राजनीति

खेती-किसानी पर सरकार के दावों से लोग असहमत, पत्रिका सर्वे में सामने आई बात

कांग्रेस की तरह मोदी सरकार की स्थिति भी किसान, खाद्य और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चों पर संतोषजनक नहीं है।

नई दिल्लीMay 23, 2018 / 12:55 pm

Dhirendra

चार साल: किसानी पर फंसी मोदी सरकार

नई दिल्‍ली। इस महीने की 26 मई को मोदी सरकार के कामकाज के चार साल पूरे हो रहे हैं। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए सरकार के कामकाज पर बहस जारी है। लेकिन वक्त की जरूरत है इस बहस से आगे देखने और भावी प्राथमिकताएं तय करने की। जब हम प्राथमिकताओं की बात करते हैं तो सबसे उपेक्षित नजर आने वाले क्षेत्रों में किसानी, खाद्य और सामाजिक सुरक्षा वाले क्षेत्र शामिल हैं। इन मुद्दों पर पत्रिका सर्वे में ये बातें सामने आई हैं कि बीते चार साल में मोदी सरकार के प्रयासों से लोग संतुष्‍ट नहीं है। सरकार ने जो कदम उठाए वो अभी तक कारगर नहीं हो पाए हैं। यही वजह है कि अधिकांश लोग इस मोर्चे पर सरकार से असंतुष्‍ट हैं और बेहतरी की उम्‍मीद रखते हैं।
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लोगों की राय सरकार के दावों के उलट
अगर हम मोदी सरकार की किसान केंद्रित योजनाओं की बात करें तो किसानों की स्थिति बेहतर करने को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। इनमें फसल बीमा, स्‍वास्‍थ्‍य बीमा, फसल लागत से डेढ़ गुना मूल्‍य दिलाना, ईनैम ऑनलाइन कृषि मंडी, भारत नेट परियोजना डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी महत्‍वाकांक्षी योजनाएं शामिल हैं। लेकिन इन योजनाओं का लाभ किसानों को निर्धारित लक्ष्‍यों के अनुरूप नहीं मिल पाया है। पत्रिका के सर्वे में भी खेती-किसानी के लिए सुविधाओं को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में 53 फीसदी लोगों ने केंद्र सरकार को विफल करार दिया। जबकि 47 फीसदी लोगों ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की है। किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार को लेकर पूछे गए सवालों पर 62 फीसद लोगों मोदी सरकार के रवैये पर सवाल उठाया है जबकि 38 फीसद लोगों ने संतोष जाहिर किया हैा
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और जोर देने की जरूरत
इसी तरह जब हम खाद्य और सामाजिक सुरक्षा की बात करते हैं तो सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, सीखो और कमाओ, उस्ताद गरीब नवाज कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री जन औषधि योजनाएं और भारत स्‍वच्‍छता योजनां जेहन में उभरकर सामने आती हैं। इन योजनाओं को लेकर 52 फीसद लोग संतुष्‍ट हैं तो 48 फीसद लोगों का मानना है कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा जैसे पहलुओं को गंभीरता से नहीं लिया। इस दिशा में सरकार को और गंभीर प्रयास करने होंगे, तभी एक्‍चुअल यूजर्स को इसका लाभ मिल पाएगा।

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