में मंगल पांडे के नेतृत्व में नगर निगम चुनाव में 31 साल के बाद सत्ता में वापसी की थी। इसका मतलब यह है कि 1 महीने के अंदर मंगल पांडे ने हिमाचल प्रदेश में भाजपा के लिए जो विजय पताका फहराई उस प्रदर्शन को एक बार फिर विधानसभा में भी दोहराने की चुनौती होगी।

हिमाचल में चुनावी तारीख के ऐलान के साथ ही अभी से यह तय हो गया है की स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे अगले कुछ दिनों तक बिहार में कम और हिमाचल में ज्यादा नजर आएंगे। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 68 सीटें हैं और भाजपा का मुख्य मुकाबला वहां हर सीट पर कांग्रेस से होगा। पिछले 2012 के चुनाव में कांग्रेस को 36 और भाजपा को 27 सीटें मिलीं थीं। 1990 के बाद से राज्य में कोई भी पार्टी लगातार दो कार्यकाल के लिए नहीं चुनी गई है और इस बार भी इसकी उम्मीद कम ही है। सत्ता विरोधी लहर और सीएम वीरभद्र के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे होने के कारण भाजपा की स्थिति कुछ हज तक मजबूत कही जा सकती है। वैसे असली फैसला तो 18 दिसंबर की मतगणना के बाद ही सामने आएगा।

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