नेशनल कॉन्फ्रेंस के बाद पीडीपी ने भी किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, आर्टिकल 35A का दिया हवाला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के बाद पीडीपी ने भी किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, आर्टिकल 35A का दिया हवाला

Kapil Tiwari | Publish: Sep, 10 2018 03:55:09 PM (IST) राजनीति

इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया था।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव को लेकर घमासान मचा हुआ है। हालांकि अभी तक चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इससे पहले ही राज्य में कई राजनीतिक दलों ने पंचायत चुनाव का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। सोमवार को पीडीपी ने भी पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। आपको बता दें कि पीडीपी से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस भी पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर चुकी है।

महबूबा मुफ्ती ने आर्टिकल 35A का हवाला देकर किया बहिष्कार

पीडीपी की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आर्टिकल 35A का हवाला देते हुए चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया है। महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को पीडीपी की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद राज्य में आर्टिकल 35A को बरकरार रखने का समर्थन किया है। महबूबा ने कहा है कि वह अंतिम सांस तक जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को बनाए रखने की लड़ाई लड़ेंगी, क्योंकि आर्टिकल 35A के तहत मिला विशेष दर्जा राज्य के हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ा विषय है, इसीलिए जब तक केंद्र सरकार इस पर अपना रूख साफ नहीं करेगी हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

पीडीपी से पहले फारूक अब्दुल्ला भी कर चुके हैं पंचायत चुनाव का बहिष्कार

चुनाव का बहिष्कार का ऐलान करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अगले महीने होने वाले पंचायत चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव का पार्टी बहिष्कार करेगी। आपको बता दें कि इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी यही ऐलान कर चुके हैं। फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पहले केंद्र सरकार अनुच्छेद 35ए पर अपना रुख स्पष्ट कर उसके बाद ही उनकी पार्टी पंचायत चुनावों में हिस्सा लेगी। अब पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में पंचायत चुनावों को 35ए मामले से जोड़ने की स्थिति ने लोगों के दिमाग में आशंका पैदा की है। पार्टी इसलिए सरकार से इस अवसर पर चुनाव कराने के अपने फैसले की समीक्षा करने का आग्रह करती है।'

2011 में हुए जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव

हालांकि फारूक अब्दुल्ला के ऐलान के बाद ही ये माना जाने लगा था कि महबूबा मुफ्ती भी पंचायत चुनाव का बहिष्कार करेंगी। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से पंचायत चुनाव लटके हुए हैं। जनवरी 2018 में यहां पंचायत चुनाव होने थे, लेकिन केंद्र सरकार ने राज्य में स्थिति का हवाला देकर चुनाव कराने से इनकार कर दिया था। जम्मू-कश्मीर में साल 2011 में आखिरी पंचायत चुनाव हुए थे। ये आठवां साल चल रहा है, लेकिन राज्य में चुनाव की स्थिति नहीं बन पाई है।

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