पिता के निधन के बाद महबूबा नहीं चाहती थीं भाजपा से गठबंधन, सोचने में लगे थे 3 महीने

पिता के निधन के बाद महबूबा नहीं चाहती थीं भाजपा से गठबंधन, सोचने में लगे थे 3 महीने

Kapil Tiwari | Publish: Jun, 20 2018 10:49:42 AM (IST) राजनीति

पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के साथ गठबंधन के लिए 3 महीने का वक्त लिया था।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को उस वक्त बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया, जब राज्य में भाजपा-पीडीपी का गठबंधन टूट गया। भाजपा ने अपना समर्थन वापस लेते हुए ये ऐलान किया कि अब राज्य में पीडीपी के साथ सरकार चलाना मुमकिन नहीं है। गठबंधन टूट जाने के बाद राज्य में महबूबा मुफ्ती की सरकार गिर गई और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ गया।

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भाजपा के साथ गठबंधन पर सोचने के लिए लिए थे 3 महीने

जम्मू-कश्मीर के इस सबसे बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद से ही तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा है कि भाजपा शुरू से ही पीडीपी से गठबंधन नहीं चाहती थी और अभी भी भाजपा की ही कोशिशों पर गठबंधन टूटा है। लेकिन कहना गलत नहीं होगा कि मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती भी भाजपा से गठबंधन नहीं चाहती थीं। उस वक्त भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए महबूबा मुफ्ती ने करीब 3 महीने का समय लिया था और जानकार तो ये भी बताते हैं कि इस गठबंधन के लिए भाजपा ने ही महबूबा मुफ्ती पर दबाव डाला था। उस वक्त भाजपा के महासचिव राम माधव को जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। महबूबा मुफ्ती के साथ उनकी बैठकों का दौर काफी दिनों तक चला था।

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भाजपा से गठबंधन नहीं चाहती थीं महबूबा मुफ्ती

जम्मू-कश्मीर के दिवंगत मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन जनवरी 2016 में हुआ था। 2014 में जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी दो बड़ी पार्टियां बनी थीं और उस वक्त पीएम मोदी और मुफ्ती मोहम्मद सईद के बीच गठबंधन की हामी भरी गई थी, लेकिन उनके निधन के बाद से ही ये गठबंधन खटाई में जाने लगा था, क्योकि कहा यही जाता है कि महबूबा मुफ्ती शुरूआत से हीं भाजपा से गठबंधन नहीं चाहती थीं। पिता के निधन के 3 महीने बाद जाकर महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था और अप्रैल 2017 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

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कई मुद्दों पर भाजपा-पीडीपी में ठन चुकी थी

इस गठबंधन के होने के बाद से ही भाजपा और पीडीपी में कई वजहों से मतभेद पैदा हो गए थे। महबूबा मुफ्ती और बीजेपी के बीच विचारों की लड़ाई पहले से ही दिखने लगी थी। आतंकियों और पत्थरबाजों पर मेहरबानी हो या फिर घाटी में सीजफायर की वकालत करना इन मुद्दों पर भाजपा और पीडीपी में ठन चुकी थी, जिसकी वजह से भाजपा कई बार बैकफुट पर आई थी। महबूबा ने अपना अधिकतर फोकस घाटी पर ही रखा, ऐसे में जम्मू-लद्दाख के साथ लगातार भेदभाव हो रहा था. महबूबा अपना किला तो मजबूत कर रही थीं, लेकिन बीजेपी लगातार अपने इलाके में पिछड़ती जा रही थी।

ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि महबूबा मुफ्ती ही भाजपा से गठबंधन नहीं चाहती थीं।

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