scriptFear of fall armyworm in Rabi Mecca in Kanthal | कांठल में रबी मक्का में फॉल आर्मीवर्म की आशंका | Patrika News

कांठल में रबी मक्का में फॉल आर्मीवर्म की आशंका

locationप्रतापगढ़Published: Dec 25, 2019 08:54:40 pm

Submitted by:

Devishankar Suthar


जिले में इस वर्ष बोई गई रबी मक्का की फसल में फॉल आर्मी वर्म की आशंका को लेकर कृषि विभाग सतर्क हो गया है। इस कीट पर पहले से नियंत्रण के लिए विभाग के अधिकारी और वैज्ञानिकों की टीम प्रतापगढ़ पहुंची। जहां पीपलखूंट क्षेत्र में खेतों का किया निरीक्षण किया गया।

कांठल में रबी मक्का में फॉल आर्मीवर्म की आशंका
कांठल में रबी मक्का में फॉल आर्मीवर्म की आशंका

सचेत हुए कृषि विभाग
किसानों के खेतों में किया निरीक्षण
किसानों को कीटों से सुरक्षा का दिया प्रशिक्षण
प्रतापगढ़
जिले में इस वर्ष बोई गई रबी मक्का की फसल में फॉल आर्मी वर्म की आशंका को लेकर कृषि विभाग सतर्क हो गया है। इस कीट पर पहले से नियंत्रण के लिए विभाग के अधिकारी और वैज्ञानिकों की टीम प्रतापगढ़ पहुंची। जहां पीपलखूंट क्षेत्र में खेतों का किया निरीक्षण किया गया। साथ ही किसानों को फसल में कीटों से सुरक्षा की सलाह दी गई। जिसमें पारम्परिक तरीके और रसायनों के छिडक़ाव की जानकारी दी गई।
गौरतलब है कि इस वर्ष खरीफ की फसल में इस कीट ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसे लेकर विभाग सावचेत हो गया था। रबी के दौरान पीपलखूंट इलाके में मक्का की फसल की बुवाई काफी की जाती है। इसे देखते हुए कृषि विभाग सतर्क हो गया है। इस कीट के दिखाई देने से पहले ही इस पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग की टीम ने क्षेत्र में खेतों में दौरा किया। जहां फसल का निरीक्षण किया। किसानों को इससे निपटने की तकनीक के बारे में बताया। टीम ने रबी मक्का फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट नियन्त्रण एवं प्रबन्धन के बारे में बताया। महिला कृषकों को प्रशिक्षित किया गया। विभाग की टीम ने पीपलखूंट के बोरख्ेाडा गावं में कृषकों के खेतों पर भ्रमण कर प्रशिक्षण दिया गया। इसमें कृषि आयुक्तालय से डॉ. सुवालाल जाट, संयुक्त निदेशक कृषि (पौध संरक्षण) बी.एल. जाट, सहायक निदेशक कृषि (गुण नियंत्रण), डॉ. वी. डी. निगम, कृषि विभाग के सहायक निदेशक ख्यालीलाल खटीक एवं सहायक निदेशक कृषि (सांख्यिकी) गोपालनाथ योगी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। यहां क्षेत्र में करीब एक हजार हैक्टेयर में मक्का फसल की बुवाई की गई है। इसके बाद यहां कार्यालय में कृषि अधिकारियों ने किसान पदाधिकारियों के साथ बैठक ली। जिसमें किसान संंघ जिलाध्यक्ष दूल्हेसिंह आंजना समेत कई किसान मौजूद थे।
कीटों से इस तरह करें बचाव
किसानों को कीटों से बचाव की जानकारी दी गई। विभाग के उप निदेशक मनोहर तुषावरा ने बताया कि किसानों को डॉ. सुवालाल जाट ने जानकारी दी कि रबी मक्का की फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट का प्रभाव एवं नुकसान फसल की विभिन्न अवस्थाओं में होता है। परन्तु कीट का नियन्त्रण फसल की घुटने की अवस्था तक में प्रभावी रुप से किया जा सकता है। इसके लिए पौधे के पोटे को राख अथवा बारीक मिट्टी से भर दिया जाए तो नियंत्रण हो सकता है। जिससे इल्ली की श्वसन क्रिया प्रभावित होकर नष्ट हो जाती है। इसके अलावा खेत में प्रारम्भिक अवस्था में बांस की खप्पच्चियां प्रति एकड़ 10 लगाएं। जिससे पक्षी इन पर बैठकर कीट की लार्वा को खाकर नष्ट कर देंगे। फेरोमॉन टे्रप प्रति एकड 5 लगाए। सॉलर टै्रप का उपयोग करें। इस तरह से कृषन क्रियायें, यान्त्रिक नियन्त्रण, जैविक नियन्त्रण करते हुये कीटनाशी रसायनों के बिना भी फसल को बचाया जा सकता है। जिससें कीटनाशी रसायनो का फसल अवशेषों, मृदा, एवं उत्पाद पर प्रभाव नहीं रहे। जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके बाद भी भी कीट नियन्त्रण नहीं हो पाता है तेा विभागीय पैकेज ऑफ प्रेक्टिस में संतुलित रसायनों का प्रयोग कर सकते है। कृषकों को सलाह दी गई कि पारम्परिक स्त्रोतों एवं विधि का उपयोग करें, रसायनों का उपयोग सुरक्षित एवं संतुलित मात्रा में करते हुए कीट नियन्त्रण करें, ताकि फसलों में रेजिड्यूल प्रभाव नहीं हो। जिससें बीमारियों से बचा जा सकता है।
यह है लक्षण
फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप जिस खेत में होता है। वहां मक्का के पौधे के पत्तों व तने में छिद्र होते है। फॉल आर्मीवर्म के लार्वा तने में ही रहकर नुकसान करते है। जिससे नए पत्ते नहीं आ पाते है।
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