राज्यसभा में पास हुआ एसपीजी संशोधन विधेयक, अमित शाह ने दिए जवाब

  • लोकसभा के बाद राज्यसभा से एसपीजी संशोधन बिल पास।
  • नीरज शेखर, रामगोपाल यादव, केटीएस तुलसी, स्वामी ने रखे तर्क।
  • अमित शाह ने इस बिल को लेकर दूर की लोगों की जिज्ञासाएं।

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के 12वें दिन सरकार ने राज्यसभा में एसपीजी संशोधन विधेयक को पेश किया। लोकसभा से पहले ही पास किए जा चुके इस बिल पर विभिन्न सवालों-सुझावों के बाद यह पास हो गया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधी परिवार से एसपीजी कवर हटाए जाने को लेकर उठ रहे तमाम सवालों के भी जवाब दिए।

एसपीजी बिल को लेकर तमाम सांसदों द्वारा उठाए गए सुझावों-सवालों को सुनने के बाद अमित शाह ने कहा, "पहले इस बिल को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर कर देता हूं। दो सदस्यों ने कहा यह बिल दो परिवारों को ध्यान में रखकर लाया गया, तो यह सच नहीं है। थोड़ा और स्पष्ट करूं तो मेरा कहने का मतलब था कि गांधी परिवार के तीन सदस्यों को ध्यान में रखकर यह बिल लाया गया, यह ठीक नहीं है। जो पुराना कानून था उसी को आधार मानते हुए गांधी परिवार की सुरक्षा समीक्षा के आधार पर उनका एसपीजी कवर हटाया गया। इसके बजाय उन्हें दूसरी सुरक्षा दी गई।"

भाजपा अध्यक्ष यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा, "विवेक तन्खा द्वारा उठाया गया सवाल वाजिब नहीं है। इस एक्ट के अंदर चार बार बदलाव किए गए हैं और अब पांचवां है। यह पांचवां बदलाव किसी परिवार की वजह से नहीं हुआ। पहले ही एसपीजी सिक्योरिटी की जगह सीआरपीएफ जेड प्लस एंबुलेंस को दिया गया था और यह देश में किसी भी व्यक्ति को दी गई सबसे हाईएस्ट सिक्योरिटी है।"

शाह ने आगे कहा, "मैं यह जरूर कहना चाहता हूं कि इससे संबंधित पिछले बदलाव एक परिवार को ही ध्यान में रखकते हुए किए गए थे। अशोक सिंघल को एसपीजी सुरक्षा नहीं मिली थी, जबकि एक वक्त था जब उनको भी खतरा था। प्रधानमंत्री के लिए यह सुरक्षा इसलिए जरूरी होती है क्योंकि वह स्टेट ऑफ हेड होता है। अब अगर धमकी की ही बात करें तो क्यों सिर्फ गांधी परिवार? सभी को सुरक्षा मिले। सरकार की जिम्मेदारी 130 करोड़ लोगों की है। ऐसे में एसपीजी सुरक्षा हासिल करने की जिद मेरी समझ में नहीं आती।"

उन्होंने आगे कहा, "हम समानता में विश्वास रखते हैं। सिर्फ गांधी परिवार की सुरक्षा ही इस में नहीं है। ना केवल पूर्व पीएम चंद्रशेखर की सिक्योरिटी हटा ली गई थी, कांग्रेस के नरसिम्हा राव के साथ भी यही हुआ। मनमोहन सिंह की सुरक्षा भी जेड प्लस कर दी गई थी। उस वक्त तो कांग्रेस ने कुछ नहीं कहा। हम एक परिवार का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि परिवारवाद का विरोध कर रहे हैं। और जब तक हमारे सीने में दम है, परिवार का यह विरोध जारी रहेगा।"

उन्होंने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा, "मुझे यह जिद नहीं समझ में आई कि मुझे एसपीजी सुरक्षा ही चाहिए। जो एसपीजी के लोग हैं, वो कोई विदेश से नहीं आते हैं। यहां कई सिक्योरिटी के लोग एसपीजी से ही आते हैं। उनकी सुरक्षा वापस नहीं ली है, सिर्फ परिवर्तन किया है। जो सुरक्षा रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, उप-राष्ट्रपति और राष्ट्रपति को मिली है, वही उनको भी मिली है।"

स्वामी की चुनौती

इस बिल को लेकर भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी बोले कि वह इसका स्वागत करते हैं। कहा जाता है कि एक ही परिवार के दो व्यक्तियों की हत्या कर दी गई। इंदिरा गांधी की हत्या उनके गार्ड ने ही थी और उस वक्त पर दौरे पर नहीं थीं। यह हत्या उनके घर पर ही हुई। जबकि राजीव गांधी के मामले पर केटीएस तुलसी को चुनौती देता हूं, क्योंकि एसपीजी सुरक्षा वापस ली गई और उनकी हत्या कर दी गई।

तुलसी की सहमति

इस बिल को लेकर राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने कहा कि वह नीरज शेखर की बात से रजामंद हैं। न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की समिति ने स्पष्ट किया था कि एसपीजी सुरक्षा वापस लेने की वजह से राजीव गांधी की हत्या हुई। अब वही गलती मौजूदा सरकार दोहराना चाहती है।

नीरज शेखर की दलील

इस संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर ने कहा, ""मेरा मानना है कि एक ऐसा संगठन होना चाहिए जो केवल पीएम को ही सुरक्षा दे। पूर्व पीएम की सिक्योरिटी के लिए अलग संगठन हो। जो संशोधन 1991 में हुआ, उससे मुझे सुरक्षा मिली। मुझे अच्छा लगता था कि 11 साल तक मेरे आगे-पीछे गाड़ी चलती थी। लोग सोचते थे कि कौन है यह लड़का। चार गाड़ियां मेरे साथ चलती थीं। 21-22 साल की उम्र में कुछ नहीं था। सबको सुरक्षा अच्छी लगती है। वर्ष 2001 से सुरक्षा मैंने नहीं रखी है, जब से सांसद बना हूं तब से सिर्फ एक जवान रहता है।"

उन्होंने आगे कहा, "देश का नौजवान वीआईपी संस्कृति को पसंद नहीं करता है। इस बिल का स्वागत करता हूं। जब मैं एसपीजी कवर में था तो मुझे लगता था कि मैं ही प्रधानमंत्री हूं। कम से कम भाजपा में रहते हुए प्रधानमंत्री बन सकता हूं, लेकिन कांग्रेस में नहीं। जो एक्ट 1988 में था वही होना चाहिए। सिर्फ पीएम को ही ये सुरक्षा मिलनी चाहिए।"

रामगोपाल यादव बोले सुरक्षा जरूरी

इस दौरान प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा, "लोगों को एक्स, वाई या जेड श्रेणी की सुरक्षा धमकी के आधार पर मिलती है। जो सत्ता में होता है, उसके हिसाब से धमकी भी बदलती रहती है। महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोग (पीएम-गृह मंत्री) आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं और जब वो सत्ता से दूर होते हैं तो आतंकियों-अपराधियों के निशाने पर होते हैं। सत्ता से दूर होने पर धमकी और गंभीर हो जाती है।"

क्या है एसपीजी संशोधन बिल

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप एमेंडमेंट बिल लोकसभा से पारित हो चुका है। इस नए बिल में सिर्फ प्रधानमंत्री को ही एसपीजी सुरक्षा देने का प्रावधान है और उनके अलावा कोई भी विशिष्ट व्यक्ति इस सुरक्षा कवच का हकदार नहीं हो सकता। विधेयक में संशोधन के बाद कानूनी तौर पर गांधी परिवार को कोई भी सदस्य इस कवर में नहीं रह सकेगा। प्रधानमंत्री पद से हटने के पांच साल बाद यह सुरक्षा वापस ली जाएगी।

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अमित कुमार बाजपेयी
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