अजित पवार की वापसी में गैर राजनीतिक शख्स ने निभाई बड़ी भूमिका, बदल दिए सारे समीकरण

  • Maharashtra Politics सुप्रिया सुले के पति ने बदला पूरा गेम
  • सदानंद ने पहुंचाया अजित तक शरद पवार का संदेश

By: धीरज शर्मा

Published: 27 Nov 2019, 01:09 PM IST

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में अब नई सरकार का गठन हो गया है। जल्द ही मुख्यमंत्री समेत अन्य अहम पदों पर शपथ ग्रहण की औपचारिकता भी पूरी हो जाएगी। लेकिन ये सब तक संभव हुआ है जब अजित पवार ने घर वापसी की है। वरना शिवसेना के लिए सीएम की जिद पर अड़े रहना पार्टी के लिए सबसे बड़े नुकसान की तरफ बढ़ रहा था। अजित पवार का अचानक बीजेपी में जाना तो हर किसी को समझ आ गया लेकिन उनकी घर वापसी इतनी आसान नहीं थी।

अजित पवार की घर वापसी ने पूरे महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर ही बदल दी। देवेंद्र फडणवीस की सरकार को झुकना पड़ा और सीएम पद से फडणवीस ने इस्तीफा दिया।

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राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो ये सब इतना आसान नहीं था। इस पूरे सियासी समीकरण के पीछे एक व्यक्ति का सबसे बड़ा रोल था। इस शख्स ने ना सिर्फ शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार बनाने में अहम रोल निभाया बल्कि अजित पवार की घर वापसी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

महाराष्ट्र की सियासत में आए भूचाल को काबू करने वाले उस शख्स का नाम है सदानंद सुले। जी हां शरद पवार के दामाद और सांसद सुप्रिया सुले के पति सदानंद सुले वही शख्स हैं, जिसने अजित पवार की घर वापसी करवाई।

ऐसे बदला घटनाक्रम
जब सभी लोग लगातार अजित पवार को समझाने की कोशिशों में लगे हुए थे। उसी बीच शरद पवार की इकलौती बेटी सुप्रिया सुले के पति सदानंद सुले मंगलवार को अजित पवार से जाकर मिले।

दोनों की मुलाकात मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में हुई और सदानंद ने शरद पवार का मैसेज अजित पवार को देते हुए साफ शब्दों में कहा कि वो परिवार और पार्टी में वापस लौटकर परिवार को बिखरने से बचाएं।

सदानंद ने अजित को बताया कि शरद पवार उनसे नाराज नहीं हैं और अगर वो वापस आते हैं तो पार्टी में सबकुछ पहले जैसा ही रहेगा। सदानंद सुले के साथ मुलाकात के बाद ही अजित पवार ने अपना मन बदला और इस्तीफा देने का फैसला लिया

दरअसल, भतीजे अजित पवार के बीजेपी के साथ जाने के बाद शरद पवार ने एक सधी हुई रणनीति के तहत इमोशनल कार्ड के जरिए बीजेपी के 'ऑपरेशन कमल' को शिकस्त दी।

शरद पवार ने इस काम के लिए अपने भरोसेमंद और वरिष्ठ नेताओं की टीम को मैदान में उतारा, जिन्हें अजित पवार को मनाने का जिम्मा सौंपा।

सरकार गठन के बाद बदले समीकरणों में एनसीपी के नेताओं ने अजित पवार को भरोसा दिलाया कि वो अपना फैसला बदलते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और पार्टी में उनकी सम्मानजनक वापसी होगी।

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