पांच दिनों बाद खुला मौसम


प्रतापगढ़. जिले में गत दिनों हुए मावठ के बाद मौसम बदल गया था। जो पांच दिन तक कोहरे, धुंध के आगोश में रहा। वहीं इन दिनों शीतलहर से मौसम सर्द रहा। इससे सोमवार को राहत मिली। मौसम खुल गया और धूप निकल आई। तापमान में बढ़ोतरी के कारण मोयला भी हवा में उडऩे लगा है। इससे लोगों को काफ परेशानी उठानी पड़ी। वहीं फसलों में मोयला और इल्लियों का प्रकोप होने से किसानों ने भी कीटनाशक का छिडक़ाव शुरू कर दिया है।

By: Devishankar Suthar

Published: 12 Jan 2021, 09:25 AM IST


-फसलों में मोयले और इल्लियों का प्रकोप
-कीटनाशक का छिडक़ाव करने में लगे भूमिपुत्र
-तापमान में बढ़ोतरी
प्रतापगढ़. जिले में गत दिनों हुए मावठ के बाद मौसम बदल गया था। जो पांच दिन तक कोहरे, धुंध के आगोश में रहा। वहीं इन दिनों शीतलहर से मौसम सर्द रहा। इससे सोमवार को राहत मिली। मौसम खुल गया और धूप निकल आई। तापमान में बढ़ोतरी के कारण मोयला भी हवा में उडऩे लगा है। इससे लोगों को काफ परेशानी उठानी पड़ी। वहीं फसलों में मोयला और इल्लियों का प्रकोप होने से किसानों ने भी कीटनाशक का छिडक़ाव शुरू कर दिया है।
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चने की फसल में बढ़ा इल्ली का प्रकोप
छोटीसादड़ी. क्षेत्र में पानी की कमी के कारण इस वर्ष किसानों ने चने की बोवनी अधिक की है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के चलते इन दिनों क्षेत्र में बोई गई चने की फसल को मौसम की मार अधिक झेलनी पड़ रही है। गत दिनों सर्द हवा व पाले से खेतों में चने की फसल प्रभावित हुई है। वहीं लगातार मौसम में जो बदलाव आ रहा है उससे चने में इल्ली का प्रकोप बढ़ा है। चना फसल में फलीछेदक की संभावना है। जिसके कारण चने की उत्पादकता घट सकती है। किसानों ने बताया कि इस कीट की मादा पत्तियों एवं शाखाओं पर भूरे हरे रंग के एक-एक कर अंडे देती है। छोटी इल्लियां पीली भूरे रंग की होती है जो शुरू में पत्तियों के पर्णहरित को खाती है। बड़ी इल्लियां फूलों को खाती हैं। जैसे-जैसे इल्ली बड़ी होती जाती है। यह फली में छेद करके अपना मुंह अंदर डालकर पूरा दाना खा लेती है। चने के खेतों में इन दिनों बगुला, टिटहरी, काली मैना जैसे कई पक्षी इन इल्लियों को खाते देखा जा सकता है। फलीछेेदक एवं कीट के नियंत्रण में कीटभक्षी पक्षियों का महत्वपूर्ण योगदान है। किसान चने की फसल को फलीभेदक एवं कीट के नियंत्रण के लिए जैविक नियंत्रण व रासायनिक छिडक़ाव करने में जुटे हुए है।
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रामनगर गांव में नालियों का अभाव
चूपना.
निकटवर्ती रामनगर गांव में नालियों के अभाव में रोड पर गंदा पानी बह रहा है। यहां पर खरखड़ा गांव की तरफ जाने वाले रास्ते पर सीसी बनी हुई है। लेकिन गंदा पानी निकलने के लिए नालियां नहीं होने कारण रोड पर पानी फैल रहा है। वार्ड पंच संगीता डांगी ने पंचायत की हर बैठक में नाली निर्माण के लिए अवगत कराया। लेकिन अभी तक नाली निर्माण नहीं किया गया है। ऐसे में गंदा पानी रोड पर बहने बीमारियों का कारण बन रहा है।
इस संबंध में सरपंच राजेश कटारा ने बताया कि ग्राम पंचायत में किसी भी प्रकार का बजट नहीं होने के कारण नाली निर्माण नहीं हो रहा है। जैसे ही बजट आएगा, नाली निर्माण किया जाएगा।

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