नन्हीं सी जान क्या जाने, कौन है पालनहार

नन्हीं सी जान क्या जाने, कौन है पालनहार

Rakesh kumar Verma | Publish: Jun, 14 2018 10:52:50 AM (IST) Pratapgarh, Rajasthan, India

सात माह का बालक खेल रहा है महिलाकर्मियों की गोदी में

कभी रोता तो कभी मुस्कुराता है
प्रतापगढ़. यहां शहर के बस स्टैंड पर 12 जून को लावारिस हालत में मिला सात माह का बालक बाल सम्प्रेषण एवं शिशु गृह में है। यहां लाए गए शिशु को महिलाकर्मियों का संरक्षण मिल रहा है। उसे पालने में सुलाया जा रहा है। समय-समय पर दूध और पानी पिलाया गया।बालक यहां महिलाकर्मियों की गोदी में खेल रहा है। एक अबोध बालक को कुछ भी मालूम नहीं है कि उसका पालनहार कौन है। ऐसे में सात माह का यह बालक महिलाकर्मियों का दुलारा बनता जा रहा है।
एक ही सवाल, सात माह बाद क्यों छोड़ा
बस स्टैंड पर लावारिस हालत में मिले सात माह के बालक को हालांकि अभी बाल शिशु गृह में रखा गया है।लेकिन सभी के जेहन में एक ही बात घूम रही है कि आखिर सात माह बाद इसकी मां ने इसे लावारिस हालत में क्यों छोड़ा?
एक मां ने छोड़ा, चार का साया
यहां सात माह के बालक को बाल सम्प्रेषण गृह में चार महिलाकर्मी संभाल रही है। ऐसे में बालक को चार आया का दुलार और प्यार मिल रहा है। बालक को यहां लाने के समय ग्यारसीबाई ने संभाला था।इसके बाद पूजा ने रात को अपने पास रखा। सुबह से दोपहर तक दुर्गादेवी ने बालक को नहलाया, गाय का दूध पिलाया गया।
एक माह तक पुलिस जांच
लावारिस हालत में मिले बालक के परिजनों को पता लगाने के लिए बाल कल्याण समिति की ओर से पुलिस को रिपोर्ट दी है।इसके तहत पुलिस को इसके परिजनों का पता लगाना है। एक माह तक बालक के परिजनों का पात नहीं लगने पर गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस दौरान बालक का पालन-पोषण यहीं पर बाल शिशु गृह में किया जाएगा।
बाल कल्याण समिति ने ली बालक की जानकारी
बाल संप्रेषण गृह में बुधवार को बाल कल्याण समिति ने दौरा किया और बालक के बारे में जानकारी ली।इस दौरान सम्प्रेषण गृह के चंदूलाल कटारा, अध्यक्ष अमित जैन, सदस्य प्रीति शर्मा, भावना छोरिया आदि ने इसकी देखरेख करने और समय-समय पर दूध और पानी पिलाने के बारे में जानकारी ली।

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कांठल में रक्तदान को लेकर जागरुकता जरूरी
रक्तदान को लेकर अब भी कई भ्रांतियां
प्रतापगढ़. आदिवासी बाहुल्य कांठल क्षेत्र में रक्तदान को लेकर जागरुकता नहीं है। लोगों में रक्तदान को लेकर कई भ्रांतियां भी हैं। ऐसे में कई बार जिला चिकित्सालय में रक्त नहीं मिलने की परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। हालांकि आवश्यकता वाले लोगों के लिए रक्त की व्यवस्था निकटवर्ती जिलों के ब्लड बैंकों से की जाती है। लेकिन यहां जिले में रक्तदान को लेकर जागरुकता की महती आवश्यकता है। यहां के लोगों में रक्तदान को लेकर भ्रांतियों को दूर किया जाने पर काफी हद तक समस्या से निजात मिल सकती है।
कतराते हंै रक्तदान से
यहां किसी को रक्त की आवश्यकता होने पर जब मरीज के परिजनों से रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है, तो वे कतराते हुए बहाना बनाने लग जाते हैं। कई बार तो स्थिति यह हो जाती है कि ब्लड बैंक से ही कई परिजन तो बाहर चले जाते हैं। ऐसे में मरीज को तो रक्त उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन ब्लड बैंक में यूनिट की कमी हो जाती है। लोगों में एक प्रमुख भ्रांति यह है कि रक्तदान से शरीर में कमजोरी आ जाती है। जबकि वास्ततिवकता यह है कि शरीर में एक यूनिट रक्त 24 घण्टों में पुन: तैयार हो जाता है। इसके साथ ही रक्तदान से कई बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

कुछ जागरुकता तो आई है
यह सही है कि जिले में रक्तदान को लेकर अभी लोगों में कई भ्रांतियां है। इससे रक्तदान करने से ही कतराते है। यह स्थिति प्रतापगढ़, अरनोद, पीपलखूंट में अधिक है। छोटसादड़ी में रक्तदान को लेकर लोग अधिक जागरुक हैं। धरियावद में भी अन्य इलाकों की तुलना में कुछ जागरुकता तो है। अभी स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर काफी भ्रांतियां है। जिले के विभिन्न संगठनों के माध्यम से शिविर आयोजित होते हैं। जिससे रक्त की कुछ हद तक आपूर्ति हो रही है।
डॉ. ओ.पी. दायमा
वरिष्ठ विशेषज्ञ पैथोलोजी
जिला चिकित्सालय, प्रतापगढ़

जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक का आंकड़ा
जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में 13 जून तक 502 यूनिट रक्त संग्रहित हुआ है। इसी प्रकार वर्ष 2017 में कुल 2530 यूनिट रक्त आया। इस वर्ष कुल 32 शिविर लगाए गए। इन शिविरों में 1351 यूनिट रक्त का संग्रहण किया गया।


पांच वर्ष में शिविर और यूनिट की स्थिति
वर्ष 2014 10 शिविर 422 यूनिट
वर्ष 2015 18 शिविरों 768,
वर्ष 2016 --- 656,
वर्ष 2017 32 शिविरों 1351 यूनिट
वर्ष 2018 में (मई तक) 11 शिविरों 502 यूनिट

छोटीसादड़ी में शिविर का ब्लड नीमच और उदयपुर
जिले के छोटीसादड़ी में लगाए जाने वाले शिविरों का रक्त उदयपुर और नीमच चिकित्सालयों के ब्लड बैंक में पहुंचाया जाता है। यहां की विभिन्न संस्थाएं उदयपुर और नीमच से जुड़ी हुई है। इस कारण यहां से शिविरों में संग्रहित रक्त नीमच और उदयपुर जाता है।

इन्हें तो समय पर चाहिए ही होता है रक्त
गौरतलब है कि जिले में थैलेसीमिया से ग्रसित 15 बच्चों सहित अन्य कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान व दुर्घटना के आवश्यकता होने पर रक्त उपलब्ध कराना अति आवश्यक होता है। इसके अलावा जिले में दो रोगी ए प्लास्टिक एनिमिया रोग से ग्रसित है। इन रोगियों को प्रति माह एक-एक यूनिट की आवश्यकता होती है। थैलेसीमिया से ग्रसित रोगियों को एक या दो यूनिट की आवश्यकता होती है।
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