एक वर्ष पहले किसानों नहीं मिला बीमा

प्रतापगढ़.
जिले में किसानों को एक वर्ष पहले का फसल बीमा राशि नहीं मिली है। वहीं अब खरीफ की फसल का बीमा किया जा रहा है। जिसमें बीमा प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पोर्टल अव्यवहारिक होने के कारण अधरझूल में है।

By: Devishankar Suthar

Published: 12 Jul 2021, 06:57 AM IST


-कई किसानों को नहीं मिला बीमा
-गत वर्ष रबी और खरीफ में कई किसानों को रखा गया वंचित
-बीमा प्रक्रिया में भी फंसे हुए है किसान
प्रतापगढ़.
जिले में किसानों को एक वर्ष पहले का फसल बीमा राशि नहीं मिली है। वहीं अब खरीफ की फसल का बीमा किया जा रहा है। जिसमें बीमा प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पोर्टल अव्यवहारिक होने के कारण अधरझूल में है। ऐसे में किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। ऐसे में किसानों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर किसानों को बीमा राशि दिलाने की मांग की है।
जिले में पहले ही किसानों की हालत खराब है। वहीं दूसरी ओर गत वर्ष 2020 में खरीफ की फसल में सोयाबीन की फसल का खण्ड वृष्टि के नुकसान हो गया है। इसका मुआवजा देने से जहां सरकार ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया है कि कि नुकसान सरकारी मापदंड से नीचे है। वहीं दूसरी ओर फसल बीमा कम्पनी ने भी प्रतापगढ़ में ७० हजार में से अल्प संख्या मात्र 20 हजार 500 को न्यूनतम बीमा 20.5 करोड़ राशि भुगतान कर मात्र औपचारिकता ही निभाई है। इसी तरह रबी में चना, मसूर की फसल के खराबे का जिन किसानों ने आवेदन किया। उनको बीमा राशि देने की प्रक्रिया अभी तक शुरू भी नहीं हो पाई है।
क्षेत्र के किसानों ने मांगों को लेकर मांग उठाई है। जिसमें बताया कि सरकार किसानों को संबल प्रदान करें। मुआवजा स्वीकृत कर एवं फसल बीमा कम्पनियों को यथोचित बीमा राशि आंवटन के लिए पाबंद करें। हालांकि अल्पवृष्टि से क्षतिग्रस्त सोयाबीन फसल खरीफ 2019 के खराबे का मुआवजा सरकार ने किसानों को दिया है। लेकिन जिन किसानों का ब्यौरा विलंब से उच्च कार्यालयों को भेजा गया। उनको बजट आवंटन के अभाव में अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
किसानों ने विधायक को दिया ज्ञापन
धमोतर. धमोतर के किसानों ने मांगों को लेकर विधायक रामलाल मीणा को ज्ञापन दिया है। जिसमें बताया गया कि फसल बीमा कंपनी ने अभी तक किसानों को मुवावजा नही दिया है। वर्ष 2020 की खरीफ और रबी की फसल पूरी तरह से समाप्त होने से और कोविड19 की दोहरी मार झेलने से किसानों की हालत बहुत खराब है। सरकार से मांग की गई कि किसानों के साथ न्याय करें और बीमा कंपनी की मनमानी को समाप्त कर उचित कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में जितेंद्र शर्मा, किशोर शर्मा, योगेश तिवारी, सुशील शर्मा, चंपालाल शर्मा, चांद खां, विशाल, बंटी राठौर अािद मौजूद थे।
-=--=-=वर्तमान में बीमा प्रक्रिया अधरझूल में
वर्तमान सोयाबीन खरीफ फसल की बीमा प्रक्रिया केंद्र सरकार के अव्यवहारिक पोर्टल के कारण अधरझूल में पड़ी हुई है। क्योंकि इसके मुताबिक बैंक को हर खसरे के लिए अलग अलग डेटा फीड करना पड़ रहा है। जबकि पहले किसान के समस्त खसरों का डेटा एक ही बार में फीड करने का प्रावधान था। इसके चलते जून अंतिम सप्ताह से चली आ रही फसल बीमा प्रक्रिया में मात्र एक प्रतिशत किसानों का ही बीमा हो पाया है। ऐसी स्थिति में 15 अगस्त तक काफी कम किसानों का बीमा हो सकेगा।
नियमों में हो संशोधन, ताकि मिले लाभ
केंद्र सरकार को बीमा प्रक्रिया में नियमों में संशोधन किया जाना चाहिए। इसमें भी पोर्टल में यथोचित संशोधन करना चाहिए। वर्षा के अभाव में भारी संख्या में किसान बुवाई ही नहीं कर पाएं है। जिंहोंने बुवाई कर भी दी है। वहां सोयाबीन फसल वर्षा के अभाव में सूख रही है। इसलिए जरूरी है कि स्थानीय प्रशासन सोइंग फेल्योर रिपोर्ट जनरेट कर राज्य सरकार को 31 जुलाई से पहले भेजें। ताकि नियमों के मुताबिक बीमा कम्पनी 25 प्रतिशत राशि किसानों को देकर क्लेम खत्म कर सके।
कर्नल जयराजसिंह, संरक्षक, भारतीय किसान संघ, प्रतापगढ़

Devishankar Suthar
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