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दबाव और चुनौतियों में भी प्रदर्शन करने वाले नेता हैं मनसुख मांडविया

चेहरा और चुनौती

नई दिल्लीJul 09, 2024 / 03:59 pm

Navneet Mishra

नवनीत मिश्र

भाजपा में मनसुख मांडविया ऐसे नेता हैं, जो विपरीत हालात में भी अपना श्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। कोविड के संकट के दौर में जब डॉ. हर्षवर्धन के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया था तो लोग चौंके थे, लेकिन मांडविया ने अपने प्रदर्शन से आलोचकों को खामोश कर दिया था। कोविड संकट के समय रेकॉर्ड टीकाकरण से लेकर जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराकर उन्होंने बतौर स्वास्थ्य मंत्री खुद को साबित कर दिखाया था। मोदी के तीसरे कार्यकाल में उन्हें श्रम एवं रोजगार के साथ युवा और खेल मंत्रालय की कमान मिली है।
गुजरात के भावनगर जिले के पालीताना तालुका के हनोल नामक छोटे से गांव में 1 जून 1972 को किसान परिवार में जन्मे मनसुख मांडविया संघर्षों के साथ सफलता हासिल करने वाले शख्स रहे हैं। संसद तक साइकिल से जाने के शौक के कारण “ग्रीन एमपी” के तौर पर मशहूर मांडविया की राजनीतिक यात्रा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुई। राजनीति विज्ञान में एमए और पीएचडी की शिक्षा प्राप्त मांडविया 2002 में ही 28 साल में ही विधायक बन गए थे।मोदी सरकार में पहली बार 5 जुलाई 2016 को सड़क परिवहन और राजमार्ग, शिपिंग और रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री के रूप में एंट्री मिली। दूसरे कार्यकाल में 2019 को उन्हें फिर से रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री के साथ बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग का स्वतंत्र प्रभार भी उन्हें मिला। बाद में 2021 में हुए कैबिनेट फेरबदल के दौरान प्रमोशन देते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की भी कमान दी गई।

पदयात्राओं के लिए जाने जाते हैं मांडविया

 सामाजिक मुद्दों के लिए लंबी पदयात्राओं के लिए जाने जाते हैं। 2004 में, बालिका शिक्षा के प्रचार और जागरूकता के लिए 123 किलोमीटर की पदयात्रा की थी। वहीं 2006 में, उन्होंने लैंगिक भेदभाव और और नशे की लत की चिंताओं को दूर करने के लिए “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे के साथ 127 किलोमीटर की पदयात्रा की। 2019 में, उन्होंने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में 150 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की।

कोविड टीकाकरण का रेकार्ड

मनसुख मांडविया के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल में कोविड टीकाकरण का दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान संचालन का रेकॉर्ड बनाया। इस दौरान टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराकें दी गईं।

ये चर्चा में रही ये पहल

 जन औषधि केंद्रों के माध्यम से 10 करोड़ सैनिटरी नैपकिन वितरित कर महिला स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यूनिसेफ से मिल चुका सम्मान

स्वास्थ्य मत्री रहते मंडाविया ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए प्रमुख आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को शुरू किया

खोले 10 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र

रसायन एवं उर्वरक मंत्री रहते मनसुख मांडविया ने सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र परियोजना को धरातल पर उतारा। उनके नेतृत्व में, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने देश में 10,600 से अधिक जन औषधि स्टोर खोलें, जहां सस्ती दरों पर 850 से अधिक प्रकार की दवाइयां मिलतीं हैं। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान भी शुरू करने वाले मांडविया रहे। इस अभियान का लक्ष्य 2025 तक देश से टीबी को खत्म करना है।

चुनौतियां

देश में लंबित पड़े श्रम सुधारों को लागू करना
44 पुराने कानूनों को समाहित करने वाले 4 लेबर कोड को धरातल पर उतारना
कामगारों की सेवा सुरक्षा और न्यूनतम आय सुनिश्चित करना
देश में ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना

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