अरुण जेटली वकील नहीं चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते थे, फिर ऐसे उतरे राजनीति में

  • लंबी बीमारी के बाद अरुण जेटली का निधन
  • वकालत की जगह सीए बनना चाहते थे जेटली
  • अरुण जेटली की शिक्षा दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई

By: Prashant Jha

Updated: 24 Aug 2019, 10:39 PM IST

नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) अब इस दुनिया में नहीं रहे। शनिवार को 66 वर्ष की उम्र में उन्होंने एम्स (AIIMS) में आखिरी सांस ली। जेटली को सांस में तकलीफ होने से 9 अगस्त को एम्स में भर्ती करवाया गया था। अरुण जेटली छात्र जीवन से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करते रहे। अरुण जेटली की शिक्षा दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई थी। बचपन से जेटली पढ़ने लिखने के शौकीन थे। जेटली चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते थे। लेकिन वो फिर वकील बन गए।

CA बनना चाहते थे जेटली

अरुण जेटली चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते थे। लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने वकालत का रास्ता ही अपनाया। दिल्ली यूनिवर्सिटी से सन 1977 में लॉ की डिग्री लेने के बाद अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट और देश के कई हाई कोर्टों में वकालत करने लगे। जनवरी 1990 में अरुण जेटली को दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ वकील नामित किया। अरुण जेटली की वकालत को देखते हुए सन 1989 में वीपी सिंह की सरकार में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया ।

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UN में भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए

जेटली को बोफोर्स घोटाले की जांच तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया। जेटली भारतीय ब्रिटिश विधिक न्यायालय के समक्ष 'भारत में भ्रष्टाचार और अपराध' विषय पर दस्तावेज प्रस्तुत किए। जून 1998 में नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून को अधिनियमित करने के मकसद से आयोजित संयुक्त राष्ट्र संघ सम्मेलन में भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए ।

अरुण जेटली वकील नहीं चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते थे, फिर ऐसे उतरे राजनीतिक सफर में

1999 में अटल सरकार में मंत्री भी बने

1977 में जेटली जनसंघ में शामिल हुए। और इसी साल उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सचिव और फिर 1980 में अध्यक्ष बनाया गया। वे 1991 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने। वे 1999 के आम चुनाव से पहले भाजपा के प्रवक्ता थे। 1999 में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के सत्ता में आने पर जेटली को सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। जुलाई 2002 में उन्हें भाजपा का सचिव बनाया गया। हालांकि 2004 में एनडीए की सरकार हटने के बाद वो महासचिव बने और वकालत भी करने लगे।

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मोदी सरकार में वित्त मंत्री के अलावा कई अन्य मंत्रालय का पदभार भी संभाला

जेटली 2009 से 2014 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में वित्त मंत्री बने। इसके अलावा कॉर्पोरेट मामलों और रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त पदभार भी दिया गया था। वे 27 मई 2014 से 14 मई 2018 तक केंद्रीय वित्त एवं कार्पोरेट मामलों के मंत्री रहे।

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