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सवर्णो के 10 फीसदी आरक्षण यशवंत सिन्हा का तंज, ये जुमले से ज्यादा कुछ नहीं

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सवर्णो के 10 फीसदी आरक्षण पर कानूनी जटिलताओं और समय की कमी का हवाला देते हुए सरकार की इच्छा पर सवाल उठाया है।
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Chandra Prakash Chourasia

Jan 07, 2019

Yashwant Sinha

सवर्णो के 10 फीसदी आरक्षण यशवंत सिन्हा का तंज, ये जुमले से ज्यादा कुछ नहीं

नई दिल्ली। देश में वर्षों से गरीब सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग चल रही थी। लोकसभा चुनाव नजदीक आता देख मोदी सरकार ने इसपर एक नया राजनीतिक दांव खेला है। सरकार ने आर्थिक रूप से पिछले सवर्णो को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसला किया है। जिसपर हर दल अपनी प्रतिक्रिया दे रही है। इसी कड़ी में कभी वाजपेयी के बेहद करीबी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसदी आक्षरण को 'जुमला' करार दिया।

'आरक्षण एक जुमला से ज्यादा कुछ नहीं'

सिन्हा ने कानूनी जटिलताओं और समय की कमी का हवाला देते हुए सरकार की इच्छा पर सवाल उठाया, क्योंकि संसद का वर्तमान सत्र मंगलवार को समाप्त हो रहा है। यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णो को 10 फीसदी आरक्षण एक जुमला से ज्यादा कुछ नहीं है। इसमें कई कानूनी जटिलताएं हैं और संसद के दोनों सदनों के पास इसे पारित करने का वक्त नहीं है। सरकार का कदम पूरी तरह से बेनकाब हो गया है।

आर्थिक आधार पर सवर्णों को आरक्षण देने का ऐलान

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दे दी। खबर है कि मंगलवार को संसद का अंतिम दिन होने के कारण इस सत्र में दोनों सदनों से इस विधेयक पेश तो करेगी लेकिन इसके पारित होने की संभावना न के बराबर है। वो भी तब राज्यसभा में सत्ता पक्ष के पास जरूरी बहुमत नहीं है। संविधान संशोधन विधेयक होने के नाते इसके लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। चुनावी साल होने के कारण सरकार के इस फैसले से अभी से राजनीतिक शतरंज की बिसात बिछ गई है।