पोता ही निकला दादी का हत्यारा

छोटीसादड़ी. थाना क्षेत्र के हड़मतिया ग्राम पंचायत के हमेरपुर चौकी गांव में १४ अक्टूबर रात घर में सो रही एक वृद्धा की गहनों के लिए निर्मम हत्या का पुलिस ने शनिवार को खुलासा किया। वृद्धा की हत्या करने वाले उसी के पोते को गिरफ्तार कर उसके पास से गहने भी बरामद कर लिए है।

By: Devishankar Suthar

Published: 18 Oct 2020, 12:52 PM IST


-=- हमेरपुर चौकी गांव में हुई थी वृद्धा की हत्या
छोटीसादड़ी. थाना क्षेत्र के हड़मतिया ग्राम पंचायत के हमेरपुर चौकी गांव में १४ अक्टूबर रात घर में सो रही एक वृद्धा की गहनों के लिए निर्मम हत्या का पुलिस ने शनिवार को खुलासा किया। वृद्धा की हत्या करने वाले उसी के पोते को गिरफ्तार कर उसके पास से गहने भी बरामद कर लिए है।
सीआई रविन्द्रप्रताप सिंह ने बताया कि 15 अक्टूबर को जलोदा जागीर पुलिस चौकी से सूचना मिली कि हमेरपुर चौकी में एक वृद्धा की हत्या हो गई है। इस पर पुलिस मौके पर पहुंची। जहां रामचंद्र पुत्र सुखलाल दत्तक पुत्र भैरा मीणा ने रिपोर्ट देकर बताया कि भेरा पुत्र दल्ला मीणा के कोई संतान नहीं होने से रामचंद्र को गोद रखा। जिनकी जमीन जायदाद व सारा कार्य वही ही देखता है। रामचन्द्र की गोद वाली माता फूलीबाई(80) पत्न भैरा मीणा अलग ही रहती थी। स्वयं का खाना भी अलग ही बनाती थी। १४ अक्टूबर रात को भी वृद्धा फुलीबाई उनके मकान में सोई हुई थी। दूसरे दिन सुबह करीब 10.11 बजे तक वृद्धा घर से बाहर नहीं निकलने पर रामचन्द्र की पुत्री दुर्गा उसके घर पहुंची, जहां वृद्धा को देखा तो वह मरी हुई पड़ी थी। पैरों में चांदी की कडिय़ां नहीं थी। इस पर पुलिस ने मृतका का शव छोटीसादड़ी चिकित्सालय की मोर्चरी ले जाकर पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों के सुपुर्द कर हत्या का मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
प्रकरण की गंम्भीरता को देखते हुए पुलिस टीम गठित कर अनुसंधान किया। पूछताछ में रामचन्द्र के पुत्र प्रेमचन्द के बारे में जानकारी में सामने आया कि प्रेमचन्द घटना के दिन घर पर था। पोस्टमार्टम कराने के बाद में वापस घर पर नहीं आया और अंतिम संस्कार करने भी नहीं आया है। उसका फोन भी बन्द बता रहा है, उसका कोई पता नही चल रहा है। जिस पर पुलिस को प्रेमचंद पर शक हुआ। मृतका के पोते प्रेमचन्द मीणा को जलोदा जागीर से डिटेन कर पूछताछ की।जिसमें उसने हत्या कबूली।
-पत्नी के इलाज के लिए नहीं थे रुपए, दादी को उतारा मौत के घाट
पुलिस पूछताछ में प्रेमचन्द ने घटना के संबंध में बताया कि तीन-चार माह सें वह घर पर ही था। छोटी-मोटी मजदूरी करता था। उसकी पत्नी सीमा की तबीयत अक्सर खराब रहती थी। जिसके अभी निम्बाहेड़ा से इलाज चल रहा था। उसके पास रुपए नहीं थे। इस पर दादी फुलीबाई से इलाज के लिए रुपए की मांग भी की थी। लेकिन दादी ने रुपए देने से मना कर दिया था। जबकि दादी अन्य लोगों रुपए देती थी। 14 अक्टूबर की रात को उसे नींद नहीं आ रही थी। रुपए नहीं होने से तनाव में था। रात को एक बजे प्रेमचंद घर से सामने फुलीबाई के कमरे में गया। कमरे का दरवाजा खुला था। प्रेमचंद ने फुलीबाई की गर्दन पकडक़र गला दबा दिया। जिससे उसने कुछ देर हाथ पैर हिलाए, उसके बाद मे मर गई थी। फिर लोहे के सलिये से उसके पैरो की चांदी की दो कडिया़ निकाल ली।उसके बाद में वापस घर पर आ गया था।
पुलिस ने चांदी की दो कडिया व घटना में प्रयुक्त लोहे की बिजणी बरामद की है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया।

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