अब सरकार का ‘सहारा’ ही ‘आसरा’

अब सरकार का ‘सहारा’ ही ‘आसरा’
अब सरकार का ‘सहारा’ ही ‘आसरा’

Devi Shankar Suthar | Updated: 17 Sep 2019, 08:04:14 PM (IST) Pratapgarh, Pratapgarh, Rajasthan, India


भारी बारिश से फसलें हुई खराब
फसल खराबे का मुवाअजा नहीं मिला तो किसानों के सामने होगा आर्थिक संकट
अतिवृष्टि से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
उठी मुआवजे की मांग


भारी बारिश से फसलें हुई खराब
फसल खराबे का मुवाअजा नहीं मिला तो किसानों के सामने होगा आर्थिक संकट
अतिवृष्टि से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
उठी मुआवजे की मांग
प्रतापगढ़
गत दिनों हुई तेज बारिश में बची हुई फसलें भी बह गई है। ऐसे में किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
जिला किसान संघर्ष समिति की ओर से जिला कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया गया। मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। जिला अध्यक्ष दूल्हेसिंह आंजना के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि अतिवृष्टि के कारण फसलें नष्ट हो गई है। वरमंडल के किसानों ने बताया कि भारी बारिश के कारण पूरे गांव में किसानों की फसलें नष्ट हो गई है। सोयाबीन, मक्का और उड़द की फसलें नष्ट हो गई है। इसके साथ ही पशुओं में भी बीमारी हो गई है। कई कच्चे मकान भी ढह गए है। ऐसे में सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। इस मौके पर सरपंच, चन्द्रशेखर शर्मा, नारायणसिंह सिसोदिया, महिपाल समेत कई किसान मौजूद थे।
मोखमपुरा
क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश के बाद खेतों में खड़ी सोयाबीन की अगेती फसल में फलियों में से सोयाबीन का अंकुरण होने लगा है। प्रतापपुरा के कृषक मोहनलाल पाटीदार, देवीलाल पाटीदार ने बताया कि जो अगेती फसल है। उसमें अंकुरण हो गया है और जो सोयाबीन खेतों में खड़ी है जो पछेती फसल है, उसमें इसमें भी फूल के झड़ गए है। लगातार हो रही बारिश से उसमें फलियां नहीं है। इससे प्रकृति ने किसानों के मुंह का निवाला छीन लिया है।
अरनोद
उपखण्ड में लगातार बरसात के चलते सोयाबीन पूर्ण चौपट हो चुकी है। सोयाबीन पककर तैयार थी, लेकिन फलियों में अंकुरण होने लगा है। किसान गोरधन राठौर, देवीलाल रैदास ने बताया कि अत्यधिक व लगातार बरसात से सोयाबीन परिपक्व का समय होने से अब सोयाबीन वापस अंकुरित होने लगी है। जिससे अब सोयाबिन तो पुर्ण रूप से खराब हो चुकी है।
लालगढ़ के लालगढ़ खेड़ा ग्राम में पटवारी धनराज मीणा ने फसलों का निरीक्षण किया। सोयाबीन फसल जो बिल्कुल ही नष्ट हो गई है। गिरदावरी करते हुए सभी किसानों को उचित मूल्य मिले। अच्छा मुआवजा दिया जाए और अच्छी तरह से गिरदावरी की जाए। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष और ब्लॉक महासचिव कांग्रेस कमेटी अरनोद उदयलाल मीणा, वार्ड पंच कंवरलाल गोपाल, खातूबा, करूलाल, पृथ्वीराज, राधेश्याम, भेरूलाल, अंबालाल, ईश्वरलाल, रामलाल, गौतम समेत किसान मौजूद रहे।
करजू. छोटी सादड़ी तहसील में पिछले एक महिने से मुसलाधार बारिश होने के कारण खरीफ की फसल पूर्ण रूप से खराब हो गई है। सोयाबीन की फसल पुन: अंकुरित होकर खेत में ही गलने लग गई है। किसानों को उम्मीद पर पानी फिर गया है। सोयाबीन, मक्का, मुंगफली, उड़द, ज्वार, ग्वार सहित कई फसलों की बुआई की थी। किसानों ने मंहगे व उत्तम किस्म के बीज लाकर बुआई की थी। शुरूआती मानसुन के बाद अच्छी फसले अंकुरित भी हो गई थी। किसानों को बड़ी आशा इस बार अच्छी फसले होने से अच्छी आय थी होगी। खेतों में फसले पककर तैयार हो गई है। लेकिन पिछले एक माह से हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अब किसानों के पास हाथ मलने के अलावा कुछ भी शेष नहीं रहा।
नहीं हुआ सर्वे
खेतों में पूरी तरह से फसलों में खराब होने के बाद किसानों प्रशासन से खेतों का सर्वे करवाने की मांग की है। किसान देवराम जोशी, सत्यनारायण जणवा, ईश्वरलाल जणवा, मांगीलाल जणवा, रामनारायण पटेल, बंशीलाल मीणा, मिठूलाल जणवा सहित किसानों ने कहा कि खेतों में हुए खराबे के बाद अब सरकार पर ही आस है। ताकि किसानों को कम से कम लागत तो मिल सके। किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से प्रशासन से सर्वे की मांग करने के बाद भी अभी तक खेतों में न तो कोई अधिकारी पहुंचे है और न ही कोई जनप्रतिनिधि।
दो ग्राम पंचायतों में सर्वाधिक हुई बारिश
छोटी सादड़ी तहसील में कुल 24 ग्राम पंचायतें है। सभी ग्राम पंचायतों में अधिक बारिश के कारण फसलों में खराबा हुआ है। लेकिन करजू व गणेशपुरा दो ग्राम पंचायतों में सर्वाधित बारिश हुई है। किसानों की माने तो इन दोनों ग्राम पंचायतों में 90 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है।
पशुओं को खिलाने के लिए भी नहीं बचा चारा
किसानों ने बताया कि अधिक बारिश के कारण धान का दाना भी नहीं बचा है। वही फसले गलने के कारण चारा भी खराब हो गया है। अब किसानों के सामने अपने पशुओं को खिलाने के लिए चारा का भी संकट हो गया है। किसानों ने बताया कि पशुओं को खिलाने के लिए चारा भी बाहर से महंगे दामों में खरीदकर लाना पड़ेगा।

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