गोवा में चर्च ने मोदी सरकार की तुलना नाजियों से की

गोवा के एक चर्च की पत्रिका में नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार वाले मौजूदा भारत की तुलना नाजी जर्मनी से की गई है। पत्रिका का नाम 'रेनोवाकाओ' है।

By: kundan pandey

Updated: 18 Aug 2017, 11:40 AM IST

पणजी। गोवा के एक चर्च की पत्रिका में नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार वाले मौजूदा भारत की तुलना नाजी जर्मनी से की गई है। पत्रिका का नाम 'रेनोवाकाओ' है। पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में यह भी दावा किया गया है कि देश में 'संवैधानिक प्रलय' जैसी स्थिति है। यह अप्रत्यक्ष तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किया गया वैचारिक हमला है। गोवा के एक वकील डॉ. एफई नोरोन्हा ने यह लेख लिखा है। इस लेख में गोवा के मतदाताओं से 'पूरे देश में फैली तानाशाही' पर लगाम लगाने के लिए सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मतदान करने की अपील की गई है। लेख में मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए मतदाताओं से रीढ़विहीन चरित्र वाले लोगों और पूरे देश में फैली तानाशाही से प्रत्यक्ष तौर पर सहमति रखने वाले लोगों के खिलाफ मतदान करने की अपील की गई है।

इन दोनों से बदतर है नाजीवाद
लेख में लिखा है, 2012 में सभी गोवा को भ्रष्टाचार मुक्त कराने के बारे में सोच रहे थे, जो 2014 तक चला, लेकिन उसके बाद से हम भारत में हर दिन जिस चीज को तेजी से बढ़ता हुआ देख रहे हैं वह और कुछ नहीं बल्कि संवैधानिक हॉलोकॉस्ट है। भ्रष्टाचार बेहद खराब चीज है, सांप्रदायिकता उससे भी खराब, लेकिन नाजीवाद इन दोनों से बदतर है। लेख में आगे लिखा है, 'जिस किसी ने भी विलियम शीरर की पुस्तक 'द राइज एंड फॉल ऑफ द थर्ड राइक' या ऐलन बुलक की पुस्तक 'अ स्टडी ऑफ टिरनी' या हिटलर की आत्मकथा 'मीन कैम्फ' पढ़ी है, वह विकास और बर्बादी के बीच असाधारण समानता और 1933 के नाजीवादी जर्मनी और 2014 के भारत में समानता को देख सकता है।

एक या दो लोग चला रहे हैं पूरा देश
यह पत्रिका पणजी के गिरजाघर 'बिशप्स हाउस' की ओर से प्रकाशित की जाती है। इस पत्रिका के संपादक फादर एलीक्सो मेनेजेस हैं। पत्रिका लिखता है कि भारत में अब सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार या धर्मनिरपेक्षता नहीं है, बल्कि आजादी सबसे बड़ा मुद्दा है। लेख में लिखा है, पूरा देश सिर्फ एक या दो व्यक्तियों द्वारा चलाया जा रहा है, बाकी लोग मामूली अनुचर या अंधभक्त हैं। कृपया ऐसे व्यक्ति को अपना वोट न दें, जो ऐसे लोगों के मामूली अनुचर हैं।

भ्रष्टाचार से अधिक है आजादी, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता का महत्व
आजादी, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता का महत्व भ्रष्टाचार से कहीं अधिक है। भ्रष्टाचार इन सबसे बेहतर था। अगर वे हमें अपनी बात रखने, भोजन करने और राजनीतिक स्वतंत्रता रखने की आजादी देते हैं तो भ्रष्टाचारियों को ही सत्ता सौंपे। पणजी विधानसभा सीट के लिए 23 अगस्त को होने वाले उप-चुनाव में पर्रिकर के खिलाफ मतदान कर भारतीय लोकतंत्र में आई गिरावट को रोकने में मतदाता अपना योगदान कर सकते हैं।

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