आज आपातकाल विरोधी दिवस मना रही है भाजपा, कल इतिहास का काला पन्‍ना उधेड़ेंगे शाह

आज आपातकाल विरोधी दिवस मना रही है भाजपा, कल इतिहास का काला पन्‍ना उधेड़ेंगे शाह

Dhirendra Kumar Mishra | Updated: 25 Jun 2018, 01:25:55 PM (IST) राजनीति

विपक्षी पार्टियों के लगातार हमलों के बीच 43 साल पहले जनता पर आपातकाल थोपने के लिए भाजपा कांग्रेस के पुराने जख्‍मों को कुरेदने का काम करेगी।

नई दिल्ली। मोदी सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर होते जा रहे राहुल गांधी के तेवरों के बीच भाजपा आज देश के इतिहास का काला पन्ना उधेड़ने का काम करेगी। इसके जरिए भाजपा की कांग्रेस को जनता की अदालत में घसीटने की योजना है। वहीं भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह कल इंदिरा गांधी द्वारा देश की जनता पर थोपे गए आपातकाल का काला पन्‍ना उधेड़ने का काम करेंगे। आपको बता दें ते आज आपातकाल की घोषणा का 43वां साल है। 25 जून, 1975 को तत्‍कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने तानाशाही रवैया अख्तियार करते हुए देश पर आपातकाल थोपने का काम किया था। आज उसी आपाताकाल को भाजपा काले दिन के रूप में मना रही है। इतना ही नहीं पार्टी आज देशभर में आपातकाल को विरोधी दिवस मना रही है।

मीसा कानून के प्रभावितों का सम्मान करेंगे शाह
दिल्ली प्रदेश भाजपा आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी और संजय गांधी द्वारा जनता के मौलिक अधिकारों का हनन किए जाने के विरोध में आज आपातकाल विरोधी दिवस मनाएगी। भाजपा आपातकाल बंदी स्मरण समिति की ओर से सोमवार शाम को एक कार्यक्रम का आयोजन होना है। इस तरह के कार्यक्रम देश भर में भाजपा कार्यकर्ताओं की तरफ से आयोजित किए जाएंगे। इस बात को लेकर भाजपा गुजरात इकाई का आज से दो दिवसीय चिंतन शिविर अहमदाबाद में शुरू हो गया है। इस शिविर के दूसरे दिन के कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी भाग लेंगे। वे अपने संबोधन में लोगों को आपातकाल के दिनों की याद दिलाएंगे। इसके अलावा अमित शाह एक कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगे, जहां पर आपातकाल के दौरान मीसा कानून से प्रभावित लोगों को सम्‍मानित करेंगे। गुजरात भाजपा का यह चिंतन शिविर 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आयोजित किया गया है।

इंदिरा की संवैधानिक तानाशाही थी आपातकाल
केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने 25 जून, 1975 को इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लागू आपातकाल को याद करते हुए कहा कि इसमें संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल लोकतंत्र को संवैधानिक आपातकाल में बदलने के लिए किया गया। द इमरजेंसी रीविजिटेड शीर्षक से फेसबुक पोस्ट की तीन भागों की श्रृंखला के पहले भाग में जेटली ने लिखा कि 25-26 जून, 1975 की मध्य रात्रि को कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जहां हमने आपातकाल का पुतला जलाया। जो कुछ हो रहा था उसके खिलाफ मैंने भाषण दिया। मुझे मीसा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। मुझे दिल्ली की तिहाड़ जेल ले जाया गया। इस तरह 26 जून, 1975 की सुबह मुझे आपातकाल के खिलाफ एक मात्र विरोध प्रदर्शन करने का मौका मिला था। मैं आपातकाल के खिलाफ पहला सत्याग्रही बन गया। 22 साल की उम्र में किए गए इस छोटे से कार्य से मुझे अहसास हुआ कि मैं उन घटनाक्रमों का हिस्सा बन रहा था जो इतिहास का भाग बनने जा रहे थे। मेरे लिए, इस घटना ने मेरी जिंदगी का भविष्य बदल दिया।

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