Rajasthan Policial Crisis: चिदंबरम बोले- कानून का पालन करें राज्यपाल, तुरंत बुलाएं Assembly Session

  • Rajasthan Political Crisis के बीच Congress Leader का बड़ा बयान
  • P Chidambaram ने कहा- Law का पालन करें Governor Kalraj Mishra, जल्द बुलाएं Assembly Session
  • चिदंबरम बोले- राज्यपाल के बर्ताव से चकित और चिंतित

By: धीरज शर्मा

Published: 27 Jul 2020, 03:22 PM IST

नई दिल्ली। राजस्थान में सियासी संकट ( Rajasthan Political Crisis ) लगातार गहराता जा रहा है। कांग्रेस ( Congress ) इस मुद्दे को लेकर और ज्यादा हमलावर हो गई है। सोमवार को जहां एक तरफ कांग्रेस के तीन पूर्व कानून मंत्रियों ने राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ( Kalraj Mishra ) को खत लिख कर विधानसभा सत्र ( Assembly Session ) बुलाए जाने को लेकर अपने विचार रखे हैं।

वहीं दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ( P Chidambram ) ने भी राजस्थान के राज्यपाल के काम को लेकर सवाल उठाए हैं। यही नहीं पी चिदंबरम ने उन्हें कानून का पालन करते हुए जल्द विधानसभा सत्र बुलाने की बात भी कही है।

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पूर्व वित्त मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राजस्थान में मचे सियासी संग्राम को लेकर राज्यापाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि तीन राज्यों में राज्यपालों के दखल से आए ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र भी किया।

पी. चिदंबरम ने राजस्थान में राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर सोमवा को एक प्रेसवार्ता की। इसके जरिए उन्होंने राज्यपाल कलराज मिश्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। चिदंबरम का कहना है कि हमें उम्मीद है कि राज्यपाल कानून का पालन करेंगे। यही नहीं उन्होंने कहा कि राज्यपाल को मंत्रियों की ओर से विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव तुरंत स्वीकार करना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में 2014 के बाद से ही राज्यपाल जिस तरह बनाए जा रहे हैं, ये उसका ही नतीजा है।

चिदंबरम ने प्रेसवार्ता की शुरुआत में कहा कि मुझे गहरा अफसोस है कि मैं अपने मीडिया मित्रों की जरिए देशवासियों को ऐसे मुद्दे पर संबोधित कर रहा हूं जो देश के कानून को लेकर कई सवाल खड़े करता है।
दरअसल चिदंबरम का इशारा राजस्थान के राज्यपाल की ओर था। कांग्रेस नेता के मुताबिक राज्यपाल कानून का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं।

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चिदंबरम ने कहा कि मैं याद दिला सकता हूं कि वर्ष 2016 में अरुणाचल प्रदेश , इसी वर्ष उत्तराखंड और फिर 2019 में कर्नाटक में राज्यपालों के संविधान का घोर उल्लंघन में न्यायालयों के तीन ऐतिहासिक फैसले आए।

चिदंबरम ने कहा संसदीय लोकतंत्र का मूल आधार एक कार्य विधायिका है। अगर कार्यकारी सरकार विधायिका को पूरा करना चाहती है, तो उसे सत्र बुलाने का पूर्ण अधिकार है।

अगर एक मुख्यमंत्री बहुमत साबित करना चाहता है, तो वह जल्द से जल्द बहुमत साबित करने के लिए सत्र बुलाने का हकदार है। कोई भी उसके रास्ते में नहीं खड़ा हो सकता। सत्र बुलाने के लिए किसी भी बाधा को रखने से संसदीय लोकतंत्र का मौलिक आधार कमजोर होगा।

राज्यपाल के रवैये से चकित और चिंतित
कांग्रेस नेता ने कहा कि राजस्थान के राज्यपाल के रवैये से हम चकित और चिंतित हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि राजस्थान के राज्यपाल कानून का पालन करेंगे और तुरंत विधानसभा का सत्र बुलाएंगे।

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