बागी नेताओं को सबक सिखाने के लिए बीजेपी ने तैयार किया नया फार्मूला, गाज गिरनी तय

  • बीजेपी शीर्ष नेतृत्व का ऐतिहासिक फैसला
  • अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले नेताओं स्वत: निष्काषित माना जाएगा
  • बीजेपी नेतृत्व ने पहली बार झारखंड में इस पर अमल करने का निर्णय लिया

Dhirendra Kumar Mishra

December, 0409:57 AM

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर सत्ता में वापसी करने के बाद हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी में बागी तेवर दिखाने वाले नेताओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ, महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में बागी नेताओं की वजह से बीजेपी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है।

इस बात को ध्यान में रखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के खिलाफ बागी तेवर अपनाने वाले नेताओं से निपटने के कि लिए नया फार्मूला ढूंढ निकाला है। अब पार्टी का फैसला न मानने वाले नेताओं को स्वत: पार्टी निष्काषित मान लिया जाएगा।

बागी नेताओं को सबक सिखाने के लिए बीजेपी ने तैयार किया नया फार्मूला, गाज गिरना तय

झारखंड विधासभा चुनाव में अनुशासन बनाए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बागी तेवर अपनाने वाले नेताओं से दो टूक कह दिया है कि जो नेता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं अथवा पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होते हैं, वह पार्टी से स्वतः निष्कासित माने जाएंगे।

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भाजपा के प्रवक्ता शिवपूजन पाठक ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा का यह अधिकृत निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बीजेपी झारखंड के जो नेता विधानसभा चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं या प्रत्याशी का सार्वजनिक तौर पर विरोध कर रहे हैं या संगठन के निर्देश के विपरीत कार्य करते हुए पार्टी का अनुशासन तोड़ रहे हैं, उन पर ये नियम लागू होगा।

बता दें कि झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सरयू राय झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ जमशेदपुर पूर्व से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके पीछे पार्टी की ओर से उन्हें जमशेदपुर पश्चिम से टिकट नहीं मिलना बताया जा रहा है। इतना ही नहीं वह रघुवर दास को हराने के लिए खुल कर प्रचार प्रसार कर रहे हैं।

इसके अलावा पार्टी का टिकट न मिलने पर पार्टी के मुख्य सचेतक रहे राधाकृष्ण किशोर भी आजसू पार्टी के टिकट पर भाजपा प्रत्याशी पुष्पा देवी के खिलाफ छतरपुर सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। इस सीट के लिए 30 नवंबर को मतदान हुआ था।

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पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी, पूर्व मंत्री बैजनाथ राम, बिमला प्रधान और विधायक फूलचंद मंडल भी दूसरे दलों के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर भी दो दिन पहले बीजेपी छोड़कर पीए संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी के टिकट पर नाला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।

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किन—किन नेताओं पर होगा ये नियम लागू

1. पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने पर।

2. पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव प्रचार करने पर।

3. पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर।

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