रोमांच से भरा रहा महाराष्ट्र का सियासी महासंग्राम, जानिए 4 अहम बातें

  • शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का राजनीति में बढ़ा कद
  • एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने निभाई चाणक्‍य की भूमिका
  • बीजेपी के चाणक्‍य महाराष्‍ट्र में भी पड़े कमजोर

By: Dhirendra

Updated: 27 Nov 2019, 09:31 AM IST

नई दिल्‍ली। सर्वोच्‍च अदालत के सुप्रीम फैसले ने मंगलवार को जहां महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सरकार की रवानगी तय की तो दूसरी ओर शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की रास्‍ता भी साफ हो गया। लेकिन इससे पहले करीब महीने से ज्‍यादा समय तक चली खींचतान काफी रोमांच भरा रहा और पल-पल खबरें बदलती रहीं। कभी शिवसेना तो कभी बीजेपी ने अपने तेवर दिखाए।

इस बीच महाराष्‍ट्र में गठबंधन सरकार बनना तय हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फडणवीस सरकार को बुधवार शाम 5 बजे तक विधानसभा में बहुमत साबित करने का आदेश दिया था, लेकिन डिप्टी सीएम अजित पवार के इस्तीफे के बाद फडणवीस के लिए बहुमत साबित करना मुश्किल हो गया। फडणवीस ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उद्धव ठाकरे की ताजपोशी का रास्ता भी साफ हो गया। लेकिन एक महीने तक चले सियासी उलटफेर में कई अहम पड़ाव सामने आए।


1. 79 के पवार ने दिखाए 41 साल पहले वाला तेवर
24 अक्‍टूबार मो महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद अब तक की सियासी घटनाक्रमों में मराठा क्षत्रप शरद पवार सबसे बड़े योद्धा साबित हुए। एक महीने से ज्‍यादा समय तक चले सियासी खींचतान में पवार ने चाणक्‍य की भूमिका निभाई।

हालांकि महाराष्‍ट्र में सीएम शिश्‍वसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बनेंगे लेकिन सरकार का रिमोट हमेशा पवार के हाथ में होगा। उन्होंने NCP के अंदर बेटी सुप्रिया को अजित से मिलने वाली चुनौती खत्म कर दी है। खुद को अविश्सनीय होने से भी बचा लिया।

2. शिवसेना ने पूरी की अपनी जिद
अगर किसी तरह फडणवीस सरकार को बचा ले जाते तो महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा नुकसान शिवसेना को उठाना पड़ता लेकिन विचारधारा को दरकिनार कर पार्टी ने कांग्रेस-NCP से गठजोड़ की और उसे सफलता भी मिली। सरकार न बनती तो तीन दलों का गठबंधन जारी रहने के आसार घटते और फिर शिवसेना के लिए वजूद बचाने का संकट होता। जो अब नहीं होगा। अब न तो वजूद का संकट है न ही पार्टी टूटने का खतरा।

3. यूपीए का हुआ विस्‍तार
महाराष्‍ट्र में गठबंधन शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने से यूपीए का विस्‍तार हुआ है। साथ ही उसका कद भी बढ़ा है। इसकी मुख्यघटक कांग्रेस की सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि बनाने की कोशिश भी इस नए गठजोड़ से परवान चढ़ सकती है। कांग्रेस को मुस्लिम परस्त छवि से छुटकारा भी मिलेगा।

4. सत्‍ता पाकर भी खो बैठी बीजेपी
बीजेपी ने महाराष्ट्र में सरकार तो गंवाई ही, यह कहने का मौका भी दिया कि सत्ता के लिए यह दागी का समर्थन भी ले सकती है। कभी रणनीति अचूक मानी जाती थी, लेकिन अब विपक्ष को खिल्ली उड़ाने का मौका मिला है। झारखंड तक असर जा सकता है।

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