पद छोडऩे के बाद बोले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत पर साधा निशाना

shachindra shrivastava

Publish: Oct, 13 2017 07:40:49 (IST) | Updated: Oct, 13 2017 07:42:36 (IST)

Political
पद छोडऩे के बाद बोले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी,  मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत पर साधा निशाना

कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के समय भी प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की पैरवी की थी। राजग सरकार ने उन्हीं के राष्ट्रपति काल में इसे लागू कराया।

 

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पद छोडऩे के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके रिश्ते काफी अच्छे हैं। साथ ही उन्होंने भाजपानीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की खूब तारीफ की। एक पत्रिका के इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या देश कांग्रेस मुक्त हो जाएगा, इस पर मुखर्जी ने कहा ऐसा नहीं हो सकता है। 132 साल पुरानी पार्टी इतनी जल्द खत्म हो जाएगी, ऐसा नहीं है। इस इंटरव्यू में उन्होंने राजनीति, जीएसटी और नोटबंदी पर अपने विचार साझा किए हैं। यह राष्ट्रपति पद छोडऩे के बाद प्रणब मुखर्जी का पहला इंटरव्यू है।

हिंदी जानते तो होते पीएम
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि यदि वे भी हिंदी जानते होते, तो शायद पीएम होते। उन्होंने कहा कि मैं हिंदी नहीं जानता था, ऐसे में बिना हिंदी जाने किसी को भारत का पीएम नहीं बनना चाहिए। इसके लिए उन्होंने तमिलनाडु के दिग्गज कांग्रेस नेता के कामराज का उदाहरण दिया। कामराज ने भी प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया था। कामराज ने कहा था, 'बिना हिंदी के प्रधानमंत्री पद नहीं।' प्रणब मुखर्जी ने खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा कि मेरी इस अयोग्यता की एक और बड़ी वजह यह भी थी कि मैं लोकसभा का सदस्य 2004 में बना। उसके पहले राज्यसभा का ही सदस्य था।

मोदी से हैं अच्छे रिश्ते
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ मेरे संबंध बहुत ही अच्छे हैं। दो अलग-अलग राजनीतिक दलों से ताल्लुक रखने के बावजूद दोनों नेता एक-दूसरे का काफी सम्मान करते हैं। मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की तारीफ करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि गठबंधन सरकार से बहुमत की सरकार ज्यादा अच्छी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की ओर से बीते साल लागू की गई नोटबंदी हो या इस साल प्रभाव में लाया गया जीएसटी, दोनों ही बातचीत के विषय हैं। यूपीए-2 के प्रदर्शन पर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उस वक्त अच्छा काम नहीं हुआ। गठबंधन भी टूटने लगा था। ममता बनर्जी गठबंधन छोड़ चुकी थीं।

जीएसटी की पैरवी
केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के वक्त प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की पैरवी की थी। उनके ही राष्ट्रपति काल में राजग सरकार ने इसे लागू किया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन शुरुआत में थोड़ी दिक्कतों का सामना तो करना पड़ेगा। जीएसटी के अलावा नोटबंदी पर भी प्रणब मुखर्जी मोदी सरकार के साथ खड़े हैं।

मनमोहन-सोनिया से भी अच्छे रिश्ते
इसके अलावा प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अच्छे रिश्ते होने की बात भी कही। मुखर्जी ने कहा कि 2004 में भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए मनमोहन सिंह का नाम चुना गया। यह चयन सोनिया गांधी ने किया और सही चयन था। यह अच्छी पसंद थी। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मीडिया को बार-बार कांग्रेस पर लिखने से बचना चाहिए। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि मनमोहन सिंह सोनिया गांधी के कहने से चलते थे और सभी निर्णय सोनिया गांधी लेती थीं।

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