scriptलकड़ी के अभाव में छोड़ा पुश्तैनी धंधा | Abandoned ancestral business due to lack of wood | Patrika News

लकड़ी के अभाव में छोड़ा पुश्तैनी धंधा

प्रतापगढ़
कांठल की प्रसिद्ध थेवा कला के साथ ही वर्षों से ख्यात रही काष्ठकला अब विलुप्ति के कगार पर है। तकनीकी युग में अब इसके कद्रदान भी नहीं बचे हैं। इसके साथ ही इसमें काम आने वाली खिरनी के पेड़ भी काफी कम रह गए है। इससे गत एक दशक में ही काष्ठकला के कारीगर भी अब इक्का-दुक्का ही रह गए है। ऐसे में जो कारीगर बचे है, वे भी खिरनी की जगह निलगिरी(यूकेलिप्टिस) की लकड़ी काम में ले रहे हैं। जिससे अस्तित्व खोती जा रही काष्ठकला को जीवित रखने का एक प्रयास है।

प्रतापगढ़

Updated: October 15, 2021 07:23:57 am

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