हिंदी दिवस के मौके पर 'हिंदी' के लिए ही देश में घिरे गृह मंत्री अमित शाह

हिंदी दिवस के मौके पर 'हिंदी' के लिए ही देश में घिरे गृह मंत्री अमित शाह

Amit Kumar Bajpai | Publish: Sep, 14 2019 09:06:04 PM (IST) | Updated: Sep, 15 2019 07:21:36 AM (IST) राजनीति

  • अमित शाह ने हिंदी दिवस पर एक राष्ट्र-एक भाषा की जताई इच्छा
  • पहले ओवैसी बोले और फिर दक्षिण भारतीय नेता सामने आए खुलकर
  • राजनेताओं का आरोप, देशवासियों पर हिंदी थोपना चाहते हैं शाह

नई दिल्ली। हिंदी दिवस के अवसर पर देश के गृह मंत्री को हिंदी भाषा पर दिए गए उनके भाषण के खिलाफ देश में घेर लिया गया। अमित शाह ने शनिवार को पहले ट्विटर और फिर एक समारोह के दौरान देश में हिंदी भाषा को बढ़ाने पर जोर देते हुए एक राष्ट्र-एक भाषा की ओर ईशारा किया था। इसके बाद ओवैसी, स्टालिन, ममता बनर्जी, कुमारस्वामी, सिद्धारमैया, सलमान खुर्शीद समेत तमाम नेताओं ने उनका विरोध किया।

देश के तमाम राजनेताओं ने अमित शाह पर हिंदी भाषा को थोपने का आरोप लगाया। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कन्नड़ भाषा में ट्वीट करते हुए लिखा, "यह झूठ बंद होना चाहिए कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है। लोगों को यह पता लगना चाहिए कि यह (हिंदी) भारत की 22 अन्य आधिकारिक भाषाओं में से एक कन्नड़ की ही तरह है।"

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हालांकि कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा कि वह हिंदी के विरोध में नहीं हैं लेकिन इसे थोपे जाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि आप झूठ बोलकर और फर्जी जानकारी फैलाकर एक भाषा का प्रचार नहीं कर सकते। भाषाएं एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान से बढ़ती हैं।

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा कि ऐसे बयान देश की एकता के लिए खतरा साबित होते हैं और अमित शाह को अपना बयान वापस लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-हिंदी भाषी लोगों को दूसरे दर्जे के नागरिक के रूप में देखा जाता है।

उन्होंने कहा, "हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वह तुरंत अपना बयान वापस लें। यह उनके द्वारा किया गया एक प्रयास है जो गैर-हिंदी भाषी लोगों को दोयम दर्जे का नागरिक बताता है। अगर यह बयान वापस नहीं लिया गया, तो डीएमके आगे की कार्रवाई के लिए तैयारी करेगा।"

इस बीच जेडीएस नेता और कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी ने पीएम मोदी से जानकारी मांगी कि कब देशभर में कन्नड़ दिवस का आयोजन किया जाएगा।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने इसके विरोध में कहा, "अगर आप एक भाषा को आगे लाकर अन्य भाषाओं को कुचलेंगे तो यह संभावना है कि लोग इसे स्वीकार न करें। इससे लोगों के बीच दरार पैदा होगी।"

ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, 'हिंदी दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। हमें सभी भाषाओं और संस्कृतियों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। हम कई भाषाएं सीख सकते हैं, लेकिन हमें अपनी मातृ-भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए।'

ऑल इंजिया मजलिस-ए-इत्तेहास उल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गृह मंत्री के हिंदी प्रेम की खिलाफत की। ओवेसी ने कहा कि हिंदी समस्त भारतीयों की मातृ भाषा नहीं है। उन्होंने शाह से सवाल किया कि क्या आप तमाम मातृ भाषाओं की अनेकता और सुंदरता की तारीफ कर सकते हैं।

ओवैसी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनुच्छेद 29 हर भारतीय को भाषा, लिपि और संस्कृति का अधिकार देता है। भारत हिंदी, हिंदू और हिंदुत्व से कही बड़ा है।

गौरतलब है कि शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट में लिखा, "भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है परन्तु पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने। आज देश को एकता की डोर में बाँधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है।"

उन्होंने आगे लिखा, "आज हिंदी दिवस के अवसर पर मैं देश के सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि हम अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रयोग को बढाएं और साथ में हिंदी भाषा का भी प्रयोग कर देश की एक भाषा के पूज्य बापू और लौह पुरुष सरदार पटेल के स्वप्न को साकार करने में योगदान दें। हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।"

इसके बाद हिंदी दिवस पर आयोजित एक समारोह में अमित शाह ने कहा कि हिंदी को देश के हर घर और हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगले वर्ष हम देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदी दिवस समारोहों का आयोजन करेंगे। मैं हर माता-पिता से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों से और अपने सहयोगियों से अपनी भाषा में बात करें।"

इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में अगला लोकसभा चुनाव होगा और तब तक हिंदी को एक स्मारक जैसा दर्ज मिल गया होगा। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने एक बार कहा था कि लोकतंत्र में सरकार की भाषा वही होनी चाहिए, जिसे लोग समझें।

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