खतरनाक हो सकता है श्वान का काटना

खतरनाक हो सकता है श्वान का काटना

Rakesh kumar Verma | Publish: Sep, 04 2018 11:23:17 AM (IST) Pratapgarh, Rajasthan, India

-समय पर उपचार नहीं लेने से हो सकती है गंभीर बीमारी

प्रतापगढ़. श्वानों के झुंड यानी खतरे का पर्याय। प्रतापगढ़ में यह खतरा हर गली, चौक, मोहल्ले में है। झुंडों में घूम रहे यह आवारा श्वान कभी भी किसी पर हमला कर सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार यदि कोई संक्रमित श्वान काटे तो रैबीज रोग की संभावना का खतरा बना रहता है। वहीं इसके मल-मूत्र से भी संक्रमण की आशंका रहती है।
कैसे हो सकता है संचारित
चिकित्सकों के अनुसार रैबीज इंसानों में अन्य जानवरों से संचारित होता है। जब कोई संक्रमित जानवर किसी अन्य जानवर या इंसान को खरोंच या काटता है। तब रैबीज संचारित हो जाता है। किसी संक्रमित जानवर की लार से भी रैबीज संचारित हो सकता है। यदि लार किसी अन्य जानवर या मनुष्य के श्लेष्मा झिल्ली के साथ संपर्क में आती ह तो भी व्यक्ति रैबीज से संक्रमित हो सकता है। रैबीज वायरस परिधीय तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचता है। रैबीज के 99 प्रतिशत से अधिक मामले श्वानों के काटने से ही होते हैं।
क्या होता है रैबीज से
रैबीज एक विषाणु जनित बीमारी है। रैबीज के प्रारंभिक लक्षणों में बुखार और शरीर में झुनझुनी हो सकता है। इनके कई अन्य गंभीर लक्षण होते हैं। जिनमें हिंसक गतिविधि, अनियंत्रित उत्तेजना, पानी से डर, शरीर के अंगों को हिलाने में असमर्थता, भ्रम और होश खो देना आदि। इन लक्षणों के प्रकट होने के बाद रैबीज का परिणाम लगभग मौत ही होता है।
संक्रमण का भी खतरा
श्वानों का खुले में शौच आम बात है। इनके शौच में बैक्टीरिया तथा परजीवी पाए जाते हैं। यदि यह मल-मूत्र पानी में जा मिले तो कई संक्रमक रोगों का कारण बन सकता है। लंबे समय तक खुले में शौच पड़े रहने से इस पर मक्खियां बैठती हैं जो संक्रमण का प्रमुख माध्यम बनती हैं। बरसात में खुले में पड़ा मल-मूत्र पानी के साथ बहकर जलस्रोतों में भी जा मिलने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में पानी के प्रदूषित होने की संभावना रहती हैं।
तुरंत करें यह करें उपाय
आवारा श्वान के काटने से रैबीज के कीटाणु शरीर में जा सकते हैं। जिससे व्यक्ति को हाइड्रोफोबिया या पागलपन जैसी समस्या हो सकती हैं। श्वान के काटने पर घाव को पानी से अच्छी तरह साफ करना चाहिए और बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। चिकित्सक जांच के बाद आपको एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाकर और दवाईंया आदि देकर रोकथाम कर सकते हैं।
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एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाएं
अपने घरों में पालतू जानवरों के एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाएं। ताकि कभी इसके काटने या खरोचने और चाटने से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। फिर भी एहतियातन चिकित्सक को जरुर दिखाएं।
डॉ जयप्रकाश परतानी, वरिष्ठ पशु चिकित्सक, प्रतापगढ़
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तुरंत करवाएं उपचार
कुत्तों या अन्य जानवरों के काटने से रैबीज जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। सडक़ पर घूमते आवारा कुत्तों के काटने से इसकी आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे में सबसे बेहतर यही है कि कुत्ते के काटने पर तुरंत किसी चिकित्सक को दिखाकर उचित उपचार लें।
डॉ धनेश सोनी, वरिष्ठ चिकित्सक, प्रतापगढ़

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