क्‍या महागठबंधन की राजनीति कर पीएम बन पाएंगे राहुल गांधी?

क्‍या महागठबंधन की राजनीति कर पीएम बन पाएंगे राहुल गांधी?

Dhirendra Kumar Mishra | Publish: Jun, 19 2018 03:22:56 PM (IST) राजनीति

पीएम मोदी के खिलाफ महागठबंधन की जोरदार तरीके से पैरवी कर राहुल गांधी ने पीएम पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है।

नई दिल्‍ली। देश भर में कांग्रेस के कार्यकर्ता पार्टी अध्‍यक्ष राहुल गांधी का आज जन्‍मदिन मना रहे हैं। लेकिन इस बार पार्टी के कार्यकर्ता जिस उत्‍साह से उनका जन्‍मदिन मना रहे हैं वो पिछले कुछ वर्षों के दौरान देखने को नहीं मिला था। ऐसा इसलिए कि गुजरात में जोरदार प्रदर्शन और कर्नाटक में सत्‍ता में बने रहने की शानदार सफलता के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगने लगा है कि अब राहुल गांधी कांग्रेस अध्‍यक्ष के रूप में महागठबंधन की राजनीति के बल पर लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर पीएम बन सकते हैं। हालांकि इस बारे में अंतिम रूप कुछ कहना बचकाना कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए कि राहुल गांधी पीएम मैटीरियल हैं या नहीं, इस बात को लेकर पार्टी के नेताओं से लेकर अन्‍य दलों के नेताओं की राय अलग-अलग है।

पीएम मैटीरियल के पक्ष में तर्क :
कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को पीएम मै‍टीरियल मानने वालों का तर्क है कि उनमें वो सारी खूबियां हैं जो एक प्रधानमंत्री में होना चाहिए। पीएम मानने वालों के लिहाज से देखें तो उनका सबसे मजबूत पक्ष यह है कि वो गांधी परिवार से हैं। उनके पास न केवल देश को चलाने का पारिवारिक संस्‍कार है बल्कि वह उसी आवोहवा पले बढ़े हैं। गांधी परिवार से नाता होने की वजह से उनके नाम का विरोध न पार्टी के नेता और न हीं राजनीतिक क्षत्रप मजबूती से कर पाएंगे। ऐसा इसलिए कि महागठबंधन में किसी और नाम पर आसानी से सहमति बन पाना मुमकिन नहीं होगा। दूसरी बात ये है कि पिछले कुछ वर्षों में राहुल गांधी एक अनुभवी राजनेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कांग्रेस अध्‍यक्ष बनने के बाद से उनके नेतृत्‍व से इस बात की झलक भी मिलने लगी है। अब वह एक कुशल नेतृत्‍वकर्ता की तरह तत्‍काल और दूरगामी निर्णय लेने लगे हैं। कर्नाटक विधानसभा का चुनाव और सरकार का गठन इस बात का ज्‍वलंत उदाहरण है। इसके साथ ही वो देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस की संगठनात्‍मक ताकत और करोड़ों कार्यकर्ताओं को मजबूत बेस उनके पास है। कांग्रेस के पास करीब छह दशक तक देश पर शासन करने का अनुभव है, जिसका लाभ उन्‍हें मिलेगा। इसके अलावा राहुल गांधी वर्तमान में पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी एकता की बात करने वालों में सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं। इस बात को लेकर उनका लगातार प्रयास जारी है। इस बात को राजनीतिक क्षत्रप तवज्‍जो भी देने लगे हैं।

विपक्ष में तर्क:
राहुल गांधी को पीएम मैटीरियल मानने के मुद्दे पर सहमत नहीं दिखने वालों का कहना है कि ये बात सही है कि उनके पास देश की सबसे पुरानी पार्टी का मजबूत संगठन है लेकिन भारत जैसे देश के पीएम के लिए जिस अनुभव की जरूरत होती है उस स्‍तर को वो अभी तक हासिल नहीं कर पाएं हैं। इस राह में पार्टी के कुछ बुजुर्ग नेता ही उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। इसके साथ ही शरद यादव, शरद पवार, मायावती, मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी, नी‍तीश कुमार जैसे क्षत्रप उन्‍हें गंभीरता से नहीं लेते हैं। दूसरी बात ये है कि कांग्रेस पार्टी अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। देश भर में पार्टी का जनाधार कमजोर हो गया है और उसे क्षेत्रीय दलों के साथ न चाहते हुए समझौता करना पड़ रहा है। दूसरी बात जिस महागठबंधन की जोरदार पैरवी राहुल गांधी कर रहे हैं उसमें चुनाव के समय एक-दूसरे के जनाधार को बढ़ाने की क्षमता बहुत कम है। यही कारण है कि महागठबंधन की बातें लंबे अरसे से होने के बावजूद अभी तक इसे वैचारिक धरातल पर मूर्त रूप देना संभव नहीं हो सका है।

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