बजट सत्र : PM मोदी ने विपक्ष से कहा- नम्बरों की चिंता छोड़िए, सबका साथ-सबका विकास की नीति पर काम होगा

बजट सत्र : PM मोदी ने विपक्ष से कहा- नम्बरों की चिंता छोड़िए, सबका साथ-सबका विकास की नीति पर काम होगा

Dhiraj Kumar Sharma | Publish: Jun, 16 2019 06:59:06 PM (IST) | Updated: Jun, 17 2019 01:49:22 PM (IST) राजनीति

  • विपक्ष का सहयोग लेने का भरसक प्रयास करेंगे-PM
  • कई विधेयक पास कराना है सरकार की चुनौती
  • कांग्रेस ने अभी तक नहीं बताया कि कौन होगा सदन में पार्टी का नेता

नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र शुरू हो गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जनता ने हमें दोबारा देश की सेवा करने का मौका दिया है। आज का दिन नए साथियों के परिचय का अवसर है। उन्‍होंने कहा कि हम सभी साथ मिलकर देश के लिए काम करेंगे। हम विपक्ष का भी सहयोग लेने का भरसक प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, वे सदन में अपने नम्बरों की चिंता छोड़ दें। सरकार सबका साथ-सबका विकास की नीति पर काम करेगी।

खास बात यह है कि संसद के इस सत्र में अब तक कांग्रेस की ओर से सदन में पार्टी का नेता कौन होगा इसकी जानकारी नहीं दी है। कांग्रेस ने अब तक सदन में अपने नेता का नाम तय नहीं किया है। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी और मोदी को घेरने के लिए विपक्ष ने महागठबंधन का डर दिखाया, लेकिन चुनाव परिणाम आते ही महागठबंधन तितर-बितर हो गया है। फिलहाल सत्ता पक्ष से सवाल करने वाली मजबूत आवाज किसकी होगी ये ही साफ नहीं है। बहरहाल, बजट सत्र के दौरान पिछली बार विवादों में रहे ट्रिपल तलाक जैसे कुछ अन्य बिल इस बार फिर चर्चा में रहेंगे.

इन बिल पर रहेगी नज़र

1. महिला आरक्षण बिल
2. ट्रिपल तलाक बिल
3. सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल

संसद सत्र शुरू होने से पूर्व संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने उम्‍मीद जताई की 17वीं लोकसभा का पहले सत्र में कामकाज सुचारू रूप से हो सकेगा। इस दौरान सरकार की कोशिश कई महत्‍वपूर्ण विधेयक को पारित कराने की होगी।

 

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सत्र में शामिल होने से पहले जोशी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आज से शुरू हो रहा संसद का सत्र 40 दिनों तक चलेगा जिसमें लोकसभा की 30 और राज्‍यसभा की 27 बैठकें होंगी।

इस दौरान सरकार की कोशिश होगी कि तीन तलाक संशोधन विधेयक, केंद्रीय शैक्षणिक संस्‍थान विधेयक, जम्मू कश्मीर आरक्षण विधेयक को पारित कराने की होगी। इसके अलावा सरकार को इस सत्र में पिछली सरकार के समय के लागू 10 अध्यादेशों को रद्द कर उनकी जगह पर विधेयक पास कराना भी जरूरी होगा।

इससे पहले पीएम मोदी ने रविवार को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई। इस बैठक में उन्होंने अपने एजेंडे के मुताबिक चर्चा भी की। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि एक तरफ सत्ता पक्ष अपने एजेंडे पर लगातार आगे बढ़ रहा है। योजनाओं से लेकर मुद्दे तक सब सामने आ रहे हैं, लेकिन विपक्ष खास तौर पर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने अब तक उस चेहरे से पर्दा ही नहीं उठाया जो सत्ता पक्ष के आगे आवाज बुलंद कर सके।

राज्यसभा का सत्र 20 जून से

राज्‍यसभा का सत्र 20 जून से शुरू होगा। सत्र के दौरान मुख्य रूप से शपथ ग्रहण, लोकसभाध्यक्ष का चुनाव, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव, केंद्रीय बजट 2019-20 से संबंधित वित्तीय कामकाज के लिए समर्पित होगा।

हालांकि सत्र के दौरान आवश्यक विधायी और गैर-विधायी कार्यों के लिए भी समय प्रदान किया जाएगा। सत्र के दौरान 4 जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण और 5 जुलाई को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।

 

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बीजेपी की आंधी में उड़े खड़गे

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल की बात करें तो कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खडगे को नेता विपक्ष बनाया था। हालांकि चुनाव कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटें ही मिलीं जबकि नेता विपक्ष के लिए 54 सीट होना जरूरी है। कांग्रेस पूरे पांच साल बीजेपी से विपक्ष का दर्जा मांगती रही लेकिन बीजेपी ने नहीं दिया।

वहीं, इस बार लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ऐसी आंधी आई कि मल्लिकार्जुन खड़गे को भी अपना शिकार बना गई। लोकसभा चुनाव में कर्नाटक के गुलबर्गा से खड़गे को हार का मुंह देखना पड़ा। लिहाजा वे नेता विपक्ष की दौड़ से बाहर हो गए।

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इस बार भी सीटें कम

पिछले चुनाव में जहां कांग्रेस को 44 सीटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं इस बार भी पार्टी के पास 52 सीटें ही हैं। ऐसे में नेता विपक्ष के लिए जरूरी आंकड़े से अब तक दो सीट कम हैं।

शशि थरूर कर चुके पेशकश

कांग्रेस की ओर से अब तक किसी नेता के नाम का ऐलान नहीं हुआ। पार्टी उस चेहरे से अब तक पर्दा नहीं उठा पाई है जो मोदी की नीतियों का विरोध या जनता की आवाज को सदन में प्रस्तुत कर सके। हालांकि शशि थरूर कह चुके हैं कि पार्टी चाहे तो वो नेता विपक्ष बनने को तैयार हैं।

 

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अभी होंगे प्रशासनिक काम

दरअसल 17 जून से भले ही संसद का सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन शुरू के दो-तीन दिन नव निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने में निकल जाएंगे। इसके अलावा प्रशासनिक काम भी शामिल रहेंगे। करीब 20 जून से वास्तविक रूप से सत्र का काम शुरू होगा।

फिलहाल कोई जवाब नहीं

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी से जब पत्रिका ने बात की तो उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से ही इनकार कर दिया। इशारा साफ है फिलहाल कांग्रेस के पास इस सवाल का जवाब ही नहीं है। दरअसल बात सिर्फ कांग्रेस की नहीं पूरे विपक्ष में अभी एकजुटता दिखाई नहीं दे रही है।

सोनिया गांधी को लेना है फैसला

कांग्रेस से सत्ता पक्ष का सामना कौन करेगा इसका फैसला पार्टी चेयरपर्सन सोनिया गांधी को करना है। आपको बता दें कि इस बार कांग्रेस के कई दिग्गज लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेल चुके हैं। इनमें शीला दीक्षित, दिग्विजय सिंह समेत कई पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं।

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