सियासी ड्रामे का क्या होगा क्लाइमेक्स!, व्हिप जारी कर बच जाएगी सरकार या भाजपा को मिलेगी सत्ता

सियासी ड्रामे का क्या होगा क्लाइमेक्स!, व्हिप जारी कर बच जाएगी सरकार या भाजपा को मिलेगी सत्ता

Prashant Kumar Jha | Updated: 09 Jul 2019, 11:13:58 PM (IST) राजनीति

  • कर्नाटक में सियासी उठापटक जारी
  • 14 विधायकों का इस्तीफा कानूनी दांव-पेंच में उलझा
  • 10 जुलाई को भाजपा का विरोध प्रदर्शन

राजीव मिश्रा

बेंगलूरु। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन (Karnataka political crisis ) सरकार के 14 विधायकों का इस्तीफा कानूनी दांव-पेंच में उलझता नजर आ रहा है, लेकिन 12 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान इस सियासी घटनाक्रम का कुछ परिणाम आ सकता है। हालांकि कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा सरकार बनाएगी?

स्पीकर ने 8 इस्तीफे नामंजूर किए

भाजपा के सूत्रों के मुताबिक गठबंधन सरकार के अल्पमत में आने और बहुमत का आंकड़ा उसके पक्ष में होने के बावजूद पार्टी विधायकों का इस्तीफा मंजूर होने तक इंतजार करेगी। हालांकि, इसमें अब कई कानूनी पेंच उभर आए हैं। स्पीकर ने 5 विधायकों के ही इस्तीफे तय फार्मेट में होने की बात कहकर 8 विधायकों के इस्तीफे रिसीव ही नहीं किए। स्पीकर ने जो रुख दिखाया है उससे यह प्रक्रिया लंबी चल सकती है।

भाजपा बुधवार को करेगी विरोध-प्रदर्शन

भाजपा सूत्रों के मुताबिक अगर स्पीकर का रुख यही रहा तो आठों विधायक दोबारा आकर त्यागपत्र दे सकते हैं। फिर भी यह राह उतनी आसान नहीं है। स्पीकर ने भी कह दिया है कि उनके लिए समय सीमा को लेकर कोई बाध्यता नहीं है। लेकिन, भाजपा ने बुधवार से स्पीकर पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत विरोध प्रदर्शन का फैसला किया है। राज्यपाल से मिलकर भाजपा यह कहेगी कि सरकार अल्पमत में आ गई है और उसे इस्तीफा देना चाहिए।

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राज्यपाल कह सकते हैं बहुमत साबित करने को: बीवी आचार्य

यह भी संभव है कि आगामी 12 जुलाई से सत्र शुरू होते ही राज्यपाल मुख्यमंत्री को यह निर्देश दें कि वे पहले सदन में बहुमत साबित करें। राज्य सरकार के पूर्व महाधिवक्ता और संविधान विशेषज्ञ बीवी आचार्य ने कहा कि अगर राज्यपाल को यह लगता है कि सरकार बहुमत खो चुकी है तो वे सीएम को पहले ही दिन बहुमत साबित करने का निर्देश दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछली बार राज्यपाल ने येड्डियूरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया और बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन की समय-सीमा निर्धारित की। लेकिन, जब सुप्रीम कोर्ट को लगा कि समय ज्यादा है और सरकार अल्पमतम में है तो कोर्ट ने सरकार को दो दिन में बहुमत साबित करने का आदेश दिया। उसी तरह राज्यपाल को अगर लगता है कि सरकार अल्पमत में है तो वह सत्र के पहले ही दिन मुख्यमंत्री को बहुमत साबित करने के निर्देश दे सकते हैं।

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बागियों पर नहीं लागू होगा व्हिप!

अगर सदन में बहुमत साबित करने की नौबत आई तो क्या संभावनाएं होंगी। इस संदर्भ में जानकारों का मानना है कि निश्चित रूप से कांग्रेस-जद-एस गठबंधन विधायकों के लिए व्हिप जारी करेगा। अगर विधायक उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई संभव है। उन्हें अयोग्य भी ठहराया जा सकता है। लेकिन, आचार्य का मानना है कि जिन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है उन पर व्हिप लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा 'अगर कोई सदस्य व्हिप का उल्लंघन करता है तो उसे अयोग्य करार दिया जा सकता है। लेकिन जब विधायकों ने सदस्यता ही छोडऩे के लिए इस्तीफा दे दियाहै तो फिर उनके लिए व्हिप किस बात का। उनके खिलाफ दल-बदल कानून का भी कोई औचित्य नहीं रह जाता।'

 

दल-बदल कानून का सवाल ही नहीं: वामन आचार्य

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता वामन आचार्य ने कहा कि कांग्रेस दल-बदल कानून की बात कर रही है। वहीं, इस्तीफा देेने वाले विधायक अब भी कह रहे हैं कि वे कांग्रेस के साथ हैं। रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट कहा है कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ रहे। अन्य विधायकों ने भी कहा है कि वे सिर्फ विधानसभा की सदस्यता छोड़ रहे हैं। किसी ने न तो भाजपा ज्वाइन की है और न ही उसमें शामिल होने की बात कही है। ऐसे में दल-बदल कानून कैसे लागू हो सकता है। जब कांग्रेस के कुछ नेताओं से यही सवाल किया गया तो उनका कहना था कि इस्तीफा स्पीकर ने रिसीव ही नहीं किया क्योंकि वे तय फार्मेट में नहीं है। चूंकि, इस्तीफे स्वीकार नहीं हुए हैं इसलिए व्हिप लागू होगा।

... तो कमजोर होगी भाजपा की चाल

कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब लंबा चलेगा। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा की परेशानियां बढ़ेंगी और रणनीति कमजोर पड़ती जाएगी। कांग्रेस की रणनीति इस मामले को जितना लंबा चल सके उतना लंबा खींचने की है। विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने में विलंब कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। इसकी शुरुआत 8 विधायकों के इस्तीफे को तय फार्मेट में नहीं बताकर हो चुकी है। दूसरी ओर, जिन विधायकों के इस्तीफे तय फार्मेट में हैं उनसे भी व्यक्तिगत तौर पर मिलने का निर्देश देकर स्पीकर ने संकेत दे दिए हैं कि मामला जल्दी नहीं सुलझने वाला।

कांग्रेस करेगी संघर्ष: बृजेश कालप्पा

कांग्रेस नेता बृजेश कालप्पा ने कहा कि कांग्रेस भाजपा के षड्यंत्र का मुंहतोड़ जवाब देगी। भाजपा बार-बार सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है लेकिन कांग्रेस का संघर्ष अब शुरू हुआ है। पार्टी पीछे
नहीं हटेगी। यह पूछे जाने पर कि अगर राज्यपाल सरकार को पहले ही दिन बहुमत साबित करने का निर्देश दें तो? उन्होंने बस इतना कहा कि यह गठबंधन सरकार के साथ अनुचित होगा।

सरकार का बचना मुश्किल: महादेव प्रकाश

हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञ महादेव प्रकाश ने कहा कि कर्नाटक का सियासी संकट अब क्लाइमेक्स पर पहुंच गया है। अब तक 14 विधायक और दो मंत्री इस्तीफा सौंप चुके हैं। स्पीकर ने कहा है कि 5 विधायकों के इस्तीफे तय फार्मेट में हैं लेकिन, 8 के नहीं। इन 8 विधायकों के मुंबई से आकर बुधवार को फिर इस्तीफा सौंपने की जानकारी मिली है। इसके बाद स्पीकर का यह दायित्व होगा कि वे उनके इस्तीफे स्वीकार करें। इस्तीफे स्वीकार होते ही सरकार गिर जाएगी।

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