भीमा-कोरेगांव केस: फैक्ट-फाइंडिंग टीम का चौंकाने वाला खुलासा, साजिश के तहत रची थी हिंसा की पटकथा

भीमा-कोरेगांव केस: फैक्ट-फाइंडिंग टीम का चौंकाने वाला खुलासा, साजिश के तहत रची थी हिंसा की पटकथा

Dhirendra Kumar Mishra | Publish: Sep, 11 2018 11:22:33 AM (IST) राजनीति

भीमा-कोरेगांव के पास सनासवाड़ी के लोगों को हिंसा के बारे में पहले से पता था।

नई दिल्‍ली। पुणे के नजदीक एक जनवरी, 2018 को घटी भीमा-कोरेगांव हिंसा की जांच के लिए गठित नौ सदस्‍यीय फैक्‍ट फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया है। टीम की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह हिंसा सुनियोजित थी जिसकी वजह से साल के पहले ही दिन यह स्थिति उत्‍पन्‍न हुई। स्‍थानीय लोगों और पुलिस को इस बात की जानकारी थी। पुलिस ने इसके लिए जरूरी कदम नहीं उठाए और मूकदर्शक बनी रही। टीम ने इस हिंसा को एक सुनियोजित साजिश बताया है। रिपोर्ट में बता गया है कि हिंदूवादी नेता मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े करीब 15 साल से इस घटना को अंजाम देने में लगा था। हिंसक घटना की रिपोर्ट कोल्हापुर रेंज के आईजीपी को फैक्‍ट फाइंडिंग टीम के अध्यक्ष पुणे के डेप्युटी मेयर डॉ. सिद्धार्थ धेंडे ने सौंपी थी।

जातियों के बीच खाई खोदने की कोशिश
हाल ही में भीमा कोरेगांव कमिशन ने हाल ही में मुंबई में सुनवाई का पहला चरण पूरा किया है। टीम की रिपोर्ट में बताया गया है कि एकबोटे ने धर्मवीर संभाजी महाराज स्मृति की स्थापना वधु बुद्रक और गोविंद गायकवाड़ से जुड़े इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने के लिए की थी। माहर जाति के गायकवाड़ ने शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी महाराज का अंतिम संस्कार किया था। संभाजी महाराज की समाधि के पास गोविंद गायकवाड़ के बारे में बताने वाले फोटो को हटाकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केबी हेडगेवार का फोटो लगाया गया था, जिसकी कोई जरूरत नहीं थी। यह अगड़ी और निचली जातियों के बीच खाई बनाने के लिए उठाया गया कदम था। अगर पुलिस ने कोई कदम उठाया होता तो किसी अनहोनी को रोका जा सकता था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भीमा-कोरेगांव के पास सनासवाड़ी के लोगों को हिंसा के बारे में पहले से पता था। इलाके की दुकानें और होटेल बंद रखे गए थे।

पुलिस बनी रही मूकदर्शक
रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है कि गांव में केरोसिन से भरे टैंकर लाए गए थे। लाठी-तलवारें पहले से रखी गई थीं। जानकारी होने के बाद भी पुलिस मूकदर्शक बनी रही। यहां तक कि हिंसा के दौरान दंगाई कहते रहे चिंता मत करो, पुलिस हमारे साथ है। रिपोर्ट में एक डीएसपी, एक पुलिस इंस्पेक्टर और एक अन्य पुलिस अधिकारी का नाम लिया है। सादी वर्दी में मौजूद पुलिस भगवा झंडों के साथ भीमा-कोरेगांव जाती भीड़ को रोकने की जगह उनके साथ चल रही थी। धेंडे ने दावा किया है कि इस बात का सबूत दे दिया गया है कि दंगे सुनियोजित थे और उनका एल्गार परिषद से कोई लेना-देना नहीं है।

घटना ने बदली इतिहास की पटकथा
आपको बता दें कि हिंसा से पहले भीमा कोरेगांव और आसपास के इलाकों में दलितों और मराठाओं के बीच दुश्मनी नहीं थी लेकिन भिड़े और एकबोटे ने इतिहास की पटकथा को बदलकर सांप्रदायिक तनाव पैदा किया। समय के हिसाब से हिंदुत्ववादी ताकतों के संबंध को दिखाया है।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned