स्पीकर ओम बिरला की पहल पर लोकसभा का गतिरोध समाप्त, 7 सांसदों का निलंबन वापस

  • टीएमसी के सौगत राय ने बिरला को बताया फादर ऑफ हाउस
  • लोकसभा से कांग्रेस के सातों सांसदों का निलंबन वापस लिया

By: Mohit sharma

Updated: 11 Mar 2020, 11:10 PM IST

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ( Speaker Om Birla ) की पहल पर सर्वदलीय बैठक ( All party meeting ) के बाद लोकसभा में बुधवार को गतिरोध समाप्त हुआ। बजट सत्र के दूसरे चरण के छठे दिन दोपहर बाद लोकसभा से कांग्रेस के सातों सांसदों का निलंबन वापस लिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलने लगी।

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दिल्ली हिंसा ( Delhi violence ) पर चर्चा को लेकर लोकसभा में पांच दिन तक सत्ता और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। इसके चलते प्रश्नकाल भी हंगामे की बलि चढ़ गए। वहीं हंगामे से नाराज अध्यक्ष बिरला भी तीन दिन तक सदन संचालित करने नहीं आए। लगभग सभी दलों के सांसदों ने बिरला से बुधवार को सदन संचालित करने का आग्रह किया। इसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। इसमें सभी दलों ने मर्यादापूर्ण तरीके से सदन संचालित करने पर सहमति जताई। साथ ही कांग्रेस के 7 सांसदों का निलंबन वापस करने का आग्रह भी किया। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही में इस पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ( Congress leader Adhir Ranjan Chaudhary ) ने कहा कि बिरला को सदन में देखकर खुशी हो रही है। कभी-कभी ऐसा कुछ हो जाता है, जो हम नहीं चाहते हैं। हम भी चाहते हैं कि सदन की कार्यवाही अच्छे से चले। चौधरी ने बिरला पर पूर्ण विश्वास जताया। टीएमसी के सौगत राय ने कहा कि बिरला फॉदर ऑफ हाउस है। बिरला सभी सांसदों के अधिकार को संरक्षित करते हैं। भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि सांसदों के व्यवहार को लेकर नियमावली बननी चाहिए।

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-सदन में जो घटनाएं हुई उससे दुखी हुआ-बिरला
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि संसद 130 करोड़ जनता की आशा -आकांक्षाओं का मंदिर हैै। यहां वाद-विवाद व स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए। पिछले 8 महीनों में सांसदों के सहयोग से कई कीर्तिमान स्थापित हुए। व्यवधान के बावजूद सदन स्थगित नहीं हुआ। संसद के प्रति देश की जनता लोगों की आस्था बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र के मंदिर में मत्था टेककर संसद की प्रतिष्ठा बढ़ाई, लेकिन संसद में पिछले दिनों जो घटनाएं घटी, उससे मैं व्यक्तिगत रूप से दुखी हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित किया जाएगा। सांसदों के विश्वास और भरोसे पर कभी आंच नहीं आने दी जाएगी। सहमति-असहमति भारतीय लोकतंत्र का मर्म है। सर्वदलीय बैठक में कई दलों के नेताओं ने व्यवधान न करने की बात कही है। हमे संसद से ग्राम पंचायत स्तर तक स्वस्थ लोकतंत्र का संदेश देना है।

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-मेघवाल ने रखा निलंबन वापसी का प्रस्ताव
केन्द्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि कांग्रेस के सात सांसदों का निलंबन सरकार का फैसला नहीं था। उन्होंने सांसद गौरव गोगोई, टीएन प्रतापन, राजमोहन उन्नीथन, मणिकम टैगोर, बेनी बेहन, डीन कुरीकोस, गुरजीत सिंह के निलंबन वापसी का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।

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