RSS का सर्वे: गुजरात में आज चुनाव तो भाजपा को 60 सीटें

RSS का सर्वे: गुजरात में आज चुनाव तो भाजपा को 60 सीटें
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सर्वे के मुताबिक अगर इस समय गुजरात में विधानसभा चुनाव होते हैं तो भाजपा को 182 में से 60-65 सीटें मिलेंगी

अहमदाबाद। गुजरात से भाजपा के लिए बुरी खबर है। अगर राज्य में इस वक्त विधानसभा चुनाव होते हैं तो भाजपा सत्ता से बेदखल हो जाएगी। यह बात भाजपा और संघ के एक सर्वे से निकल कर आई है। सर्वे के मुताबिक दलित आंदोलन के कारण राज्य में भाजपा का जनाधार कम हुआ है। सर्वे के मुताबिक अगर इस समय गुजरात में विधानसभा चुनाव होते हैं तो भाजपा को 182 में से 60-65 सीटें मिलेंगी। यह सर्वे गुजरात में दलित आंदोलन के बाद किया गया।


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सर्वे में सामने आया है कि दलित और पाटीदार आंदोलन के चलते भाजपा को कम से कम 18 सीटों पर नुकसान होने जा रहा है। सर्वे के मुाबिक सरकारी नौकरियों और जमीन आंवटन के लिए आदिवासी भी आंदोलन छेड़ सकते हैं। सर्वे को संघ के उन जमीनी प्रचारकों ने अंजाम दिया है,जिन्हें लोगों से फीडबैक लेने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा की ओर बताया गया है तो कहा गया है कि दलित इससे दूर जा रहे हैं।

इससे पहले संघ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भाजपा को दिसंबर 2015 के पंचायती चुनावों में कम से कम 104 सीटों का नुकसान हुआ। इसकी वजह पाटीदारों का आंदोलन था। भाजपा को शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा नुकसान हुआ था। संघ में इस बात को लेकर चिंता है कि दलितों के समर्थन के लिए मुस्लिम आगे आ रहे हैं।



गुजरात में संघ के शीर्ष नेताओं ने सोमवार को मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सर्वे के बारे में बताकर इस्तीफे के लिए राजी कर लिया था। यही वजह है कि विपक्ष के नेता शंकरसिंह वाघेला ने मंगलवार को भरोसा जताया था कि अगर चुनाव जल्द होते हैं तो उनकी पार्टी इसके लिए तैयार है। वाघेला कांग्रेस में जाने से पहले संघ के प्रचारक और भाजपा के बड़े नेता रह चुके हैं।




संघ के एक सूत्र ने कहा,संघ दलितों को हिंदुओं का हिस्सा मानता है और हिंदुओं में दो ध्रुव बनना कभी स्वीकार नहीं करेगा। पहले दलित काांग्रेस के प्रति समर्पित थे और संघ ने दो दशकों की अथक मेहनत के बाद उन्हें अपने साथ किया था। इससे निपटने के लिए पहला कदम आनंदीबेन को कुर्सी से हटने के लिए तैयार करना और फिर दूसरे कदम उठाना है। संघ ने दलितों के हिंदुओं से दूर जाने को गंभीरता से लिया है,इसलिए यह पहली बार सामाजिक सद्भावना सम्मेलन करने जा रहा है।

यह सम्मेलन बुधवार को ऊना में होगा,जहां से दलितों का विरोध शुरू हुआ था। गुजरात आरएसएस के प्रभारी विजय ठाकर ने कहा,हम सामाजिक सद्भावना लाने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए धार्मिक उपदेशक और संत सबसे अच्छा माध्यम है। हालांकि उन्होंने इस सर्वे के बाद आनंदीबेन के सीएम पद से हटने पर कहा कि संघ इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त नहीं रहता है,इसके लिए भाजपा का अपना संगठन है।
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