कठुआ से उठा विवाद कहीं खत्म न कर दे जम्मू कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन

Chandra Prakash

Publish: Apr, 17 2018 10:20:30 PM (IST)

Political
कठुआ से उठा विवाद कहीं खत्म न कर दे जम्मू कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन

बीजेपी कोटे के मंत्रियों के इस्तीफे के बाद सियासी पंडित अब ये कहने पर मजबूर होने लगे हैं कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के दिन लद गए हैं।

नई दिल्ली। कठुआ गैंगरेप के बाद उपजे विवाद ने अब जम्मू कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन की पुरानी तल्खी को सबके सामने ला दिया है। सियासी पंडित अब ये कहने पर मजबूर होने लगे हैं कि पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के दिन लद गए हैं। जम्मू कश्मीर की महबूबा सरकार में बीजेपी कोटे से बनाए गए सभी मंत्रियों ने इस्तीफा सौंप कर सियासी तूफान मचा दिया है। हालांकि दोनों दलों की तरफ से कहा यह जा रहा है कि भाजपा अपनी पार्टी के पुराने मंत्रियों को बदल कर नए चेहरों को जगह देना चाहती है, इसलिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन भीतरखाने में सबकुछ ठीक नहीं लग रहा है।

बीजेपी ने पीडीपी को धोखा दिया?
2015 में इस जब पीडीपी-बीजेपी ने राज्य में सरकार बनाने की कवायद शुरू की तभी राजनीतिक पंडितों ने इसे इस 'अपवित्र रिश्ता' करार दिया था। पिछले दिनों एक मीडिया हाउस से बात करते हुए एक वरिष्ठ पीडीपी नेता ने कहा था कि हम बीजेपी के धोखे से तंग आ चुके हैं। हम बीजेपी की झूठ के कारण अपने उन वादों को भी पूरा नहीं कर पा रहे, जो हमने जनता से किया था। हमें समझ में नहीं आ रहा है कि आगामी चुनाव में जनता के सामने क्या मुंह लेकर जाएंगे। अब आने वाला वक्त ही बताएगा कि ये जोड़ी कितने दिन और चलेगी।

'केंद्र ने कश्मीर को हिंसा में धकेला'
धरती के स्वर्ग में फैल रहे अराजकता और आतंकवाद को लेकर खुद सीएम महबूबा के भाई भी चिंता जता चुके हैं। एक इंटरव्यू के दौरान तसादुक मुफ्ती ने कहा कि केंद्र सरकार ने कश्मीर को ऐसे हालात में धकेल दिया है, जिस कारण घाटी हिंसा के दलदल में फंस गई है। यहां अब तक इतनी बड़ी हिंसा नहीं हुई थी। अगर केंद्र अपने पुराने एजेंडे पर काम करता रहा तो हम लोग ही अंतिम फैसला लेंगे और जनता से माफी मांग लेंगे की हम उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सकें।

कठुआ गैंगरेप से शुरू हुआ ताजा विवाद
हाल ही में कठुआ में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म व उसकी हत्या के मामले में आरोपियों को बचाने की मांग को लेकर मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा व चौधरी लाल सिंह दोनों मंत्री हीरानगर में हिंदू एकता मंच की एक रैली में भाग लेने के बाद विवादों में घिर गए। जनता की भारी नाराजगी के बाद दोनों ने भाजपा विधायक दल की बैठक में राज्य ईकाई प्रमुख सत शर्मा को इस्तीफा सौंप दिया। इन दोनों मंत्रियों की भूमिका की वजह से राज्य के पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) व भारतीय जनता पार्टी गठबंधन पर संकट खड़ा हो गया था। पीडीपी सूत्रों ने कहा कि महबूबा मुफ्ती ने भाजपा हाईकमान को साफ कर दिया था कि अगर दोनों मंत्री पद नहीं छोड़ेंगे, तो वह राज्य के गठबंधन की अगुवाई जारी नहीं रख सकेंगी।

बहुमत नहीं मिलने पर मिलाया हाथ
बता दें कि 2015 में जम्मू कश्मीर में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो पाया था। 28 सीटों के साथ जहां पीडीपी पहले स्थान पर रही, वहीं बीजेपी ने 25 सीटों पर कब्जा किया। ऐसे में दोनों दलों ने मिल कर मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में सरकार बना लिया। सईद कैबिनेट में बीजेपी कोटे से 10 मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया गया। जनवरी 2016 में सईद के निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती राज्य की मुख्यमंत्री बन गईं। लेकिन सरकार बनाने से पहले भी महबूबा मुफ्ती काफी पशोपेश में थीं, इसलिए उन्‍होंने गठबंधन के मुख्‍यमंत्री का पद संभालने से पहले काफी वक्‍त लिया था। तभी से यह आसार बन रहे थे कि यह गठबंधन ज्‍यादा दिन नहीं चलेगा, लेकिन कठुआ विवाद के बाद इन दोनों दलों में एक बार फिर तनाव देखा जा रहा है।

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