दिनाकरण समर्थक विधायकों ने खोला मोर्चा, राज्यपाल से की सीएम को हटाने की मांग

दिनाकरण समर्थक विधायकों ने तमिलनाडु के राज्यपाल सी एच विद्यासागर राव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी को पद से हटाने की मांग की है।

By: Prashant Jha

Published: 22 Aug 2017, 04:30 PM IST

नई दिल्ली: पिछले दो दिनों में तमिलनाडु की सियासत में लगातार बदलाव दिख रही है। पलानीस्वामी को पद से हटाने के लिए टी टी वी दिनाकरण समर्थक विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। इस सिलसिले में मंगलवार को दिनाकरण समर्थक विधायकों ने तमिलनाडु के राज्यपाल सी एच विद्यासागर राव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी को पद से हटाने की मांग की है। दिनाकरण समर्थकों की मांग है कि मुख्यमंत्री पर उन्हें भरोसा नहीं है।

दो गुटों में बंटी थी पार्टी

इससे पहले सोमवार को पिछले सात महीनों से चल रहे राजनीतिक उठापटक पर रोक लग गई। दो खेमों में बंटे अन्नाद्रमुक पार्टी  का विलय कर दिया गया। के. पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम के नेतृत्व वाले धड़ों ने विलय कर लिया। पनीरसेल्वम को उप मुख्यमंत्री का पद सौंपा गया। 


पनीरसेल्वम पर भी कसा गाय तंज

दिनाकरण समर्थक एक विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इस  विलय से पहले दोनों गुटों के विधायकों के साथ विचार करने चाहिए थे। दिनाकरण समर्थक एक विधायक ने पनीरसेल्वम पर भी तंज कसा है। उन्होंने कहा कि पनीरसेल्वम इस सरकार के खिलाफ पहले भी आरोप लगा चुके हैं। ऐसे में फिर उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद देने की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि 18 फरवरी को हुए विश्वासमत के दिन पार्टी प्रमुख वी. के. शशिकला की ओर से अन्नाद्रमुक के 122 विधायकों ने पलानीस्वामी का समर्थन किया, जबकि पनीरसेल्वम ने सरकार के खिलाफ मतदान किया था। विधायक ने कहा इस पूरे मामले की जानकारी राज्यपाल को दे दी गई है और कहा गया है कि मुख्यमंत्री को हटाया जाना चाहिए'। पनीरसेल्वम पर निशाना साधते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि उन्होंने सिर्फ पदों के लिए विलय को स्वीकार किया है। 


अन्नाद्रमुक के पास 134 विधायक 

इससे पहले  दिनाकरण के आवास पर बैठक बुलाई गई। इस बैठक में 18 विधायकों ने हिस्सा लिया था।विधायकों में से एक पी. वर्तविल ने दावा किया था कि दिनाकरण को 25 विधायकों का समर्थन हासिल है। गौरतलब है कि तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में अन्नाद्रमुक के 134 विधायक हैं। जबकि विपक्षी दल DMK के पास 89 विधायक हैं।  जबकि कांग्रेस के पास आठ और आईयूएमएल के पास एक विधायक हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की आरके नगर विधानसभा सीट उनके निधन के बाद अभी तक खाली है। 

 

Prashant Jha
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