गंगा की सफाई के मोर्चे पर फेल हो गयी मोदी सरकार! मंत्री ने कहा, 2019 के पहले साफ़ नहीं हो पाएगी गंगा

amit sharma

Publish: Oct, 12 2017 01:52:40 (IST) | Updated: Oct, 12 2017 02:03:14 (IST)

Political
गंगा की सफाई के मोर्चे पर फेल हो गयी मोदी सरकार! मंत्री ने कहा, 2019 के पहले साफ़ नहीं हो पाएगी गंगा

सरकार के तीन साल बीत जाने के बाद भी सिफर दिख रहा गंगा सफाई का काम

नई दिल्ली. खुद को 'गंगा पुत्र' कह 2014 में अपने चुनावी अभियान का श्री गणेश करने वाले नरेंद्र मोदी ने सरकार बनते ही बेटे का फर्ज निभाते हुए गंगा की सफाई को एक मिशन का रूप देते हुए इसके लिए एक अलग मंत्रालय ही स्थापित कर दिया. लेकिन सरकार बनने के तीन साल बाद भी गंगा की सफाई का काम शून्य पर ही अटका पड़ा है. इस समय गंगा स्वच्छता मिशन का काम देख रहे नितिन गडकरी ने खुद इस बात को स्वीकार कर लिया है कि गंगा सफाई का काम 2019 के मार्च महीने के बाद तक ही दिख सकेगा.

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मंत्री ने स्वीकारी सच्चाई

दरअसल, नितिन गडकरी नरेंद्र मोदी सरकार के उन चंद मंत्रियों में गिने जाते हैं जो अपने काम को समयबद्ध ढंग से पूरा करते हैं. सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए जिस तरह से उन्होंने सड़क एवं राजमार्ग परियोजनाओं को एक रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया है, वह अपने आपन में एक नजीर है. गडकरी की इसी काबिलियत के कारण मोदी ने गंगा की सफाई का काम उमा भारती से लेकर उन्हें सौंप दिया. जब गडकरी से गंगा की सफाई कब तक हो सकेगी, ये पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी साफगोई से जवाब दिया, मैं इस बात के लिए कोई निश्चित तिथि बताने की स्थिति में नहीं हूँ, लेकिन 2019 के मार्च तक आपको जमीनी बदलाव दिखने लगेगा.
यानी पूर्व मंत्री का 2018 तक गंगा को साफ़ करने का दावा फिलहाल फुस्स हो गया है.

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इसलिए होगी देरी

नितिन गडकरी ने बताया कि गंगा की सफाई के लिए सबसे अहम बात है कि इसके निकारे बसे शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित हों और वे पूरी क्षमता के साथ काम करें. सभी शहरों के लिए STP बनाए के लिए कंपनियों को टेंडर देने की प्रक्रिया दिसंबर तक पूरी हो जायेगी और इनके बनने और काम करना शुरू करने में अतिरिक्त समय लगेगा. इसलिए सफाई का जमीनी काम 2019 के आधे समय के बाद ही दिख पायेगा.

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सिर्फ दिखावे की कार्रवाई होती रही

दरअसल, मोदी सरकार ने गंगा सफाई को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण नाम से एक अलग मंत्रालय ही बना दिया। इस मंत्रालय का सबसे पहला कार्यभार उमा भारती ने संभाला और मोदी के मेगा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट का काम शुरू किया. लेकिन अपने लगभग तीन साल के कामकाज में उन्होंने गंगा सफाई के नाम पर फीते ही काटती रहीं. सफाई के लिए एक भी कार्य योजना तैयार नहीं हो सकी. न तो किसी भारतीय एजेंसी से और न ही किसी विदेशी एजेंसी से इस बात पर विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर कोई ठोस काम हो सका. नतीजा रहा कि गंगा की स्थिति जस की तस बनी रही. इस दौरान बनारस के कुछ घाटों पर और उत्तराखंड के गंगा किनारों के कुछ घाटों पर प्रतीकात्मक सफाई का काम अवश्य होता रहा.

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