शहर की सीमा से ईंट भट्टे हटाने का आदेश

- लोक अदालत ने सुनाया फैसला

By: Rakesh Verma

Published: 03 Mar 2019, 11:27 AM IST

भट्टा संचालकों को दिया तीस जून तक समय
निर्धारित अवधि के बाद प्रशासन हटाएगा
प्रतापगढ़. शहर में संचालित किसी प्रकार के ईंट भट्टों को पर्यावरण और जन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए लोक अदालत ने इन्हें शहरी सीमा से हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने समस्त ईंट भट्टा संचालकों को तीस जून तक समय देते हुए आदेश दिया कि इस सीमा तक वे अपने भट्टे हटा लें, अन्यथा जिला प्रशासन को जबरन ये भट्टे हटाने होंग। इससे यदि किसी तरह का नुकसान हुआ तो इसके लिए ईंट भट्टा मालिक स्वयं जिम्मेदार होंंगे। अदालत ने अपने फैसले में जिला प्रशासन और नगर परिषद को भी आदेश दिए कि यदि निर्धारित समय सीमा तक ईंट भट्टे नहीं हटे तो प्रशासन बलपूर्वक हटा दें। इसके लिए इसी फैसले में आदेश दिया जाता है।

इस ब ारे में दिनेश खोईवाल ने लोक अदालत में अलग-अलग परिवाद लोक अदालत में दायर किया था। लोक अदालत ने इन परिवादों को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिए। परिवाद में कहा गया कि शहर के प्रतापगढ़ से लगते हुए हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, रोडवेज बस स्टैण्ड जनजाति भवन आदि से लगते हुए कई लोगों के ईंट भट्टे हैं, जो अवैध रूप से उक्त भूमि पर कब्जा कर ईटों का निर्माण लम्बे समय से कर रहे हैं। इस क्षेत्र के आस पास लगता हुए सार्वजनिक बस स्टैण्ड तथा धार्मिक स्थान हैं। यहां सैंकडों लोग यहां आते रहते हैं और कार्यक्रम में शरीक होते हैं। भट्टे शहर के निकट होने से निवासियों और आने जाने वाले व्यक्तियों को जहरीला धुआं फैलने के कारण बीमारियों का खतरा बना रहता है तथा प्रदूषण भी काफी गम्भीर रहता है। इससे निवासियों के स्वास्थ्य पर गम्भीर असर पड रहा है।
परिवाद में कहा गया कि इस बारे में 14 नवम्बर 2018 को तथा इससे भी पूर्व कईं बार नगर परिषद एवं जिला कलक्टर को अवैध रूप से चलते हुए भट्टों को हटाने के लिए ज्ञापन दिये गये, लेकिन कोई समुचित कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई। इसके बाद लोक अदालत में परिवाद पेश किया गया।
इसी प्रकार एक अन्य परिवाद मुकेशचन्द्र शर्मा तथा गोविन्दलाल गुर्जर का था। उन्होंने बताया कि शहर के बगवास वार्ड के पास आनन्द होटल से होकर एपीसी स्कूल जाने वाले रास्ते पर काफी ईंट भट्टे लगे हुए हैं, जो लम्बे समय से अतिक्रमियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इन्हें हटाया जाना चाहिए।
अदालत ने दोनों पत्रावलियों का अवलोकन किया। दोनों में कमोबेश अवैध ईंट भट्टों से संबंधित मामला होने से दोनों प्रकरणों को समेकित कर एक साथ सुनवाई की गई।
दोनों प्रकरणों में नोटिस जारी हुए, लेकिन विधिवत कोई जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ। लेकिन दोनों प्रकरणों में अवैध भट्टा संचालन करने वाले मालिकों ने अपने अधिवक्ता पारसमल जैन के साथ उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि वे शहर से लगते हुए कतिपय विवादित स्थानों पर अतिक्रमण कर अवैध ईंट भट्टों का संचालन कर रहे हैं। वे मजदूर पेशा व्यक्ति हैं तथा मौके पर काफी माल बिखरा पड़ा है, जिसे समेटने के लिए कम से कम तीन माह का समय लगेगा तथा वे तीन माह बाद स्वेच्छा से ईंट भट्टों को हटाने के लिये तैयार है। इसलिये उन्हें तीन माह का समय दिया जाए।
इसके अलावा संबंधित सरकारी विभागों की ओर से मौखिक रूप से बताया गया कि शहर से लगते हुए विवादित क्षेत्र में जहां जहां भी ईंट भट्टे लगे हैं, वे गैर कानूनी है। उन्हें किसी भी तरह का लाइसेंस सक्षम अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया तथा ये लोग अवैध ईंट भट्टों का संचालन कर प्रतापगढ़ के निवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन्हें हटाया जाना आवश्यक है।
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प्रशासन ने भी माना अवैध है ईंट भट्टे

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पूर्व में पारित प्रशासनिक आदेशों का अवलोकन किया। इसमें पाया गया कि प्रशासन ने भी ईंट भट्टों को अवैध माना है। लेकिन कोईठोस कार्रवाई नहीं होने से समस्या बढ़ती गई। इसके लिए समुचित आदेश पारित किया जाना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि ईंट भट्टों से जहरीले धुएं का निर्माण होता है। इससे एक-दो किलोमीटर के क्षेत्र में वहां के निवासियों को श्वांस लेने में तकलीफ, दम घुटना तथा अनेक प्रकार कि बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जो क्षमा करने के लायक नहीं है। इसलिए दोनों प्रकरणों में दर्ज समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों एवं उद्यमियों एवं दिगर विभागों द्वारा दी गई सहमति के आधार पर दोनों प्रार्थना पत्र स्वीकार किए जाकर विवादित ईंट भट्टा उद्यमियों को प्रकरण में दर्ज स्थानों एवं प्रतापगढ़ शहर की सीमा में संचालित अन्य किसी ईंट भट्टे का संचालन पाया जाए तो उन सभी को हटाये जाने का आदेश दिया जाता है। यह नियत अवधि किसी भी सूरत में 30 जून 2019 को पार नहीं करेगी। इस अवधि में ईंट भट्टा उद्यमी अपना समस्त कच्चा अथवा पक्का माल इंटे इत्यादि अपने खर्चे से हटा लेगें। अन्यथा 30 जून 2019 के बाद जिला प्रशासन एवं नगरपरिषद उन्हें बलपूर्वक हटा देंगे। इस कार्य में किसी भी तरह के नुकसान की जवाबदारी ईंट भट्टों के उद्यमियों की होंगी।
इसी प्रकार अदालत ने यह भी आदेश दिया कि इन दो स्थानों के अलावा प्रतापगढ शहर की सीमा में संचालित अन्य किसी ईंट भट्टों को भी शहर की सीमा से हटाया जाए।
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यहां-यहां बने हुए है ईंट भट्टे
शहर की अधिकांश कॉलोनियां इन ईंट भट्टों से घिरी हुई है। शहर के गल्र्स स्कूज के पीछे, भाटपूरा दरवाजे के बाहर, धरियावद रोड स्थित बगवास कच्ची बस्ती, हाउसिंग बोर्ड रोड कृषि मंडी के पीछे, गौतम नगर, नाकोड़ा नगर, तिलक नगर सहित कई जगह अवैध रूप से ईंट भट्टा संचालित किए जा रहे है।

Rakesh Verma Bureau Incharge
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