VVPAT पर ऐसे गरमाई देश की राजनीति, जानिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 21 दलों के नाम

VVPAT पर ऐसे गरमाई देश की राजनीति, जानिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 21 दलों के नाम

Shweta Singh | Publish: Mar, 15 2019 12:57:31 PM (IST) | Updated: Mar, 15 2019 01:11:56 PM (IST) राजनीति

  • सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जारी किए हैं निर्देश
  • मामले में एक विशेष अधिकारी को नियुक्त करने का आदेश
  • आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन चंद्राबाबू नायडू कर रहे हैं 21 दलों का नेतृत्व

नई दिल्ली। आगामी लोकसभा चुनाव में वीवीपैट (VVPAT) के संबंध में 21 विपक्षी दलों ने याचिका दायर की थी। इन दलों की ओर से 50 प्रतिशत ईवीएम वोटों का सत्‍यापन VVPAT पर्ची से कराए जाने को लेकर दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर इस बारे में जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही चुनाव आयोग से इस मामले में सहायता करने के लिए एक विशेष अधिकारी अलग से नियुक्‍त करने को कहा है। इस रिपोर्ट में हम आपको उन दलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने कोर्ट के सामने यह याचिका दायर की थी।

VVPAT पर इन दलों ने जताई आपत्ति

अापको बता दें कि इन 21 दलों का नेतृत्व तेलगू देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री एन चंद्राबाबू नायडू कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस, शरद पवार की अगुवाई वाली नेशनल कांग्रेस पार्टी, अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माले (CPI-M), डेरेक ओ ब्रॉयन की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस, फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कांफ्रेंस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, शरद यादव की लोकतांत्रिक जनता दल और डीएमके जैसी प्रमुख पार्टियां शामिल हैं।

वायरल वीडियो से खड़ा हुआ था विवाद

आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने VVPAT प्रणाली को पेश करने के बाद कई बार इससे संबंधित डेमो का आयोजन किया है। इस दौरान इसके कार्यप्रणाली आदि के बारे में जानकारी साझा की गई। हालांकि, 2017 में हुए एक विवादित डेमो के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया। दरअसल, मध्य प्रदेश से डेमो का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके मुताबिक वोटिंग के लिए किसी भी पार्टी के सामने वाला बटन दबाने पर वोट कमल यानी भाजपा को ही जा रहा था। यह मामला मध्य प्रदेश के भिंड जिले से सामने आया था। इस विवादित डेमो के बाद से विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह घेरने की कोशिश की। वहीं, मध्य प्रदेश में अक्टूबर 2018 में भारतीय निर्वाचन आयोग को पता चला कि वहां सप्लाई की गईं वीवीपैट मशीनों के फेल होने की संख्या करीब 7 फीसदी थी। इस जानकारी के सामने आनेे के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा था कि इन आंकड़ों के सामने आने के बाद ईवीएम और वीवीपैट के संबंध में उठे सवाल और पुख्ता हो गए हैं। अब इसी क्रम में 21 पार्टियों ने लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की। आपको बता दें कि VVPAT पर फैसले के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित मामलों से निपटने के लिए देश भर में विशेष न्यायालयों की स्थापना की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।

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