यहां हर मंडरा रहा सिलिकोसिस के संक्रमण का डर

Rakesh kumar Verma

Publish: Feb, 15 2018 10:20:38 AM (IST)

Pratapgarh, Rajasthan, India
यहां हर मंडरा रहा सिलिकोसिस के संक्रमण का डर

यहां हर मंडरा रहा सिलिकोसिस के संक्रमण का डर

3 दर्जन से अधिक को रोजगार
8 हजार बक्से का उत्पादन प्रतिदिन

ये हैं यहां फैक्ट्रियां
सोप स्टोन फेक्ट्री
सीमेन्टेड ईंट फेक्ट्री
मसाला फेक्ट्री


प्रतापगढ़. प्रतापगढ़ के वार्ड नम्बर 1 स्थित रीको औद्योगिक क्षेत्र है। उद्योगों के लिहाज से यहां कोई बड़ी औद्योगिक ईकाइयां स्थापित नहीं हैं। अधिकांश रीको एरिया घनी आबादी में तब्दील हो गया है। कारखानों के नाम पर दो-तीन फैक्ट्रियां जरुर हैं, जो यह आभास करा रही हैं कि यह कभी प्रतापगढ़ का औद्याोगिक क्षेत्र हुआ करता था। हां ये जरुर है कि स्लेट पेंसिल की यहां 7 यूनिट संचालित हो रही हैं। जिनमें 5 दर्जन से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया हो रहा है। हालांकि स्लेट पेंसिल कारखाना घनी आबादी में स्थापित नहीं किया जा सकता है। इससे निकलने वाली डस्ट (धूल) स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती है। सुरक्षा उपकरणों के बाद भी स्लेट कटर से उड़ती धूल बस्ती के लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रही है। वहीं यहां संचालित आंगनवाड़ी और मदरसों में मासूम भी धूल की चपेट में आ रहे हैं।
रोजगार के साथ रोग भी
हालांकि 7 यूनिट में कच्ची बस्ती के 3 दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। वहीं घरेलु कामकाजी महिलाओं के लिए ये कारखाने आजीविका का प्रमुख स्त्रोत हैं। घर के पास ही होने से इन्हे कारखानों व घर पर पैकेजिंग आदि का कार्य वर्ष पर्यन्त मिलता है। जिससे इनकी आजीविका चलती रहती है। लेकिन क्षेत्र में संचालित मदरसा, स्कूल, और आंगनवाड़ी केन्द्र में कारखानों से उडऩे वाली धूल की जद में आते हैं, जिससे यहां पढऩे वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर स्लेट पेंसिल की धूल विपरीत प्रभाव डाल रही है। इसके चलते यह इकाइयां रोजगार के साथ रोगों को भी खुले आम निमंत्रण दे रही हैं।
इसको लेकर अब तक कोई भी जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि नियमानुसार घनी आबादी में इस तरह की कोई इकाई स्थापित नहीं की जा सकती है।

आंगनवाड़ी केन्द्र और मदरसा और स्कूल भी धूल की जद में
कच्ची बस्ती में संचालित मेहताबिया मदरसा पब्लिक स्कूल एवं आंगनवाड़ी केन्द्र दोनों में तकरीबन सौ से अधिक बालक बालिकाएं पढऩे आते हैं। दोनों केन्द्रो के करीब ही स्लेट पेंसिल की ईकाइयां संचालित हो रही हैं। ईकाइयों से निकलने वाली डस्ट सीधे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
कच्ची बस्ती में फैल रही स्लेट स्लरी
स्लेट पेंसिल की सिल्लियों में अनुपयोगी सिल्लियां और पेंसिल कटने के बाद वेस्ट मटेरियल को कच्ची बस्ती में इधर उधर खुर्द बुर्द करने से क्षेत्र में चारों और इसके ढेर लगे हुए हैं। जो बारिश के दिनों में फिसलन पैदा कर हादसों का सबब बनते हैं।

 

ये हो सकता है...
हालांकि जब ये ईकाइयां यहां स्थापित की गई थी उस समय यह क्षेत्र इतना आबाद नहीं था। ये जिम्मेदार अधिकारियों और सम्बन्धित विभागीय उदासीनता का नतीजा है कि सरकार की ओर से औद्योगिक क्षेत्र घोषित होने के बाद भी यहां लोग बसते गए और धीरे-धीरे औद्याोगिक क्षेत्र कच्ची बस्ती में तब्दील हो गया। सम्बन्धित विभाग और सरकार को चाहिए की इन ईकाईयों के लिए आबादी से दूर सुरक्षित जमीन का आवंटन किया जाए। जिससे ईकाइयों में कार्यरत लोगों का रोजगार भी नहीं छुटे और बस्ती के लोगों को संक्रमित हवा से छुटकारा मिल सके।

श्वास लेना हो रहा दूभर
दिनभर धूल उड़ती रहती है। यहां रहना मुश्किल हो रहा है। घर की छत पर देखों कितनी धूल जमी हुई है। तेज हवा चलने पर धूल में घर में खाने पीने आदि में जम जाती है। बहुत परेशानी है। गर्मी के दिनों में तेज हवा और आंधियों के चलते पूरी बस्ती धूल से घिर जाती है।
अनसार अहमद कुरेशी
बस्तीवासी

कारखाने अन्यत्र स्थानान्तरित हो...
यहां संचालित स्लेट पेंसिल कारखानों से दिन भर धूल उड़ती है जो घरों मे जम जाती है। दिन भर धूल साफ करने में बीत जाता है। इस धूल से खाने पीने का सामान भी सुरक्षित नहीं रख पाते है। खासकर यहां आंगनवाड़ी केन्द्र के पास संचालित कारखाने से निकलने वाली धूल मासूम बच्चों के स्वास्थ्य को अधिक प्रभावित करती है। दिन भर उड़ती धूल से श्वास लेना भी दूभर हो रहा है। इन कारखानों को अन्यत्र स्थानान्तरित कर लोगों को परेशानी से छुटकारा दिलाया जा सकता है।
बाबू मोग्या
बस्ती वासी

स्लेट पेन्सील कारखानों की डस्ट सांस के साथ फेफडों में जमती है जो धीरे-धीरे सिलिकोसिस नामक बीमारी का रूप धर लेती है। जिससे दमा, निमोनिया आदि रोग होते है। विशेषकर बच्चों में यह जल्दी असर करती है। घनी आबादी में यह कारखाने संचालित नहीं होने चाहिए। विशेषकर बच्चों को इससे दूर रखना चाहिए।
डॉ. धीरज सेन
शिशुरोग विशेषज्ञ
जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ (राज.)

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