रिपुन बोरा ने प्रणब से की भावुक अपील, आरएसएस कार्यक्रम में जाने से पहले एक बार और सोच लें

असम कांग्रेस के अध्‍यक्ष ने आरएसएस के कार्यक्रम से एक दिन पहले प्रणब मुखर्जी से उसमें शामिल न होने की अपील की है।

By: Dhirendra

Published: 06 Jun 2018, 02:59 PM IST

नई दिल्‍ली। असम कांग्रेस के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र के जरिए भावुक अपील की है कि वह आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने से पहले एक बार फिर सोच लें। उन्‍होंने देशभक्ति की बात करते हुए अपने पत्र में लिखा है कि आप उस संस्था के कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं जिसने आज तक राष्ट्रीय झंडे तक का आदर नहीं नया विरोध किया है। इस बात का विरोध समय-समय पर आप खुद भी दर्ज कराते रहे हैं।

एक राष्‍ट्र एक धर्म केवल दिखावा
रिपुन बोरा ने राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए पत्र में लिखा है कि आरएसएस का एक राष्‍ट्र एक धर्म की अवधारणा केवल एक छलावा है। यही नहीं उन्होंने आगे लिखा है कि देश में बढ़ती सामाजिक और धार्मिक असहिष्णुता की बड़ी वजह सिर्फ आरएसएस और उसका एजेंडा है। रिपुन ने कहा है कि आप 7 जून को नागपुर कांफ्रेस में शामिल होने जा रहे हैं और यह हमारी सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पर असर डालेगा। इससे कांग्रेस की छवि को नुकसान हो सकता है।
पार्टी में दो फाड़
दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जब से आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार किया है तभी से पार्टी दो फाड़ की स्थिति है। उसके बाद से पार्टी में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली और सुशील शिंदे ने प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय जाने के मामले को सही ठहराया है। दोनों ही नेताओं ने प्रणब का बचाव करते हुए कहा था कि उनका आरएसएस के कार्यक्रम में जाना गलत नहीं है क्योंकि वह एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति होने के साथ बहुत अच्छे विचारक हैं। इन नेताओं ने कहा था कि प्रणब मुखर्जी एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं।

निर्णय नहीं बदलेंगे प्रणब दा
आपको बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार को आरएसएस के नागपुर कार्यालय जाएंगे। जब से उन्होंने आरएसएस का निमंत्रण स्वीकारा है कांग्रेस पार्टी में भारी असंतोष है और विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। किया है। इससे पहले पी चिदंबरम, जयराम रमेश, संदीप दीक्षित सहित दर्जनों वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता उन्‍हें पत्र लिखकर कार्यक्रम में शामिल न होने की अपील कर चुके हैं। अपनी पत्र में सभी नेताओं ने धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का हवाला भी दिया है। साथ ही इस बात का भी जिक्र किया है कि कैसे भाजपा ने देश भर में सांप्रदायिकता को बढ़ासा दिया। भाजपा की नीतियों की वजह से ही देश भर में तनाव का माहौल है। इसके बावजूद आप आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो ये बात समझ से परे हो जाता है। इन अपीलों के बावजूद प्रणब मुखर्जी ने साफ कर दिया है कि वेा कार्यक्रम में शामिल होंगे और जो कहना होगा वहीं कहेंगे।

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