कर्नाटक में सरकार बचाने के लिए डिप्‍टी सीएम जी परमेश्‍वर का ब्रेकफास्‍ट कॉल

कर्नाटक में सरकार बचाने के लिए डिप्‍टी सीएम जी परमेश्‍वर का ब्रेकफास्‍ट कॉल

Dhirendra Kumar Mishra | Publish: May, 30 2019 12:14:21 PM (IST) | Updated: May, 30 2019 12:23:52 PM (IST) राजनीति

  • कर्नाटक के डिप्‍टी सीएम जी परमेश्‍वर ने तालमेल बढ़ाने के लिए ब्रेकफास्‍ट कॉल की मेजबानी की।
  • पार्टी के नेताओं, मंत्रियों और विधायकों के बीच नाराजगी को दूर करने पर दिया गया जोर।
  • नाश्‍ते पर बैठक में केसी वेणुगोपाल, एमबी पाटिल सहित अन्‍य कैबिनेट मंत्री शामिल हुए।

नई दिल्‍ली। कर्नाटक में एक तरफ सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है तो दूसरी तरफ कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर संकट के बादल छाए हुए हैं। इन अटकलों के बीच कर्नाटक के डिप्‍टी सीएम जी परमेश्‍वर ने ब्रेकफॉस्‍ट कॉल (नाश्‍ते पर बैठक) पर सरकार में शामिल सभी मंत्रियों और विधायकों को बेंगलूरु स्थित अपने आवास पर बुलाया। बताया जा रहा है कि ब्रेकफास्‍ट कॉल के जरिए डिप्‍टी सीएम कैबिनेट में शामिल मंत्रियों और नेताओं की नाराजगी को दूर करना चाहते हैं। इस कॉल का एक मकसद सभी के बीच आपसी तालमेल और भरोसे को बनाए रखना भी है।

 

जी परमेश्‍वर ने की मेजबानी

सियासी संकट को टालने के मकसद से गुरुवार को डिप्टी सीएम जी परमेस्वर ने बेंगलुरु में अपने निवास पर ब्रेकफास्‍ट कॉल (नाश्ते पर बैठक) की मेजबानी की। इस बैठक में कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल, एमबी पाटिल सहित अन्‍य कैबिनेट मंत्री और पार्टी नेता शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक सियासी संकट से पार पाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। साथ ही कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के बीच तालमेल बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

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शिष्‍टाचार भेंट ने बिगाड़ा खेल

चार दिन पहले बेंगलुरु में भारतीय जनता पार्टी के नेता एसएम कृष्णा के आवास पर कांग्रेस नेता रमेश जारकीहोली और डॉक्टर सुधाकर ने भाजपा नेता आर अशोक से मुलाकात की थी। रमेश जारकीहोली ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है। उन्‍होंने मुलाकात को लेकर जारी बयान पर कहा है कि हम कर्नाटक में 25 सीटें जीतने के बाद एसएम कृष्णा को शुभकामना देने पहुंचे थे। दूसरी तरफ आर अशोक ने कहा है कि मैं पार्टी के मामलों पर चर्चा करने के लिए एसएम कृष्णा जी से मिलने पहुंचा था। कांग्रेस के नेताओं से मेरी कोई मित्रता नहीं है। लेकिन एसएम कृष्‍णा के आवास पर भाजपा नेताओं से कांग्रेस के दो विधायकों की मुलाकात को सियासी नजरिए से देखा जा रहा है।

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इस बात को लेकर जारी है सियासी जंग

बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले बहुमत और केंद्र में मोदी सरकार की वापसी से कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल, 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कर्नाटक की 225 विधानसभा सीटों में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78, जेडीएस को 37, बीएसपी को 1, केपीजेपी को 1 और अन्य को 2 सीटों पर जीत मिली थी। राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन कांग्रेस-जेडीएस के एक साथ आने से वह बहुमत साबित नहीं कर पाए। उसके बाद ही कांग्रेस-जेडीएस की सरकार कर्नाटक में बनी थी।

 

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