प्रकाश जावड़ेकर का 8वीं तक हिंदी को अनिवार्य विषय बनाने से इनकार, खबर को बताया गलत

प्रकाश जावड़ेकर का 8वीं तक हिंदी को अनिवार्य विषय बनाने से इनकार, खबर को बताया गलत

Dhirendra Kumar Mishra | Publish: Jan, 10 2019 02:32:04 PM (IST) राजनीति

वर्तमान में गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी अनिवार्य विषय के रूप में लागू नहीं है। लेकिन नई शिक्षा नीति में हिंदी को आठवीं तक लागू करने की चर्चा है।

नई दिल्‍ली। केंद्रीय एचआरडी मंत्री प्रकाश जावडेकर उन खबरों को भ्रामक और गलत करार दिया है जिनमें आठवीं कक्षा हिंदी को अनिवार्य विषय बनाने की बातें बताई गई हैं। उन्‍होंने इस बारे में मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति संबंधी समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में किसी भी भाषा को अनिवार्य बनाने की सिफारिश नहीं की है। इससे पहले मीडिया में चर्चा थी कि मानव संसाधान विकास मंत्रालय बेसिक शिक्षा में अनिवार्य रूप से हिंदी पढ़ाए जाने के संबंध में नई नीति बनाने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आठवीं तक पूरे देश में अनिवार्य रूप से हिंदी पढ़ाई जाएगी। जबकि गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी अनिवार्य विषय के रूप में लागू नहीं है।

गणित और विज्ञान पर जोर
नई शिक्षा नीति (एनईपी) कस्तूरीरंगन कमेटी ने तैयार की है। इस रिपोर्ट में त्रिभाषीय फॉर्मूले के तहत हिंदी को आठवीं कक्षा तक अनिवार्य विषय बनाने की बातें कही गई हैं। यूनिफॉर्म सेलेबस में गणित और विज्ञान को भी प्रमुखता दी जाएगी। वर्तमान तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गोवा, पश्चिम बंगाल और असम में हिंदी आठवीं तक अनिवार्य विषय के रूप में नहीं पढ़ाई जाती है। खबरों के मुताबिक एनईपी स्कूलों में भारतीय आधारित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को देश भर में लागू कराने की तैयारी में है। इस रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय भाषाओं को पांचवी तक स्कूलों में एक विषय के तौर पर पाठ्यक्रम में जगह दी जाएगी। इन भाषाओं में अवधी, भोजपुरी और मैथिली को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

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