MP सियासत में संग्राम खतो-किताबत का दौर जारी, मुश्किल में कमलनाथ

- मुख्यमंत्री कमलनाथ के पत्रों का जवाब दे रहे राज्यपाल लालजी टंडन

-विधानसभा अध्यक्ष ने भी मोर्चा संभाला, जवाब में राजभवन ने खुद ही सवाल पूछ लिए

- गुजरात में ट्वीट के सहारे हो रही सियासत, नितिन पटेल को गहलोत ने दिया जवाब

 

By: shailendra tiwari

Published: 18 Mar 2020, 11:31 AM IST

नई दिल्ली.

मध्यप्रदेश की सियासत में शुरू हुई खतो-किताबत की जंग थम नहीं रही हैँ। हर कोई एक दूसरे को शह और मात का जवाब दे रहा है। मुख्यमंत्री कमलनाथ जहां राजभवन की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो राजभवन भी उनकी भूमिका पर सवाल पूछ रहा है। चिटि्ठयों के इस दौर में जब विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने राज्यपाल को पत्र लिखा तो राजभवन ने भी उसका जवाब उसी अंदाज में भेजा और अध्यक्ष से ही पूछ लिया कि आखिर वह किन धाराओं और नियम-कानून के तहत यह बातें कह रहे हैं। इतना ही नहीं, राजभवन ने सोशल मीडिया और अखबारों को हवाला देते हुए कहा है कि उसमें तो विधायकों के वीडियो सबके सामने हैं। उन्होंने अध्यक्ष का भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा है कि मैं आपकी मजबूरी समझ सकता हूं, क्यों आप विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

दरअसल, राज्यपाल ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि वह 16 मार्च को अपना बहुमत साबित करें। जिसके बाद विधानसभा को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। उसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जवाबी चिट्ठी लिखकर राज्यपाल को लेकर कई टिप्पणी कर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद राज्यपाल ने जवाबी पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के पत्र की भाषा पर कड़ी आपत्ति जाहिर की। राजभवन ने अपने पत्र में यहां तक लिख दिया कि अगर 27 मार्च को बहुमत साबित नहीं करते हैं तो माना जाएगा कि सरकार बहुमत में नहीं है।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मुलाकात की और अपने पत्र की भाषा को लेकर खेद जाहिर किया। हालांकि इस पत्र के बाद जवाब का मौका संभाला विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि विधायकों को वापस लाया जाए, उसके बिना बहुमत साबित कराना न्यायसंगत नहीं होगा। विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पत्र में बहुमत परीक्षण नहीं कराए जाने के पीछे के तर्क दिए।

राज्यपाल ने उन तर्कों का जवाब देते हुए कहा कि संभव है कि आपने मुझे जो पत्र लिखा है वह नियमों के तहत हो। ऐसे में आप मुझे उन नियमों का जिक्र करते हुए बताएं कि यह तर्क किन नियम प्रक्रिया के तहत दिए गए हैं। राजभवन ने इसके आगे भी लिखा कि आप विधायकों के इस्तीफे क्यों स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, इसकी मजबूरी हम जानते हैं।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की सियासत में अलग ही कहानी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट जहां भाजपा की फ्लोर टेस्ट की मांग पर सुनवाई कर रहा है। वहीं, दिग्विजय सिंह बेंगलुरू में बैठकर कांग्रेस के विधायकों से मिलने की मांग कर रहे हैं। यह बात और है कि विधायकों ने अभी तक दिग्विजय सिंह से मुलाकात करने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक रोज पहले कथित बंधक विधायक मीडिया के सामने आकर अपनी बात रख चुके हैं और साफ कर चुके हैं कि वह विधानसभा से इस्तीफा दे चुके हैं। उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाना चाहिए।

गुजरात में ट्वीट वार
गुजरात के बवाल पर अलग ही राजनीति हो रही है। गुजरात में अब तक पांच कांग्रेस विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। यहां पर भाजपा की तीन सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। अपने विधायकों को सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस ने अपने विधायकों को जयपुर भेज दिया है। जहां पर उन्हें एक होटल में रखा गया है। इसी को लेकर गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ट्वीट किया है कि देश भर में कोरोना फैला हुआ है, ऐसे में कांग्रेस विधायकों के स्वास्थ्य को लेकर वह चिंताग्रस्त हैं। इस पर जवाब देते हुए अशोक गहलोत ने लिखा कि कांग्रेस विधायकों की प्रतिरोधक क्षमता अधिक है, वो गुजरात की भाजपा सरकार से लड़ रहे हैं। राजस्थान सरकार उनके स्वास्थ्य को लेकर सजग है और आपकी ओर से चिंता करने के लिए शुक्रिया।

Kamal Nath
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