रफाल डील: रक्षामंत्री सीतारमण का कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला, बिना सबूत आरोप लगाना राहुल गांधी की आदत

  • रफाल डील पर रक्षामंत्री सीतारमण का बड़ा बयान
  • सुप्रीम कोर्ट ने रफाल डील पर कोई सवाल नहीं उठाए
  • राहुल गांधी ने कोर्ट के आदेश को तोड़ मरोड़कर पेश किया

By: Prashant Jha

Updated: 11 Apr 2019, 07:51 AM IST

नई दिल्ली। रफाल डील पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कीहै। केंद्रीय रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि दिसंबर के फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। राहुल ने कोर्ट के बयान को गलत तरीके से पेश किया है, राहुल ने आदेश पढ़ा भी नहीं और सुनी सुनाई बातों के आधार पर बयान देना शुरू कर दिया । बिना सबूत आरोप लगाना राहुल की आदत बनी हुई है। राहुल गांधी ने जो कहा वह कोर्ट ने नहीं कहा है। राहुल गांधी लगातार बयान देकर कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं, इसके लिए राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। कोर्ट ने रफाल सौदे पर सवाल नहीं उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आधी अधुरी जानकारी पेश की थी। दस्तावेज के कुछ हिस्से अखबार में प्रकाशित हुए थे। याचिका पर अभी सुनवाई होनी बाकी है। पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई को मंजूरी मिली है। हम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की दलील खारिज की

गौरतलब है कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि चोरी के दस्तावेजों की फोटोकॉपी को सुनवाई में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसपर कोर्ट ने कहा था कि जो तथ्य उनके सामने आए हैं, उसके आधार पर वह सुनवाई करेंगे। दस्तावेज भले चोरी के हों, कोर्ट उन्हें अनदेखी नहीं कर सकता।

राहुल ने फिर उठाया रफाल का मुद्दा

रफाल मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि ‘चौकीदार’ ने चोरी की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपए दिए।

केंद्र ने दी थी ये दलील

गोपनीय दस्तावेजों की फोटोकॉपी या चोरी के कॉपी पर कोर्ट भरोसा नहीं कर सकता। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बैंच ने सहमति से सुनाया है। बता दें, केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि दस्तावेज याचिका के साथ दिए गए हैं, वो गलत तरीके से रक्षा मंत्रालय से लिए गए हैं, इन दस्तावेजों पर कोर्ट भरोसा नहीं कर सकता।

Nirmala Sitharaman
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