Coronavirus: राहुल गांधी ने बहुत पहले ही दे दी थी मोदी सरकार को महामारी की चेतावनी

  • बीते माह ही ट्वीट कर सरकार को इस भयावह खतरे से किया था आगाह।
  • मंगलवार को कहा- हमारे पास काफी वक्त था इस खतरे को टालने के लिए।
  • सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से की संकटग्रस्त लोगों की मदद की अपील।

Amit Kumar Bajpai

24 Mar 2020, 06:56 PM IST

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत में कोरोनो वायरस के मामलों की बढ़ती संख्या के साथ परेशान हैं। आलम यह है कि अब देश में कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस 500 के पार हो गए हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि भारत के पास तैयारी करने के लिए बहुत समय था लेकिन प्रशासन तुरंत कार्रवाई करने में विफल रहा। राहुल ने इस महामारी को लेकर पिछले महीने ही मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए तुरंत कड़े कदम उठाने के लिए कहा था।

इस संबंध में मंगलवार को एक ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा, "मैं दुखी महसूस कर रहा हूं, क्योंकि इसे पूरी तरह से टाला जा सकता था। हमारे पास तैयारी का समय था। हमें इस खतरे को अधिक गंभीरता से लेना चाहिए था और बहुत बेहतर तरीके से तैयार करनी चाहिए थी।

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मंगलवार को भारत में कोरोनोवायरस के मामलों की कुल संख्या 500 को पार कर गई और इस वायरस के चलते 10 लोगों की जानें जा चुकी हैं।

राहुल गांधी ने यह बात एक ट्वीट के जवाब में कही, जिसमें चिकित्साकर्मियों को सुरक्षात्मक गियर प्रदान करने में नाकाम रहने के लिए एक डॉक्टर केंद्र सरकार को फटकार रहा था। डॉक्टर ने लिखा कि चिकित्साकर्मियों को सुरक्षात्मक चीजें मुहैया कराने के बजाए सरकार लोगों से उनके सम्मान में ताली बजाने के लिए कह रही है।

बता दें कि राहुल गांधी काफी पहले स? कोरोना वायरस ? के आने वाले वक्त में बढ़ते प्रकोप को लेकर सरकार को चेताते रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए और अब इसका प्रसार बढ़ता देख कड़े कदम उठा रही है।

राहुल गांधी ने बीते 12 फरवरी को एक ट्वीट कर लिखा था, "कोरोना वायरस हमारे लोगों और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा है। मेरी समझ से सरकार इस खतरे को गंभीरता से नहीं ले रही है। समय पर कार्रवाई महत्वपूर्ण है।"

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जिस वक्त राहुल गांधी ने बीते माह यह ट्वीट किया था, उस वक्त तक देश में हालात तकरीबन नियंत्रण में थे और अगर विदेश से आए लोगों को क्वारेंटाइन-आइसोलेट किया जाता, तो आज के हालात नहीं होते। इसके अलावा उस वक्त से ही सरकार कड़े कदम उठाती तो चिकित्सा व्यवस्थाओं में बढ़ोतरी के साथ ही इसका प्रबंधन भी बेहतर ढंग से हो पाता।

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच सोमवार को सरकार ने देश के 30 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के 548 जिलों में लॉकडाउन की घोषणा कर दी। साथ ही कई जिलों में कर्फ्यू भी लगाना पड़ा।

भारत ने ट्रेनों, उड़ानों और अन्य परिवहन के माध्यम से अंतर-राज्य यातायात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया था।

इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संकटग्रस्त लोगों को वेतन सहायता सहित आपातकालीन उपायों की घोषणा करने का आग्रह किया।

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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में, सोनिया गांधी ने कहा कि 4.4 करोड़ से अधिक निर्माण श्रमिकों को अब "अनिश्चित" भविष्य का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनमें से कई शहरों में फंसे हुए हैं और तालाबंदी के कारण आजीविका से वंचित हैं।

उन्होंने कहा कि देश सबसे खराब वैश्विक महामारी के बीच में है और सरकार ने COVID-19 प्रसारण के नियंत्रण और प्रबंधन के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

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