कुपोषण से कम हो रहा बच्चों का वजन

प्रतापगढ़. जिले में कुपोषण और खानपान सही नहीं होने के कारण कम वजन के बच्चे पैदा होने के आंकड़े बढ़ रहे है। ऐसे में यहां जिला चिकित्सालय में मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई में कम वजन के बच्चों के जीवन को बचाने के लिए कंगारू मदर केयर(केएमसी) काफी लाभदायक बन रहा है।

By: Devishankar Suthar

Published: 01 Mar 2020, 07:16 PM IST


केएमसी में मिल रहा उपचार, बढ़ रहा वजन
कांठल में कम वजन के बच्चे का बढ़ रहा आंकड़ा
गत वर्ष जिला चिकित्सालय में १५३० में से ९४४ बच्चे कम वजन के
प्रतापगढ़. जिले में कुपोषण और खानपान सही नहीं होने के कारण कम वजन के बच्चे पैदा होने के आंकड़े बढ़ रहे है। ऐसे में यहां जिला चिकित्सालय में मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई में कम वजन के बच्चों के जीवन को बचाने के लिए कंगारू मदर केयर(केएमसी) काफी लाभदायक बन रहा है। यहां वर्ष २०१६ से केएमसी का संचालन किया गया। जिसमें कम वजन वाले बच्चों को रखा जा रहा है। गत वर्ष यहां जन्मे बच्चों में १८ प्रतिशत बच्चे कम वजन के हुए है। ऐसे में इन बच्चों को केएमसी का लाभ दिया गया है।
कंगारू मदर केयर में लाभांवित जच्चा-बच्चा
यहां जिला चिकित्सालय में कंगारू मदर केयर(केएमसी) वर्ष २०१६ अक्टूबर से संचालित किया गया। जिसमें एक किलो ८ सौ ग्राम तक के बच्चों को केएमसी में उपचार दिया जाता था। इसके बाद ढाई किलो से कम वजन के बच्चों को केएमसी का उपचार दिया गया।
यह है गत तीन वर्ष का आंकड़ा
वर्ष २०१७ में यहं ६४९ बच्चे प्रतिमाह कम वजन के होने पर उपचार दिया गया। वहीं वर्ष २०१८ से नियमों में परिवर्तन किया गया। इसके तहत ढाई किलो से कम वजन के बच्चों को कम वजन के मानते हुए, केएमसी में उपचार दिया गया। वर्ष २०१८ में कुल १४८३ बच्चों में से ७०६ बच्चे कम वजन के जन्म हुआ। इसी प्रकार वर्ष २०१९ में कुल १५३० बच्चों में से ९४४ बच्चे कम वजन के हुए थे। वहीं वर्ष २०२० में जनवरी में ७४ बच्चे और फरवरी में ६३ बच्चे कम वजन के हुए। इनको केएमसी का लाभ दिया गया।
केएमसी से यह होता है लाभ
केएमसी देने से शिशु का वजन बढ़ता है। मां के संपर्क में रहने से शिशु का तापमान सही रहता है और शिशु बाहरी कई इंफेक्शन से भी दूर रहता है। स्तनपान बेहतर होता है।बच्चे और मां के बीच का रिश्ता मजबूत होता है।मदर केयर सेंटर में पहुंचने वाले ढाई किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों के साथ उनकी मां व अन्य कोई केएमसी दे सकते हैं।
विशेष गाउन में दी जाती है केएमसी
यहां केएमसी सेंटर में महिला अपने नवजात बच्चों को अपने आंचल में रखती है। बच्चे को कवर करने के लिए विशेष गाउन भी जाती है। महिला गाउन में अपने बच्चे को उसी तरीके से रखती हैं, जिस तरह से कंगारू अपने बच्चे को पेट के नीचे छुपा कर रखता है।इसका मुख्य कारण है कि उस गाउन से बच्चे को सामान्य तापमान मिलता है। इससे गर्मी सर्दी से बचाव भी होता रहता है।
कम से कम डेढ़ घंटे तक केएमसी
यहां जिला चिकित्सालय के मातृ एवं शिशु रोग चिकित्सा इकाई में स्थित केएमसी सेंटर में बच्चों को शुरुआत में कम से कम डेढ़ घंटा दी जाती है।बच्चा जब तक ढाई किलो तक नहीं हो जाए, तब तक यह केयर दी जाती है। कई बार मां पूरे दिन अपन बच्चे को केएमसी दे सकती है। वहीं बच्चा रोने लगे या असुविधा महसूस करें तो एमसी बंद करने का संकेत मिलता है।
कम वजन के बच्चो के लिए केएमसी से लाभ
जिले में कुपोषण और अन्य कारणों से कम वजन के बच्चे पैदा होने का आंकड़ा बढ़ रहा है। ऐसे बच्चों के लिए यहां संचालित केएमसी काफी लाभदायक साबित हो रहा है। यहां सेंटर में विभिन्न प्रकार की सुरक्षा के साथ नवजातों को केएमसी दी जा रही है। इसके लिए माताओं को भी कुपोषण से बचने के लिए जानकारी दी जा रही है।
डॉ. धीरज सेन, प्रभारी, मातृ एवं शिशु चिकित्सा इकाई, प्रतापगढ़

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