27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

तेलंगाना में उल्‍टा पड़ सकता है केसीआर का दांव, चार राज्यों के साथ चुनाव न कराने के संकेत

चुनाव आयोग के लिए कम समय में तेलंगाना में चुनाव कराना आसान नहीं होगा।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Dhirendra Kumar Mishra

•

Updated: 7 Sep 2018, 1:47 PM IST

voting

तेलंगाना में उलटा पड़ सकता है केसीआर का दांव, चार राज्यों के साथ चुनाव न कराने के संकेत

नई दिल्‍ली। गुरुवार को तेलंगाना विधानसभा को भंग करने का प्रस्ताव कैबिनेट द्वारा पारित होने के बाद सीएम के चंद्रशेखर राव ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था। इसके साथ ही उन्‍होंने राज्‍यपाल से मिलकर विधानसभा को भंग कर तत्‍काल विधानसभा चुनाव कराने का सुझाव दिया था। लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभा चुनाव कराने का यह दांव उनके लिए उलटा पड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो लोकसभा में टीआरएस के लिए यह राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है। हालांकि सीएम के सुझावों के अनुरूप प्रदेश के राज्‍यपाल ने ऐसा कराने का उन्‍हें आश्‍वासन दिया था। परंतु चार राज्‍यों के साथ चुनाव हो पाना संभव नहीं लगता है। चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक चारों राज्‍यों के साथ चुनाव कराना इतने कम समय में मुश्किल है।

कम समय में चुनाव कराना मुश्किल
दरअसल, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव नवंबर में प्रस्‍तावित है। इन राज्‍यों में चुनाव की तैयारियों में चुनाव आयोग पिछले कई महीनों से जुटा है। लेकिन इस बात की सूचना पहले से न होने के कारण चुनाव आयोग ने तेलंगाना में चुनाव कराने को लेकर अभी तक प्रारंभिक तैयारियां भी शुरू नहीं की है। ऐसे में चुनाव आयोग के लिए मतदाता सूची का अपडेशन, ईवीएम की व्‍यवस्‍था, मतदान केंद्र का प्रबंधन, जरूरी कर्मचारियों का प्रबंधन, करने के साथ सुरक्षा बल जैसे पहलुओं पर विचार करना मुश्लिक भरा काम हो सकता है। हालांकि गुरुवार को ही मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ओपी रावत ने कहा था कि उन्‍होंने सीएम के इस्‍तीफे और तत्‍काल चुनाव कराने के सुझाव को देखते हुए राज्‍य चुनाव आयोग को सभी जानकारियां तत्‍काल मुहैया कराने को कहा है। ताकि उन संभावनाओं पर विचार किया जा सके कि चारों राज्‍यों के साथ तेलंगाना का चुनाव संभव है या नहीं।

सियासी लाभ उठाना चाहते हैं राव
आपको बता दें कि तेलंगाना की राजनीति में सीएम के चंद्रशेखर राव का अभी कोई सानी नहीं है। इसके बावजूद उन्‍होंने सियासी नजाकत को देखते हुए सीएम के पद से इस्‍तीफा दे दिया है। साथ ही राज्‍यपाल से समय से पहले तेलंगाना विधानसभा भंग का जल्‍द चुनाव कराने का सुझाव दिया था। जबकि तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल मई, 2019 तक है। उन्‍होंने ऐसा कर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है ताकि राहुल गांधी केसीआर के विरोधियों से हाथ मिलाकर टीआरएस को पटखनी न दे सकें। चुनाव आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अब यही दांव के चंद्रशेखर राव का उलटा पड़ सकता है।

2014 में प्रचंड बहुमत से सीएम बने थे राव
आपको बता दें कि 2014 में अलग तेलंगाना राज्‍य बनने के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में उन्‍हें 90 सीटें मिली थीं। विधानसभा की कुल 119 सीटें हैं। टीआरएस के खिलाफ यहां विपक्ष को 29 सीटें मिली थीं। इनमें कांग्रेस को 13, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को सात, भाजपा को पांच, टीडीपी को तीन और सीपीएम को एक सीटें मिली थीं।

बड़ी खबरें

View All

राजनीति

ट्रेंडिंग