वित्त मंत्री ने विजय माल्या के दावे को बताया झूठा, केजरीवाल ने कहा देश को सच बताएं पीएम मोदी

वित्त मंत्री ने विजय माल्या के दावे को बताया झूठा, केजरीवाल ने कहा देश को सच बताएं पीएम मोदी

Mangala Prasad Yadav | Publish: Sep, 12 2018 07:44:56 PM (IST) | Updated: Sep, 12 2018 08:59:29 PM (IST) राजनीति

जेटली के बयान के बाद विजय माल्या ने भी सफाई दी है। माल्या ने कहा कि जेटली से कोई औपचारिक मुलाकात नहीं थी।

नई दिल्लीः शराब कारोबारी विजय माल्या उस बयान के बाद हंगामा मच गया है जिसमें उसने देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने की बात कही थी। सफाई देने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली खुद सामने आए हैं। ट्विटर पर वित्त मंत्री ने माल्या के दावे को झूठा करार दिया है। जेटली ने कहा है कि माल्या का सेटलमेंट संबंधी दावा बिल्कुल ही गलत है। ट्विटर पर जेटली ने लिखा है कि साल 2014 के बाद से मैंने विजय माल्या कोई मुलाकात नहीं की है। उन्होंने कहा कि संसद में माल्या से उस वक्त मुलाकात हुई थी जब वह राज्यसभा के सदस्य थे। उधर, जेटली के इस बयान के बाद विजय माल्या ने भी सफाई दी है। माल्या ने कहा कि जेटली से कोई औपचारिक मुलाकात नहीं थी। उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।

माल्या के बयान पर विपक्ष सरकार पर हमलावर
उधर, माल्या के इस खुलासे के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोलना शुरु कर दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि पीएम मोदी चौकीदार नहीं भागीदार हैं तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वित्त मंत्री ने आखिर देश से यह बात क्यों छिपायी। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि, देश छोड़ने से पहले नीरव मोदी की प्रधानमंत्री से बैठक और माल्या की वित्त मंत्री अरुण जेटली से मीटिंग से क्या साबित होता है, यह लोग जानना चाहते हैं।

 

कोर्ट के बाहर माल्या ने लिया वित्त मंत्री का नाम

इससे पहले शराब कारोबारी विजय माल्या ने कहा था कि देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरूण जेटली से मुलाकात की थी इसके बाद ही विदेश गया था। कोर्ट के बाहर माल्या ने बताया कि वित्त मंत्री से मिलकर सेटलमेंट करना चाह रहा था लेकिन बैंकों की आपत्ति की वजह से समझौता नहीं हो पाया था। कोर्ट के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए माल्या ने कहा कि वह भारतीय बैंकों का पैसा वह चुकाने के लिए तैयार है। माल्या ने कहा कि अपने बकाए को सैटल करने के लिए उन्होंने बैंकों को कई बार पत्र लिखे थे, लेकिन बैंकों की तरफ से उनके पत्रों पर सवाल खड़े किए गए।

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