किसानों ने रखा उपवास, दिया धरना

प्रतापगढ़.
भारतीय किसान यूनियन की ओर से शुक्रवार को जिला कलक्ट्री के सामने महाराणा प्रताप सर्कल पर धरना दिया गया। जहां सभी ने सामूहिक रूप से उपवास रखा। जिसमें केन्द्र के कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की गई।

By: Devishankar Suthar

Published: 26 Dec 2020, 09:03 AM IST


-श्रद्धांजलि बलिदान दिवस
-केन्द्र के कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग
- प्रतापगढ़.
भारतीय किसान यूनियन की ओर से शुक्रवार को जिला कलक्ट्री के सामने महाराणा प्रताप सर्कल पर धरना दिया गया। जहां सभी ने सामूहिक रूप से उपवास रखा। जिसमें केन्द्र के कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की गई। इसके साथ ही एमएसपी और नया कानून बनाया जाए। जिसमें सभी फसलों की एमएसपी बढ़ाई जाए और हर वर्ष 10 प्रतिशत महंगाई अनुसार एमएसपी बढ़ाई जाए। यदि कम में कोई भी किसान की फसल व्यापारी या कंपनी खरीद करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष रामनारायण झाझरिया की अध्यक्षता में धरना दिया। जिसमें मुख्य अतिथि मांगीलाल मेघवाल, ब्लॉक विशिष्ट अतिथि भगवानसिंह सिसोदिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारतीय अफीम किसान विकास समिति और प्रचार मंत्री देवीलाल मेघवाल, जिला महासचिव रूपलाल कुमावत, नीमच के अध्यक्ष परसराम मीणा, बड़ावदा के मनमोहन अग्रवाल प्रतापगढ़ शांतिलाल कुमावत, अध्यक्ष दलोदा भगवानलाल शर्मा, कटेरा चित्तौड़ जिला महामंत्री पर्वतसिंह देवास, सांवरलाल कुमावत, मोतीलाल रावत, शंकरलाल गमेती, मोहनलाल कुमावत, किशनलाल शर्मा, चांदमल मेनारिया, नारायण मीणा, बालूराम वीरावली, कमला शंकर, दीपक शर्मा बोरी, कंवरलाल नाथू खेड़ी आदि मौजूद थे। इस मौके पर किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भी दिया गया। दिल्ली में जो किसान शहीद हुुए है, उन सभी किसानों को श्रद्धांजलि दी गई। एक दिन का उपवास रखा गया।
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कृषि कानूनों में हो सुधार
==भारतीय किसान संघ की ओर से उठाई मांगें
अरनोद.
केन्द्र सरकार के कृषि कानूनों में सुधार की मांग किसानों की ओर से की जा रही है। इसके तहत
भारतीय किसान संघ की ओर से मांग उठाई है। संघ के जिला संरक्षक कर्नल जयराजसिंह ने बताया कि भारतीय किसान संघ हमेशा किसानों के हितार्थ मुद्दे उठाकर किसानों के संघर्ष में संबल प्रदान करते आए हैं।
भारतीय किसान संघ तीनों कृषि कानूनों के लिए कोरोना काल की हदबंदी के मध्य नजर ईमेल द्वारा अपने सुझाव तहसील स्तर से निरंतर भेजता आया है। अब जब कानून बन चुके हैं, इसमें मुख्य तौर पर चार संशोधनों की मांग है। पहला, न्यायोचित न्यूनतम मूल्य एमएसपी निर्धारित हो। उससे नीचे खरीद प्रतिबंधित होने का प्रावधान हो। दूसरा खरीद करने वाला व्यापारी केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा रजिस्टर्ड हो। जिसकी समस्त सूचना सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हो। तीसरा किसान की परिभाषा संशोधित होकर किसानों तक ही सीमित हो। पूंजीपतियों यानि कोरर्पोरेट को इसमें शामिल नहीं किया जाए। चौथा किसानों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए पृथक कृषि न्यायालयों का गठन हो।
उन्होंने कहा कि संघ को उम्मीद है कि सरकार एवं आंदोलनकारी किसान दोनों लचीला रुख अपनाते हुए इन बिंदुओं की ओर अग्रसर होकर वर्तमान दीर्घकालिन गतिरोध को समाप्त कर देश में पुन: सौहाद्रपूर्ण किसान हितैषी वातावरण अतिशीघ्र पैदा कर भारत का मान बढ़ाएंगे।
इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि नवगठित कृषि न्यायालय हर जिले में हों और किसानों के मसलों का समाधान इन जिला कृषि न्यायालयों द्वारा जिले स्तर पर ही हो। इसे सुनिश्चित किया जाए। किसान के गृह जिले में विवाद का निपटान हो।

Devishankar Suthar
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