पिता थे पंचायत सचिव अब बेटा बना CM, पढ़िए कुंवारे सर्बानंद की कहानी

पिता थे पंचायत सचिव अब बेटा बना CM, पढ़िए कुंवारे सर्बानंद की कहानी

Abhishek Tiwari | Publish: May, 24 2016 05:13:00 PM (IST) राजनीति

सोनोवाल को मछली पकड़ने का बहुत शौक है, बताया जाता है कि वह डिब्रू नदी में अपने दोस्तों के साथ मछली पकड़ना बहुत पसंद करते थे, सोनोवाल राज्य में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं, वहीं वे राज्य के दूसरे आदीवासी मुख्यमंत्री भी हैं

गुवाहाटी। नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में पहली बार बीजेपी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने वाले सर्बानंद सोनोवाल एक बहुत ही खुशमिजाज किस्म के नेता है। कई लोग तो यह भी कहते है कि उनके चेहरे पर हमेशा रहने वाली मुस्कान ने उन्हें छात्र नेता से राज्य के मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचाया है। असम में काफी प्रभावी ऑल असम स्टूडेंट यूनियन(आसू) के अध्यक्ष पद से राज्य के मुख्यमंत्री तक पहुंचने वाले प्रफुल्ल कुमार महंता के बाद वे दूसरे शख़्स हैं।



छात्र नेता के तौर पर तैयार की राजनीतिक जमीन
31 अक्टूबर 1962 को डिब्रूगढ़ में जन्मे सोनोवाल 8 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान ही सोनोवाल ने छात्र नेता के तौर पर ही अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की। जब वह कालेज में थे तो असम आंदोलन हुआ और वह छात्र संगठन से जुड़ गए। सोनोवाल ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन(आसू) के 1992 से 1998 तक अध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्होंने छात्र राजनीति को छोड़कर असम में सक्रिय असम गण परिषद(एजीपी) में शामिल हुए।



1998 में अपना पहला चुनाव हार गए थे सोनोवाल
एजीपी में शामिल होने के बाद वे 1998 का लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन उन्हें लखीमपुर की जनता ने स्वीकार नहीं किया और सोनोवाल अपना पहला चुनाव हार गए। इसके बाद वो 2001 में पहली बार मोरान से विधायक बने और 2004 में डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इस दौरान उन्हें पार्टी में किसी शीर्ष पद पर नेतृत्व करने का मौका नहीं मिला। इन्हीं कारणों से सर्बानंद ने एजीपी का साथ छोड़कर 2011 में भाजपा का दामन थाम लिया।



दुनिया के सबसे बड़े टापू माजुली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते है
पर काफी असर पड़ा। यही एक वजह रही कि सर्बानंद समाज सेवा की तरफ आकर्षित हुए और बाद में समाजसेवा केसोनोवाल
सोनोवाल जिस विधानसभा श्रेत्र से चुनाव जीते हैं वह भी अपने आप में बहुत खास है। ब्रह्मपुत्र नदी के बीचोंबीच बसा दुनिया का सबसे बड़ा टापू माजुली जिसकी पहचान असम की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में आज भी बरक़रार है। माजुली अनुमंडल एक विधानसभा श्रेत्र है, जिसे सोनोवाल चुनाव के दौरान जिला बनाने की बात कह चुके हैं। बरसात के दिनों में ब्रह्मपुत्र अपने पूरे उफान पर होती है और माजुली का संपर्क पूरी दुनिया से कई दिनों तक कटा रहता है। बाढ़ की सूरत में तो एक हफ़्ते तक नावें नहीं चलती हैं। राज्य के मुख्यमंत्री का प्रतिनिधित्व करने वाले माजुली के अब तो अच्छे दिन जरूर आएंगे।



आईएमडीटी कानून को सुप्रीम कोर्ट से रद्द करवा कर आए थे सुर्खियों में
राज्य में सर्बानंद तब सुर्खियों में आए जब उनकी एक याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 22 साल पुराने विवादास्पद अवैध प्रवासी पहचान ट्रिब्यूनल(आईएमडीटी) क़ानून को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। सोनोवाल ने इसे स्थापित किया कि आईएमडीटी एक्ट के रहते असम में विदेशियों की पहचान या निष्कासन का काम संभव नहीं है। इसके बाद प्रदेश में उनकी छवि एक अहम नेता के रूप में बनी।



मोदी सरकार में खेल मंत्री रहे सोनोवाल

भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर लखीमपुर से सांसद बने सोनोवाल को मोदी सरकार में खेल मंत्री बनाया गया। खेल मंत्री रहते हुए ही उन्हें भाजपा ने राज्य में पार्टी की कमान सौंप दी और चुनाव पूर्व ही उन्हें पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। बताया जाता है कि सोनोवाल के अंदर के नेता को उनके स्कूल के शिक्षक बहुत पहले ही पहचान चुके थे। यही वजह थी कि उनको क्लास तीन में ही सफाई मंत्री बना दिया गया।

सोनोवाल को मछली पकड़ना है बेहद पसंद
सोनोवाल को मछली पकड़ने का बहुत शौक है। बताया जाता है कि वह डिब्रू नदी में अपने दोस्तों के साथ मछली पकड़ना बहुत पसंद करते थे। सोनोवाल राज्य में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री हैं, वहीं वे राज्य के दूसरे आदिवासी मुख्यमंत्री भी हैं।



मिस्टर डिब्रूगढ़ रह चुके हैं सोनोवाल
क्रिकेट और पुरानी फ़िल्में देखना पसंद करने वाले सोनोवाल को बैंटमिंटन और फुटबॉल खेलना काफी पसंद है। सोनोवाल को महंगी कार और बाइक का भी बहुत शौक है। उनका घर ऐसे ही गाड़ियों के पोस्टर से भरा हुआ है। सोनोवाल को बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह अपने ग्रेजुएशन के दिनों में मिस्टर डिब्रूगढ़ भी रह चुके हैं।



काम के कारण कई-कई दिन नहीं आते थे घर, इसलिए नहीं की शादी
बताया जाता है कि सर्बानंद काफी भावुक हैं। जब भी राज्य में कोई आपदा आती थी तो छात्र नेता के तौर पर सर्बानंद काम में ऐसा लग जाते थे कि कई-कई दिन तक घर नहीं आते थे। यही एक कारण था कि उन्होंने शादी तक नहीं की। परिवार के लोगों ने शादी के लिए उन पर दबाव भी बनाया, मगर सर्बानंद इसे टालते रहे और आज भी कुंवारे हैं।

सोनोवाल को बेहद पसंद है बिहू गीत गाना
बाढ़ के दौरान लोगों के साथ काम करते हुए तनाव के बीच भी फुर्सत के समय सोनोवाल अक्सर सभी साथियों को गाना सुनाते थे। उनको बिहू गीत गाने का बड़ा शौक है। चूंकि आसू का ड्रेस कोड सफ़ेद शर्ट और काले रंग की पतलून है, इसलिए सर्बानंद को आज भी इन्हीं रंगों के कपड़े पहनना पसंद है।

Assam Chief Minister Sarbanand Sonowal

























बाढ़ प्रभावित गांव से आते हैं सोनोवाल

सर्बानंद सोनोवाल के पिता जिबेश्वर सोनोवाल चबुआ बोकदुम पंचायत में सचिव थे। दरअसल वे जिस गांव से निकलकर आए हैं, वहां बाढ़ आती थी। लोग अपनी तकलीफ सुनाने पिता के पास आते थे और इसका सर्बानंद पर काफी असर पड़ा। यही एक वजह रही कि सर्बानंद समाज सेवा की तरफ आकर्षित हुए और बाद में समाजसेवा के रास्ते राजनीति में आ गए।

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