आज इस्तीफा दे सकते हैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ

— भाजपा के शरद कौल का भी इस्तीफा भी मंजूर, भाजपा की संख्या 106 हुई, बहुमत से 3 ज्यादा

— सुप्रीम कोर्ट के फ्लोर टेस्ट के आदेश के बदली मध्यप्रदेश की राजनीति

— आधी रात में विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकारे 16 विधायकों के इस्तीफे

— मुख्यमंत्री ने बुलाई प्रेस कान्फ्रेंस, इस्तीफे की घोषणा संभव

By: shailendra tiwari

Updated: 20 Mar 2020, 12:09 PM IST

नई दिल्ल/भोपाल
मध्यप्रदेश में सियासी पारा अब चरम पर है। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार अब अपने आखिरी पड़ाव की ओर जाती नजर आ रही है। विधानसभा में बहुमत साबित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अचानक से बदले घटनाक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने आधी रात में बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इन इस्तीफों को स्वीकार करने के बाद कांग्रेस सरकार घोषित तौर पर अल्पमत में आ गई है। ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास इस्तीफे के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प शेष नहीं बचा है। संभव है कि वह फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा देकर विदा हो जाएं।

दरअसल, कांग्रेस के 22 विधायक बागी हो गए थे और वह पूरी तरह से कांग्रेस सरकार की खिलाफत कर रहे थे। कांग्रेस का आरोप था कि इन विधायकों को बंधक बनाकर इस्तीफे कराए गए हैं। जबकि विधायकों ने खुद कई बार वीडियो जारी कर सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वह अपनी मर्जी से बंगलुरू में रुके हुए हैं और वह अपनी ही सरकार से नाराज हैं, इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं।

राज्यपाल को दरकिनार किया, सुप्रीम कोर्ट में उलझे
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल की दो बार बहुमत साबित करने की मांग को ठुकरा दिया। लेकिन आखिर में जब गुरुवार शाम को सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत साबित करने के निर्देश दिए तो पूरा घटनाक्रम अचानक से बदल गया। पहले देर शाम मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को समझ रहे हैं और उसके बाद उसे आगे चुनौती देने के बारे में विचार कर रहे हैं। लेकिन इस बीच अचानक विधानसभा अध्यक्ष ने बागी 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इसके बाद पूरी तरह से साफ हो गया कि कांग्रेस सरकार अब अल्पमत में आ गई है और उसके पास बहुमत साबित करने के लिए नंबर शेष नहीं बचा है। इसी के बाद अचानक मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कान्फ्रेंस शुक्रवार दोपहर 12 बजे बुलाई गई है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री प्रेस कान्फ्रेंस में अपना इस्तीफा देने की घोषणा कर सकते हैं। इसके साथ ही वह फ्लोर टेस्ट से भी बच जाएंगे।

क्या है विधानसभा का नंबर गेम
अगर नंबर गेम की बात करें तो विधानसभा के भीतर अब सदस्यों की संख्या 230 से घटकर 205 रह गई है। भाजपा के एक विधायक शरद कौल का भी इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। अब सरकार बनाने के लिए 103 विधायकों की जरूरत होगी। भाजपा के पास 106 विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस के पास अब विधायकों की संख्या सिर्फ 92 बची हुई है। अगर निर्दलीयों और सपा—बसपा के सात विधायकों को भी जोड़ लें तो यह नंबर सिर्फ 99 हो रहा है। हालांकि कांग्रेस को पूरी तरह से मालूम है कि सपा और बसपा विधायकों के साथ कांग्रेस के 2 से तीन विधायक और फ्लोर टेस्ट के समय पाला बदल सकते हैं। सपा—बसपा विधायक 16 तारीख को भी विधानसभा में दिखाई नहीं दिए थे। इस दिन भी फ्लोर टेस्ट की संभावना बनी हुई थी।

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