ओवैसी ने दिल्ली हिंसा को बताया नरसंहार, पीएम मोदी की खामोशी पर उठाए सवाल

  • AIMIM नेता ओवैसी ने हैदराबाद में आयोजित जनसभा में साधा निशाना।
  • दिल्ली हिंसा के प्रभावितों से पीएम को मुलाकात करने के लिए कहा।
  • 2002 गुजरात दंगे, 1984 हिंसा से भी सबक लेने की कही बात।

नई दिल्ली। देश की राजधानी के उत्तर-पूर्वी इलाके में पिछले सप्ताह फैली हिंसा को लेकर ऑल-इंडिया-मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। ओवैसी ने रविवार को दिल्ली हिंसा को नरसंहार की संज्ञा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी पर सवाल उठाया है। ओवैसी ने कहा है कि पीएम मोदी को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए और प्रभावित लोगों से मुलाकात करनी चाहिए।

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दिल्ली हिंसा को लेकर ओवैसी ने एनडीए नेताओं की खामोशी पर भी सवाल उठाए। हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि क्यों उन्होंने दिल्ली हिंसा पर एक भी शब्द नहीं कहा, जबकि घटना उनके आधिकारिक आवास से कुछ किलोमीटर दूर की है।"

ओवैसी आगे बोले, "हिंसा में 40 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। पीएम मोदी को इस मामले में बोलना चाहिए और एक बार हिंसा प्रभावित शिव विहार का दौरा करना चाहिए क्योंकि हिंसा में मारे गए सभी व्यक्ति हिंदुस्तानी थे।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं प्रधानमंत्री को बताना चाहता हूं कि यह हिंसा उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयान के कारण हुई। यह एक नरसंहार है। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को गुजरात में 2002 में सबक मिल गया था, लेकिन 2020 में दिल्ली में फिर भी नरसंहार हुआ।"

ओवैसी ने इसके अलावा दिल्ली हिंसा को लेकर एनडीए के अन्य राजनेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा, "मैं नीतीश कुमार, राम विलास पासवान और अकाली दल से पूछना चाहता हूं कि वो दिल्ली हिंसा पर क्यों चुप रहे। 2002 में गुजरात दंगों के बाद राम विलास पासवान ने केंद्रीय मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था। क्या अकाली दल 1984 को भूल गई है?"

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गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हैं। दिल्ली पुलिस इस मामले में अब तक 130 से ज्यादा एफआईआर दर्ज कर चुकी है जबकि 36 एफआईआर आर्म्स एक्ट के तहत की गईं हैं।

वहीं, पुलिस ने 600 लोगों को हिरासत में लिया है। इस हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से एक बड़ा खुलासा भी किया गया है कि हिंसा में इस्तेमाल किए गए हथियार उत्तर प्रदेश में चलने वाली अवैध फैक्ट्रियों में बने थे।

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दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान दंगाइयों ने जमकर अवैध असलहों का इस्तेमाल किया। यह अवैध असलहे उत्तर प्रदेश की अवैध फैक्ट्रियों में बनाए गए थे। बताया गया है कि इन फैक्ट्रियों में तमंचा ऑन डिमांड बनाया जाता है। दिल्ली पुलिस ने अब अवैध हथियार के धंधे में संलिप्त तमाम बदमाशों को राडार पर ले लिया है।

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अमित कुमार बाजपेयी
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